किन वजहों से बरी हो गए तलवार दंपति?

  • 18 अक्तूबर 2017
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नोएडा के जलवायु विहार के फ़्लैट नंबर एल-32 में 15-16 मई, 2008 की रात आरुषि और हेमराज की हत्या हो गई.

क़त्ल के इस मुक़दमे में पांच साल की सुनवाई के बाद नवंबर, 2013 में ट्रायल कोर्ट ने 14 वर्षीय आरुषि के माता-पिता तलवार दंपति को दोषी ठहराया था और उन्हें उम्रक़ैद की सज़ा सुनाई थी.

लेकिन इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सीबीआई कोर्ट के फ़ैसले को पलटते हुए डॉक्टर राजेश और डॉक्टर नूपुर तलवार को रिहा करने का फैसला सुना दिया. वे ग़ाजियाबाद के डासना जेल से सोमवार को रिहा हो गए.

इसके साथ ही ये सवाल फिर से सबके सामने आ गया कि आख़िर आरुषि और हेमराज को किसने मारा.

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इस मुक़दमे के फैसले से जुड़ी ख़ास बातों पर एक नज़र.

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आरुषि और हेमराज के बीच संबंध पर सवाल

हेमराज के पोस्टमॉर्टम करने वाले डॉक्टर नरेश राज ने अपने बयान में कहा था कि उसके लिंग में सूजन था और इसका मतलब ये हुआ कि मौत के ठीक पहले उसने सेक्स किया था या फिर सेक्स करने के दौरान उसकी हत्या की गई थी.

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पाया कि डॉक्टर नरेश राज ने ये गवाही अपने वैवाहिक अनुभव के आधार पर दी थी.

ठीक इसी तरह आरुषि का पोस्टमॉर्टम करने वाले डॉक्टर सुनील दोहरे ने आरुषि पर यौन हमले की बात कही थी. लेकिन ये बात उन्होंने अभियोजन पक्ष के सामने अपनी चौथी गवाही में कही. डॉक्टर सुनील ने अपनी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में भी इसका जिक्र नहीं किया था.

फ़ॉरेंसिक रिपोर्ट में भी ये सामने आई कि आरुषि के बिस्तर पर किसी और के ख़ून या डीएनए सैंपल नहीं मिले थे.

हाई कोर्ट ने आरुषि-हेमराज के शारीरिक संबंध बनाने वाली सीबीआई की दलील ठुकरा दी.

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हत्या का मक़सद

किसी मर्डर केस को सुलझाने का सबसे अच्छा तरीक़ा ये माना जाता है कि क़ातिल के मक़सद के बारे में मालूम चल जाए.

इस केस में ये बात अब तक अनसुलझी पहेली है कि आख़िर आरुषि और हेमराज को किसी ने क्यों मारा? अगर ये किसी बाहरी शख़्स का काम था तो फिर वो चाहता क्या था?

सीबीआई की दलील थी कि तलवार दंपति ने हेमराज और आरुषि को आपत्तिजनक स्थिति में देख लिया था और ये देखने के बाद वे खुद पर क़ाबू नहीं रख पाए.

लेकिन इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अपने फ़ैसले में कहा कि ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे ये माना जाए कि हेमराज का कत्ल आरुषि के कमरे में हुआ था या फिर दोनों के बीच कोई जिस्मानी संबंध बने हों.

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सीबीआई की क्लोज़र रिपोर्ट

29 दिसंबर, 2010 को सीबीआई ने अपनी क्लोज़र रिपोर्ट फ़ाइल की.

रिपोर्ट में ये कहा गया कि केवल तलवार दंपति के पास ही क़त्ल का मकसद था, लेकिन ट्रायल चलाने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं होने की वजह से ये मामला बंद कर दिया जाए.

लेकिन गाज़ियाबाद की स्पेशल कोर्ट ने इसे ख़ारिज करते हुए क्लोज़र रिपोर्ट को ही चार्जशीट में बदल दिया और तलवार दंपति को ट्रायल के लिए समन किया.

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने फैसले में कहा कि क्लोज़र रिपोर्ट फ़ाइल किए जाने की तारीख तक जांच में पांच मर्डर वीपन यानी क़त्ल के हथियारों का जिक्र हुआ.

पहले कहा गया कि नोएडा पुलिस ने पहले कहा कि हथौड़े से मारा गया फिर चाकू के इस्तेमाल की बात कही गई. इसके बाद सीबीआई ने पहले खुकरी, और फिर गोल्फ स्टिक और सर्जिकल छुरी से क़त्ल किए जाने की बात कही.

हाई कोर्ट ने कहा कि गोल्फ स्टिक और सर्जिकल छुरी से न तो डीएनए और न ही ख़ून के सैंपल मिले है, इसलिए हत्या में इनके इस्तेमाल की दलील ख़ारिज की जाती है.

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ट्रायल जज श्याम लाल के बारे में...

ट्रायल जज ने अपनी मर्जी से चीज़ें तय कर लीं. उन्होंने सबूतों और अपराध की परिस्थितियों को हल्के में लिया.

वे उस मैथ टीचर की तरह बर्ताव नहीं कर सकते जो अपनी ही बुनी गणित की कोई पहेली हल कर रहे हों.

उन्होंने किसी फ़िल्म निर्देशक की तरह ये सोच लिया कि डॉक्टर राजेश तलवार ने आरुषि और हेमराज को रंगे हाथों पकड़ लिया और इसी वजह से ये हत्या की गई.

ट्रायल जज असल मुद्दे को ही भूल गए. दोनों पक्षों ने ये माना था कि जलवायु विहार के उस फ़्लैट में दरअसल क्या हुआ था, ये किसी को नहीं मालूम.

उन्होंने क़ानून की बुनियादी बातों पर दिमाग नहीं लगाया. इसमें कोई शक नहीं कि इस मुक़दमे में तथ्यों और सबूतों के वाजिब आकलन के बजाय वे शायद ज़्यादा उत्साह और निजी भावनाओं में बह गए.

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संदेह का लाभ

आरुषि-हेमराज डबल मर्डर केस में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने तलवार दंपति को संदेह का लाभ देते हुए बरी किया है.

चूंकि ये मामला परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित था और ट्रायल कोर्ट ने अपना फैसला इन्हीं सबूतों के आधार पर दिया था.

जस्टिस नारायण ने अपने फैसले में कहा कि संदेह सबूत नहीं हो सकते. ये साबित हो सकता है और ये साबित हो जाएगा में बहुत फर्क होता है.

और अगर किसी मामले में एक हालात ये कहें कि अभियुक्त दोषी या फिर निर्दोष है तो हर हाल में अभियुक्त को संदेह का लाभ दिया जाना चाहिए.

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इस केस में सीबीआई, अभियुक्तों के ख़िलाफ़ ये मुक़दमा सभी संदेहों से ऊपर जाकर साबित नहीं कर पाई.

लेकिन उस सवाल का जवाब फिलहाल किसी के पास नहीं है कि 14 साल की आरुषि और तलवार परिवार के नौकर हेमराज का क़ातिल आख़िर कौन था?

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