क्या इस दिवाली जलाएंगे ई-पटाखे ?

  • 17 अक्तूबर 2017
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दिल्ली-एनसीआर में इस बार दिवाली पर पटाखों की बिक्री नहीं होगी. सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में दिवाली पर होने वाले प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए ये फैसला सुनाया है.

कोर्ट ने कहा है कि कुछ शर्तों के साथ पटाखों की बिक्री एक नवंबर, 2017 यानी दिवाली बीत जाने के बाद फिर से की जा सकेगी.

लेकिन, आपकी दिवाली पटाखों के बिना फीक़ी न रह जाए बाज़ार ने इसका भी इंतज़ाम कर रखा है. बाज़ार में अचानक से चीनी ई-पटाखों की मांग काफ़ी बढ़ गई है.

ई-पटाखा यानी इलेक्ट्रॉनिक पटाखा. इन पटाखों को जलाने में आग का इस्तेमाल नहीं करना पड़ता है.

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क्या है ई-पटाखा?

ई-पटाखे से कोई प्रदूषण नहीं हता है और अमूमन ये बिजली से चलाए जाते हैं.

इन पटाखों से एक वायरलेस रिमोट कंट्रोल लगा होता है जिससे इन पटाखों को चलाया जाता है .

तेज़ आवाज़ के लिए ई-पटाखों में स्पीकर लगे होते हैं, जिससे बिजली के छोटे सर्किट डिवाइस तक बिजली पहुंचती है और धमाके की आवाज़ आती है.

ये पटाखे बारूद वाले पटाखों की तरह ही नज़र आते हैं, लेकिन इनमें विस्फोट नहीं होता. इन पटाखों को या तो सीधे प्लग में लगाकर या रिचार्जेबल बैट्री से चलाया जाता हैं.

इन पटाखों को चलाने के लिए किसी तरह की दूरी बनाने की भी ज़रूरत नहीं होती. ऐसे पटाखों की कई वेरायटी बाज़ार में उपलब्ध है.

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कैसे चलता हैं ई-पटाखा?

इन पटाखों को रिमोट के ज़रिए चलाया जाता है. रिमोट का बटन दबाने के बाद पटाखों से अलग-अलग तरह की आवाज़ आती है और रोशनी निकलती है.

बीबीसी से बात करते हुए दिल्ली इलेक्ट्रॉनिक्स ट्रेडर संघ के कोषाध्यक्ष अरविंद खुराना ने बताया कि लोगों में इन पटाखों की मांग बढ़ रही है. उनका कहना है कि पिछले साल के मुक़ाबले इस साल इनकी मांग पचास प्रतिशत तक बढ़ गई है.

वो कहते हैं कि इन पटाखों के इस्तेमाल में ख़तरा न के बराबर है, न ही इनसे आग लगने का डर रहता है और बच्चों के लिए भी ये पूरी तरह सुरक्षित है .

ये पटाखे बारूद वाले पटाखों से महंगे ज़रूर है. बज़ार में ई- पटाखे 400 से 2000 रुपये के बीच मिल रहें हैं.

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क्या था सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला?

9 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में दिवाली के मौके पर पटाखों की बिक्री पर रोक लगा दी.

इसके साथ ही इस प्रतिबंध को लागू करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस की तरफ़ से जारी किए गए सारे स्थाई और अस्थाई लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के आदेश दिए हैं.

अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वो इस प्रतिबंध के साथ ये देखना चाहता है कि क्या दिवाली से पहले पटाखों के बिक्री पर पाबंदी से प्रदूषण में कमी आती है या नहीं.

पटाखों की बिक्री पर बैन की याचिका तीन बच्चों की ओर से दायर की गई थी. याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इन बच्चों के फेफड़े दिल्ली में प्रदूषण के कारण ठीक से विकसित नहीं हो पाए हैं.

बाज़ार में पहले भी ई-पटाखे मौजूद थे, लेकिन उनकी तकनीक बहुत साधारण और पुरानी थी. इसके कारण इन पटाखों की इतनी मांग नहीं होती थी. लेकिन, दिवाली से पहले पटाखों की बिक्री पर बैन ने ई-पटाखों की बिक्री बढ़ा दी है.

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