झारखंड में ‘हिंदू’ डीलर ने रोका ‘ईसाइयों’ का राशन

  • 9 अक्तूबर 2017
रेहलदाग के ईसाई परिवार इमेज कॉपीरइट Nandini Sinha
Image caption रेहलदाग के ईसाई परिवार

रेहलदाग के शिवा भुइयां को दो महीने से राशन नहीं मिला है.

उनके पास राशन कार्ड है. जो इस बात का प्रमाण है कि वह जन वितरण प्रणाली (पीडीएस) के विक्रेता (डीलर) से अपने परिवार के लिए आवंटित राशन ले सकते हैं.

इसके बावजूद उनके गांव में राशन वितरण के लिए अधिकृत स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) ने उन्हें सितंबर महीने में राशन नहीं दिया क्योंकि वे ईसाई हैं और उन्होंने दुर्गा पूजा के लिए गांव के हिंदुओं को मनमाफिक चंदा नहीं दिया था.

रेहलदाग झारखंड के सुदूर लातेहार ज़िले की पेसरार पंचायत का एक छोटा-सा गांव है.

क़रीब सवा सौ घरों वाले इस गांव में ज़्यादातर आबादी ठाकुर, सोंडिक, साव जैसी जातियों की है. कुछ घर उरांव और भुइयां आदिवासियों के भी हैं.

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Image caption राशन कार्ड

ईसाई बन गए...

शिवा भुइयां कुछ साल पहले तक हिंदू थे. लेकिन उनके टोले के 13 परिवारों ने एक-एक कर हिंदू धर्म छोड़ दिया और स्वेच्छा से ईसाई बन गए.

धर्मांतरण कर ईसाई बनने वाले सारे लोग भुइयां और उरांव आदिवासी हैं. इन सभी लोगों का राशन रोक दिया गया है.

शिवा भुइयां ने बीबीसी से कहा, "दुर्गा पूजा में गांव के लोगों ने हमसे 551 रुपये के चंदे की मांग की थी. हम लोगों ने इतनी बड़ी रकम देने से मना किया, तो मेरे समेत सभी 13 ईसाई परिवारों का राशन रोक दिया गया. उन लोगों ने धमकी दी है कि हमें हमारा अधिकार नहीं मिलेगा और वे हम लोगों को किसी भी तरह का सरकारी लाभ नहीं लेने देंगे."

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Image caption शिवा भुईयां अपने परिवार के साथ

डीलर है हिंदू

शिवा भुइयां के पड़ोसी नमियां उरांव की उम्र 47 साल है. वह मज़दूरी कर अपने छह सदस्यीय परिवार का पेट पालते हैं. इन्हें भी सितंबर महीने में राशन नहीं दिया गया.

शिव ने बताया कि राशन वितरण करने वाले एसएचजी में सभी लोग हिंदू हैं. यह समूह महिलाओं का है, लेकिन इस समूह का सारा काम इनके पतियों के ज़िम्मे है. इनमें से कई लोग गांव की दुर्गा पूजा समिति के सक्रिय सदस्य हैं.

बीबीसी से बातचीत में नमिया उरांव ने कहा, "2 अक्टूबर को गांव में बड़ी बैठक हुई थी. इसमें हम लोगों को धमकी दी गई कि अगर हमने ईसाई धर्म का त्याग कर फिर से हिंदू धर्म नहीं अपनाया तो वे हमें नहर और कुएं का पानी नहीं लेने देंगे. हमें गांव छोड़कर जाना होगा. गांव वालों ने धमकी दी है कि वे हमारे घरों में बिजली का कनेक्शन भी कटवा देंगे."

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Image caption राशन डीलर विनय

क्या है मामला

जब इस विषय में राशन बांटने वाले विनय नाम के शख़्स से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि उन्हें ईसाई बन चुके लोगों को राशन नहीं देने का लिखित आदेश मिला हुआ है.

यह आदेश किसने दिया इस सवाल पर विनय ने बीबीसी से कहा, "देखिए, राशन वितरण के समूह में शामिल सभी 20 लोग और पूरे गांव वालों ने यह निर्णय लिया है कि ईसाई बन चुके इन परिवारों को राशन नहीं दिया जाए. इस कारण हमने इन्हें सितंबर का राशन नहीं दिया और अगर आदेश नहीं मिला तो अक्टूबर में भी नहीं देंगे. लेकिन, हम लोग इससे पहले हर महीने इन लोगों को राशन दिया करते थे."

दरअसल, इस विवाद की शुरुआत दुर्गा पूजा के आयोजन के दौरान शुरू हुई. गांव वालों की पूजा समिति ने ईसाई बन चुके सभी परिवारों को 551 रुपये का चंदा देने का फ़रमान जारी किया. जबकि ये लोग सिर्फ़ 151 रुपये या इससे कम राशि देना चाहते थे.

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Image caption नंदकिशोर अपने बेटे के साथ

अब क्या होगा

गांव के नंदकिशोर प्रसाद ने बताया कि इस कारण हिंदुओं और ईसाइयों के बीच तनातनी हुई. ईसाइयों ने मूर्ति विसर्जन के रास्ते पर धान की फ़सल लगा दी थी.

इस कारण भी तनाव हुआ. हिंदुओं ने जहां रास्ते को बाधित करने की बात कही है. वहीं, ईसाइयों ने इनपर धान की खड़ी फ़सल को रौंद देने का आरोप लगाया है.

लातेहार ज़िले की आपूर्ति पदाधिकारी शैलप्रभा कुजूर ने कहा है कि यह मामला संगीन है, लेकिन हम अपनी टीम से इसकी जांच कराएंगे. पीड़ित परिवारों को हर हाल में राशन उपलब्ध कराना हमारी ज़िम्मेवारी है.

इस बीच पूरे मामले की शिकायत उपायुक्त से भी की गई है.

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