विवेचना: शायद ओसामा से भी ज़्यादा ख़तरनाक था कार्लोस 'द जैकाल'

  • 14 अक्तूबर 2017
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Image caption फ्रांस में उम्रक़ैद की सज़ा काट रहा है कार्लोस

30 दिसंबर, 1973 को लंदन में इतनी कड़ाके की ठंड थी कि वहाँ के पॉश इलाके सेंट जॉन्स वुड में घूम रहे एक लंबे चौड़े शख़्स ने अपनी फ़र वाली जैकेट के ऊपर अपने चेहरे के निचले हिस्से को एक ऊनी मफ़लर से ढंक रखा था.

उसके जैकेट की जेब में इटली में बनी 9 एमएम बेरेटा पिस्टल रखी हुई थी. उस शख़्स ने धीरे से 48 नंबर के घर का लोहे का गेट खोला. ये घर था मशहूर रिटेल कंपनी 'मार्क्स एंड स्पेंसर' के अध्यक्ष और ब्रिटिश ज़ायोनिस्ट फ़ेडेरेशन के उपाध्यक्ष जोज़ेफ़ एडवर्ड सीफ़ का.

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कार्लोस –द जैकाल ने 1975 में ओपेक तेल मंत्रियों का अपहरण कर सनसनी फैलाई थी.

घंटी बजते ही सीफ़ के पुर्तगाली बटलर मैनुएल परलोएरा ने दरवाज़ा खोला. लंबे चौड़े शख़्स ने बिना एक सेकंड ज़ाया किए बटलर के माथे पर पिस्टल तान दी और कहा, ' टेक मी टू सीफ़.' बटलर उस शख़्स के साथ सीढ़ियाँ चढ़ रहा था कि सीफ़ की अमरीकी पत्नी लुइस ने ऊपर से ये दृश्य देखा. वो फ़ौरन अपने बेड रूम की तरफ़ दौड़ी, दरवाज़ा बंद किया और पुलिस को फ़ोन मिलाया. समय था सात बज कर दो मिनट.

पिस्टल जैम हुई

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Image caption जोज़ेफ़ एडवर्ड सीफ़

तब तक बटलर उस शख़्स को सीफ़ के कमरे तक पहुंचा चुका था. उसने एक मीटर की दूरी से सीफ़ के चेहरे का निशाना लेते हुए फ़ायर किया. सीफ़ नीचे गिरते ही बेहोश हो गए. उसने सीफ़ पर दोबारा निशाना लगाया, लेकिन तभी उसकी पिस्टल जैम हो गई.

दो मिनट बाद ही पुलिस की गाड़ी सीफ़ के घर के सामने रुकी. उस शख़्स को बिना ये जाने वहाँ से भागने के लिए मजबूर होना पड़ा कि उसका मिशन पूरा हुआ है या नहीं. बाद में पता चला कि वो गोली सीफ़ के ऊपरी होंठ पर छेद बनाती हुई उनके दांत से टकराई थी.

जब थोड़ी देर बाद सीफ़ का ऑपरेशन हुआ तो डॉक्टरों ने उस गोली के साथ साथ उन हड्डियों के टुकड़े भी निकाले जो सीफ़ के जबड़े में धंस गए थे. इतनी पास से गोली खाने के बावजूद सीफ़ ये कहानी सुनाने के लिए ज़िंदा रहे.

दो उम्र क़ैद की सज़ा पाने वाले कार्लोस द जैकल

ओपेक तेल मंत्रियों का अपहरण

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Image caption कार्लोस 'द जैकाल' का असली नाम इलिच रमिरेज़ सांचेज़ था.

हत्या की कोशिश करने वाले इस शख़्स के करियर की ये बहुत निराशाजनक शुरुआत थी. इस शख़्स का नाम था इलिच रमिरेज़ सांचेज़ जो बाद में 'कार्लोस द जैकाल' के नाम से कुख्यात हुआ.

इसके बाद सत्तर के दशक में जितनी भी बड़ी चरमपंथी घटनाएं हुईं, चाहे वो म्यूनिख में इसरायली खिलाड़ियों की हत्या हो या पेरिस के दक्षिणपंथी समाचारपत्रों और रेडियो स्टेशन पर हमला हो या हेग में फ़्रेंच दूतावास पर कब्ज़ा हो, हर घटना के पीछे कार्लोस का हाथ बताया गया.

लेकिन जब कार्लोस ने वियना में तेल का उत्पादन करने वाले देशों के मंत्रियों का अपहरण किया तो उसका नाम दुनिया भर के लोगों की ज़ुबान पर आ गया.

'कार्लोस द जैकल' पर पेरिस में मुक़दमा

फटेहाल गैंग

21 दिसंबर, 1975 की सुबह कार्लोस नें अपनी दाढ़ी, मूंछ और कलम को थोड़ा छोटा किया. उसने फिर खाकी रंग की पतलून पहनी. उस पर स्लेटी रंग का पुलओवर पहना और फिर उसके ऊपर कत्थई रंग की पियेर कादां की चमड़े की जैकेट पहनी. कार्लोस की टीम में उनका जर्मन साथी हांस जोआखिम क्लाइन, महिला छापामार क्रोशेर टाइडमान और तीन अरब गोरिल्ला थे.

उन्होंने अपने एडिडास के बैग में हथियार, फ़्यूज़, डेटोनेटर्स और हैंड ग्रेनेड्स भरे. कार्लोस की जीवनी 'जैकाल- द कंप्लीट स्टोरी ऑफ़ द लीजेंडरी टेरेरिस्ट' में लेखक जॉन फ़ोलेन लिखते हैं, 'धीरे धीरे चलते हुए वो उस सात मंज़िला इमारत के सामने पहुंचे जिसमें ओपेक का मुख्यालय था. इसी इमारत में कनाडा का दूतावास और टेक्सको कंपनी का ब्रांच ऑफ़िस भी था. सुबह से ही उस इमारत में मंत्री और उनका स्टाफ़ आ जा रहे थे. इसलिए वहां मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने उनकी तलाशी लेने की ज़रूरत नहीं समझी.'

रॉयटर्स की तरफ़ से उस बैठक को कवर करने वाले सिडनी वीलैंड ने जॉन फ़ोलेन को बताया, ''कार्लोस का गैंग थोड़ा फटेहाल सा दिखाई दे रहा था जैसे वो किसी ग़ैर महत्वपूर्ण देश के जूनियर अफ़सर हों. मुझे याद है एसोसिएटेट प्रेस की बार्थेल्मी हीली ने उन्हें देखकर फ़िकरा कसा था, 'ये तो अंगोला का प्रतिनिधिमंडल लगता है.' ये लोग सीधे ऊपर की मंज़िल पर चढ़ गए. वहां उन्होंने अपने बैग खोलकर अपने हथियार निकाले और दौड़ते हुए उस सभागार में घुस गए जहां सारे मंत्री बैठे हुए थे.''

शेख़ यमनी की पहचान

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Image caption सऊदी अरब के तत्कालीन तेल मंत्री शेख़ अहमद ज़की यमनी

कार्लोस ने सभागार में घुसते ही उसकी छत पर गोलियां चलाई. एक नक़ाबपोश ने सभी मंत्रियों को कार्पेट पर लेट जाने के लिए कहा. बाद में सऊदी अरब के तेल मंत्री शेख़ यमनी ने एक इंटरव्यू में कहा, 'मैंने समझा कि ओपेक की ओर से तेल की कीमत बढ़ाए जाने का विरोध करने के लिए कुछ यूरोपीय लोगों ने हमला कर दिया है.'

घबराए हुए सऊदी अरब के तत्कालीन तेल मंत्री 45 वर्षीय यमनी ने कुरान की आयतें पढ़नी शुरू कर दीं.

यमनी बताते हैं, ''कार्लोस विदेशी लहजे में अरबी में चिल्लाया, यूसुफ़ अपने विस्फोटक ज़मीन पर रखो. क्या तुम्हें यमनी मिला? मैंने चिल्लाकर कहा कि मैं यहाँ हूँ. बंदूकधारी ने हम सब के चेहरे देखे और जैसे ही उससे मेरी आँखें मिलीं, उसने अपने साथियों से कहा कि यही यमनी है. फिर कार्लोस वेनेज़ुएला के मंत्री के साथ बहुत सम्मान से बातें करने लगा.''

ओसामा बिन लादेन के वो आख़िरी घंटे

'ओसामा बिन लादेन को मैंने तीन गोलियां मारीं'

कार्लोस के साथी क्लाइन को गोली लगी

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Image caption कार्लोस के साथी हांस जोआखिम क्लाइन

इस बीच ऑस्ट्रियाई सुरक्षा बल का एक दल यूज़ी सब मशीनगन लिए और बुलेटप्रूफ़ जैकेट पहने इमारत के अंदर घुसा. जैसे ही वो ऊपर आए कार्लोस और उसके दल ने उनका स्वागत गोलियों की बारिश के साथ किया.

इस बीच कमांडोज़ की एक गोली दीवार से टकराकर क्लाइन के पेट में लगी. क्लाइन कॉरीडोर में एक रसोई घर में घुस गए. वहाँ उन्होंने तमाम गोलीबारी के बीच सिगरेट सुलगाई. उन्होंने अपना स्वेटर उतारकर अपनी चोट देखी. उन्हें ये देख कर बहुत ताज्जुब हुआ कि उनके पेट में एक छेद तो था लेकिन उसमें से कोई ख़ून नहीं निकल रहा था.

बाद में हांस जोआखिम क्लाइन ने 'लिबरेशन' पत्रिका में छपे इंटरव्यू में बताया, ''जब मैं सम्मेलन कक्ष में कार्लोस को अपनी चोट दिखाने के लिए गया तो उसने मेरे सिर को थपथपाया और कहा कि मैं बैठकर बंधकों की निगरानी करूँ. इतने में क्रोशेर टाइडमान भी ये कहते हुए अंदर घुसीं कि उन्होंने दो लोगों को मार दिया है. कार्लोस ने मुस्कराकर कहा, 'गुड, मैंने भी एक शख़्स को मारा है'.''

पर्दे लगी बड़ी बस की मांग

कार्लोस ने तब एक अजीब से अरबी लहजे में घोषणा की, 'हम फ़लस्तीनी कमांडो हैं और हमारा निशाना सऊदी अरब और ईरान हैं.' उसने वहाँ मौजूद एक ब्रिटिश सेक्रेट्री ग्रिसेल्डा कैरी के ज़रिए ऑस्ट्रियन सरकार को एक हस्त लिखित संदेश भिजवाया जिसमें कहा गया था कि ऑस्ट्रियन रेडियो और टेलिविजन पर अगले चौबीस घंटे तक हर दो घंटे पर उसका संदेश पढ़ कर सुनाया जाए.

उनकी मांग थी, 'हमें एक बड़ी बस उपलब्ध कराई जाए जिसकी खिड़कियों पर पर्दे लगे हों और जो हमें अगले दिन सुबह सात बजे वियना हवाई अड्डे ले जाए. हवाई अड्डे पर हमारे लिए एक डीसी 9 विमान तैयार रखा जाए जो हमें और हमारे बंधकों को जहां हम जाना चाहें, वहाँ ले जाएं.'

कार्लोस ने ये भी मांग की कि उसके घायल साथी क्लाइन को तुरंत इलाज के लिए अस्पताल ले जाया जाए. ऑस्ट्रियाई सरकार इसके लिए राज़ी हो गई. जब क्लाइन को स्ट्रेचर पर लादकर बाहर लाया गया तो उसने दाएं हाथ से अपनी चोट और बाएं से अपना चेहरा छुपाया हुआ था.

एंबुलेस पर चढ़ाते-चढ़ाते क्लाइन अपने होश खो चुके थे. जब उनका ऑपरेशन हुआ तो पता चला कि गोली उनके शरीर में घुस कर दो हिस्सों में विभाजित हो गई थी और उनके मलाशय और पाचक ग्रंथि को भेद चुकी थी.

क्लाइन को साथ ले जाने का फ़ैसला

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Image caption कार्लोस के गैंग में एक महिल भी शामिल भी थी. इस तस्वीर में वह महिला बंदूक लिए हुए ऑस्ट्रियाई विमान में चढ़ती नज़र आ रही है

जॉन फ़ोलैन अपनी किताब में आगे लिखते है, 'कार्लोस ने फिर संदेशा भिजवाया कि उसे विमानकर्मियों के साथ एक विमान उपलब्ध कराया जाए. घायल क्लाइन को वापस उसके पास लाया जाए. उसे एक रेडियो, 25 मीटर लंबी रस्सी और पांच कैंचियां उपलब्ध कराई जाएं.'

'उधर ऑलजेमींस क्रैंकेनहोस अस्पताल में क्लाइन का इलाज कर रहे डॉक्टरों का मानना था कि क्लाइन को ठीक होने में कम से कम एक महीना लगेगा. उन्होंने ये भी बताया कि उसे लाइफ़ सपोर्ट मशीन पर जिंदा रखा जा रहा है.'

'कार्लोस ने अपने साथियों से सलाह करने के बाद कहा कि चाहे क्लाइन की उड़ान के दौरान मौत हो जाए, वो उसे अपने साथ ले जाना चाहेंगे. हम साथ आए थे और साथ ही यहाँ से विदा होंगे.'

यमनी को मारने की मंशा बताई

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Image caption नई दिल्ली में तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के साथ शेख़ अहमद ज़की यमनी

इस बीच कार्लोस ने सऊदी अरब के तेल मंत्री यमनी को इशारा किया कि वो सम्मेलन कक्ष से निकलकर दूसरे कमरे में चलें.

यमनी याद करते हैं, ''उस कमरे में हम दोनों अकेले थे. कार्लोस ने मुझसे साफ़ कहा कि आख़िर में मुझे मार डाला जाएगा. मैं आपको बताना चाहता हूँ कि ये आपके ख़िलाफ़ नहीं है बल्कि आपके देश के ख़िलाफ़ है. आप अच्छे आदमी है. मैंने कहा कि आप मुझे पसंद करते हैं, तब भी आप मुझे मारना चाहते हैं. आप शायद मुझसे कुछ करवाना चाहते हैं. कार्लोस ने कहा, मैं आप पर क्यों दबाव डालूँगा. मैं तो ऑस्ट्रियाई सरकार पर दबाव डाल रहा हूँ, ताकि हम यहाँ से निकल सकें. जहाँ तक आपकी बात है, आपको तो मैं वास्तविक्ता बता रहा हूँ.''

यमनी की वसीयत

यमनी आगे बताते हैं, ''मैंने अपनी वसीयत लिखनी शुरू कर दी. कार्लोस ने कहा कि साढ़े चार बजे हम आपको मार देंगें. मैं और तेज़ तेज़ लिखने लगा. चार बज कर बीस मिनट पर वो फिर कमरे में दाख़िल हुआ. मैंने अपनी घड़ी की ओर देखकर कहा, अब भी मेरे पास दस मिनट हैं. ये सुनकर वो हंसने लगा और बोला आपको इससे ज़्यादा जीवित रहना है.''

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Image caption ओपेक की इमारत से झांकता एक बंधक

सुअर के मांस के सैंडविचेज़ वापस भिजवाए

फ़ौलैन लिखते हैं, 'सुबह से न कार्लोस और उसके साथियों ने कुछ खाया था और न ही बंधक बनाए गए लोगों ने. कार्लोस ने अनुरोध किया कि अंदर 100 सैडविचेज़ और कुछ फल भिजवाए जाएं. ऑस्ट्रियाई सरकार ने तुरंत इसे मान लिया. लेकिन उन्होंने सुअर के मांस से बनी सैंडविचेज़ भिजवाईं. कार्लोस को जैसे ही इसका पता चला उसने सारी सैंडविचेज़ वापस भिजवा दीं, क्योंकि बंधकों में अधिकतर लोग मुस्लिम थे, जो सुअर नहीं खाते.'

'कार्लोस ने अनुरोध किया कि खाने के लिए चिकन और चिप्स भिजवाए जाएं. हिल्टन होटल ने इस समस्या का समाधान किया. वहाँ शाम को ओपेक मंत्रियों का भोज पहले से ही तय था. जब खाना अंदर लाया गया तो सम्मेलन कक्ष की सारी बत्तियाँ बुझी हुई थीं, क्योंकि सुबह ही कार्लोस ने बल्बों को गोली चला कर तोड़ दिया था. मोमबत्तियों की रोशनी में सारा खाना अंदर पहुंचाया गया.'

डॉक्टर की साथ जाने की पेशकश

इस प्रकरण पर एक किताब लिखने वाले डेविड यालप लिखते हैं, 'बंधकों की वो रात बहुत बुरी बीती. वो कुर्सियों पर ही बैठे रहे. उनमें से कुछ ने फ़र्श पर लेटकर अपनी कमर सीधी की. अगले दिन सुबह ठीक सात बजे एक पर्दे वाली बड़ी बस ओपेक मुख्यालय के पिछवाड़े आकर खड़ी हो गई. कार्लोस सभी बंधकों को उसमें बैठाकर हवाई अड्डे पहुंचा. इससे पहले घायल क्लाइन एक एंबुलेंस में हवाई अड्डे पहुंच चुके थे. एक डॉक्टर ने अपनी इच्छा से ही उनके साथ जहाज़ में जाने की पेशकश की, जिसे मान लिया गया.'

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Image caption कार्लोस 'द जैकाल'

कार्लोस, ख़ूबसूरत लड़कियों का शौकीन

22 दिसंबर को सुबह 9 बजे जैसे ही विमान उड़ा, कार्लोस का तनाव थोड़ा कम होना शुरू हुआ. लेकिन उसने अब भी अपनी गोद में भरी हुई पिस्टल रखी हुई थी.

शेख़ यमनी याद करते हैं, ''उड़ान के दौरान मेरी और कार्लोस की हर विषय पर बात हुई. सामाजिक, राजनीतिक और यहां तक कि सेक्स पर भी. मुझे लगता है कि उसे खूबसूरत लड़कियों के साथ रहना और शराब पीना पसंद था. मैं नहीं समझता कि विचारधारा से उसका कोई लेना देना था.''

''सफ़र के दौरान वो मुझसे मज़ाक भी कर रहा था, लेकिन मैं ये नहीं भूल पा रहा था कि कुछ देर पहले ही उसने मुझे मार डालने की धमकी दी. मैंने उसकी बेतकल्लुफ़ी का फ़ायदा उठाकर पूछ ही डाला कि आप हमारे साथ क्या करने जा रहे हैं? कार्लोस ने जवाब दिया पहले हम अल्जियर्स जाएंगे और वहाँ दो घंटे रुकने के बाद ट्रिपोली की तरफ़ बढ़ेंगे. मैंने पूछा कि क्या लीबिया में कोई समस्या सामने आ रही है? कार्लोस ने इसका खंडन करते हुए कहा कि वहाँ के प्रधानमंत्री हवाई अड्डे पर आकर हमारा स्वागत करेंगे और वहाँ से बग़दाद जाने के लिए एक बोइंग विमान हमें तैयार मिलेगा.''

बाद में वेनेज़ुएला के मंत्री हर्नान्डेज़ अकोस्टा ने भी याद किया, ''विमान में कार्लोस फ़िल्म स्टार की तरह ऑटोग्राफ़ दे रहा था.''

फ़्लाइट के दौरान क्रोशेर टाइडमान विमान के पिछले हिस्से में घायल क्लाइन के पास बैठी उसके माथे का पसीना पोछ रही थी. जब भी उसका होंठ सूखता, वो पानी से उसका होंठ गीला कर उसका ढांढस बंधाती.

अल्जीरिया के विदेश मंत्री ने स्वागत किया

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Image caption अल्जीरिया के तत्कालीन विदेश मंत्री अब्दुल अज़ीज़ बोतेफ़िल्का

ढाई घंटे की उड़ान के बाद कार्लोस का विमान अल्जियर्स के बाहर दर अल बैदा हवाई अड्डे पर उतरा. जैसे ही कार्लोस नीचे उतरा, अल्जीरिया के विदेश मंत्री अब्दुल अज़ीज़ बोतेफ़िल्का ने उसे मुस्कराते हुए गले लगा लिया. एक एंबुलेंस क्लाइन को अस्पताल ले गई. कार्लोस ने हवाई अड्डे पर तीस ग़ैर अरब मंत्रियों और उनके सहयोगियों को रिहा कर दिया. यमनी और ईरान के गृह मंत्री अमूज़ेगर सहित पंद्रह लोगों को विमान में ही बैठे रहने के लिए कहा गया.

शुरुआती गर्मजोशी के बाद अल्जीरियाई सरकार से कार्लोस की बात बन नहीं पाई. उसने एक विमान की मांग की जिसे अल्जीरिया ने स्वीकार नहीं किया.

आख़िरकार ऑस्ट्रिया से मिले विमान में ही तेल भरा गया और उसने ट्रिपोली के लिए उड़ान भरी. लेकिन वहाँ पर कार्लोस का वैसा स्वागत नहीं हुआ, जैसी उसे उम्मीद थी. इस बीच कार्लोस का एक साथी बीमार पड़ गया और विमान के ही एक कोने में उल्टी करने लगा.

ट्यूनीशिया ने विमान उतरने से रोका

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Image caption साल 2000 में पेरिस में अदालत में पेशी के लिए जाता कार्लोस

रात के एक बजे विमान ने ट्रिपोली से फिर उड़ान भरी. जब विमान ट्यूनिस के ऊपर से गुज़र रहा था तो वहाँ के एयर ट्रैफ़िक कंट्रोल ने उसे वहाँ उतरने की अनुमति नहीं दी. कार्लोस के पास अलजियर्स वापस जाने के अलावा कोई चारा नहीं रहा.

वहाँ कार्लोस ने मंत्रणा करने के बाद सभी बंधकों को रिहा करने का फ़ैसला किया. यमनी याद करते हैं, ''कार्लोस ने ऐलान किया कि मैं विमान से नीचे उतर रहा हूँ. पाँच मिनट बाद आप भी नीचे उतर जाइएगा.''

''कार्लोस जैसे ही उतरा उसकी टीम भी उसके साथ नीचे उतर गई. मुझे डर था कि कहीं उनके उतरते ही विमान में विस्फोट न हो जाए. पांच मिनट तक इंतज़ार करने के बाद मैंने भी नीचे उतरने का फ़ैसला किया. लेकिन मेरे एक सहयोगी ने मुझसे पहले विमान से उतरने की कोशिश की. उसे डर था कि कार्लोस के लोग सीढ़ियों के पास मुझे निशाना बनाने के लिए बैठे होंगे.''

कार्लोस को पांच करोड़ डॉलर की रैनसम मिली

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Image caption 2013 में पेशी पर आने के दौरान कार्लोस की यह तस्वीर ली गई.

बाद में क्लाइन ने एक इंटरव्यू में कहा, ''कार्लोस ने मुझे बताया था कि उसने सऊदी मंत्री शेख़ यमनी को इसलिए नहीं मारा, क्योंकि अल्जीरियाई सरकार ने उसे पैसा और सुरक्षा देने का वादा किया था.''

सालों बाद इस बात की पुष्टि हुई कि अल्जीरिया ने कार्लोस को इन लोगों की जान बख़्शने के लिए 5 करोड़ डॉलर दिए थे और ये पैसा उसकी तरफ़ से सऊदी अरब और ईरान ने दिया था.

ये भी कहा गया कि कार्लोस ने ये पैसा अपने आक़ाओं को न देकर अपने निजी इस्तेमाल के लिए रख लिया. लेकिन ये एक अलग कहानी है.

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