कौन हैं भोपा जिन पर आमद ख़ान को मारने का आरोप है?

  • 18 अक्तूबर 2017
आमद ख़ान की क़ब्र
Image caption आमद ख़ान के शव को हफ़्ते भर बाद क़ब्र से निकालकर पोस्टमॉर्टम किया गया

'भोपा' रमेश चंद्र सुथार को ग़ुस्सा क्यों आया?

क्या इसलिए कि आमद ख़ान के गायन से देवी ने भोपा के शरीर में प्रवेश नहीं किया? ख़बरों में ऐसा ही कहा जा रहा है.

या जैसा गांववाले कह रहे हैं कि आमद मंदिर में गायन को अकेले पहुंचे थे और 'सुथार को लगा कि अकेला आदमी रात भर कैसे गा पाएगा और इस बात पर दोनों की बहस हो गई.'

रमेश के नाम में 'भोपा' शब्द जुड़े होने की वजह क्या है? आख़िर कौन हैं भोपा? क्या ये जाति है या पेशा? या किसी तरह की पद्वी?

मांगणयारों ने कहा, सड़कों पर सोना पड़े तो भी गांव नहीं जाएंगे

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भोपा की राजस्थानी परंपरा

नंद किशोर शर्मा इतिहासकार और जैसलमेर में मौजूद डेज़र्ट कल्चरल सेंटर म्यूज़ियम के संस्थापक हैं. शर्मा ने बताया, ''मरू प्रदेश में भोपों की एक समृद्ध परंपरा है और वो दो-तीन प्रकार के होते हैं. एक तो वो जो देवी-देवताओं की कथा गांव-गांव बांचते हैं. और, दूसरे जो अक्सर मंदिरों में होते हैं और जिनके बारे में समझा जाता है कि उनके भीतर मौजूद विशेष गुणों की वजह से देवी उनमें प्रवेश कर जाती है और उनके माध्यम से बोलती हैं.''

Image caption इतिहासकार नंद किशोर शर्मा कहते हैं आजकल ढोंगी भोपा भी आ गए हैं

नंद किशोर शर्मा कहते हैं कि देवी को जगाने के लिए जिन छंदों, रिचाओं और मंत्रों को गीत में प्रस्तुत किया जाता है वो मुस्लिम मंगणयार ही गाते हैं.

ये गीत रात में गाये जाते हैं, जिसे रति जोगा भी बुलाया जाता है और उस समय बड़ा ढोल भी बजाया जाता है.

27 सिंतबर को गांव की कुल देवी के लिए मंदिर में जागरण का आयोजन था जिसमें गाने के लिए भोपा रमेश सुथार को बुलाया गया था.

शुरुआती ख़बरों के मुताबिक़ भोपा रेमेश ने आमद ख़ान को ख़ास गायन के लिए कहा, जो मंगणयार गायक अच्छी तरह नहीं कर पाये और देवी ने भोपा के शरीर में प्रवेश नहीं किया. इसके बाद वो नाराज़ हो गए और आमद की पिटाई की गई.

आखिर अमद ख़ान का कसूर क्या था?

Image caption भोपा रमेश ने कथित तौर पर आमद ख़ान को देवी को प्रसन्न करनेवाला गीत गाने को कहा था

'रमेश अक्सर बाहर जाता था'

लेकिन गांववाले अब कह रहे हैं कि वो रमेश, भोपा थे ही नहीं बस भोपों की सेवा करता थे. जिससे लोग रमेश सुथार को भोपा-भोपा कहने लगे.

गांववाले हालांकि एक बात जो ज़ोर देकर कहते हैं वो है: रमेश और ख़ान में 'बस बहस हुई थी, मारपीट नहीं.'

लेकिन पुलिस और गांववाले दोनों इस बात से इत्तफ़ाक़ रखते हैं कि अभियुक्त रमेश सुथार ने 27 सिंतबर की उस रात 'पी रखी थी.'

नंदकिशोर शर्मा कहते हैं, आजकल बहुत से पाखंडी भोपे भी होते हैं जो ग़लत रूप से लोगों को लूटते हैं. आप इनको तांत्रिक भोपे भी कह सकते हैं जो किसी तरह धन उगाही की कोशिश करते हैं.

पेशे से बढ़ई, 27 साल के सुथार हत्या, सबूत मिटाने और भारतीय दंड संहिता की दूसरी धाराओं में फ़िलहाल न्यायिक हिरासत में जेल में हैं.

बड़ा भाई तारा राम जो दुबई में काम करते हैं और फिलहाल भारत में हैं. उनके ख़िलाफ़ भी एफ़आईआर दर्ज हुई है.

गांव वाले बताते हैं कि रमेश भी काम के लिए बाहर जाया करते थे.

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Image caption अभियुक्त रमेश सुथार गिरफ़्तार है जबकि उसके दो भाई भागे हुए हैं

गांव का ताना-बाना

रमेश के ग़ुस्से ने न सिर्फ़ कथित तौर पर एक लोकगायक की जान ली बल्कि उनके दो भाई भी गिरफ़्तारी के डर से घर से ग़ायब हैं.

साथ ही एक गांव का सदियों पुराना सामाजिक ताना-बाना लगभग बिखर चुका है. राजस्थान का गाने-बजाने वाला मंगणयार समुदाय यजमान के हर ख़ुशी-ग़म में बराबर का शरीक होता है और उनका संबंध पीढ़ी दर पीढ़ी का होता है.

आमद ख़ान भी रमेश सुथार परिवार का मंगणयार था.

भोपा रमेश सुथार की टिन की छत वाले तीन कमरों के मकान में ताला लगा है. घरवाले उसकी देखभाल शायद पड़ोसियों के भरोसे छोड़ गए हैं.

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