राहुल के नेतृत्व में कांग्रेस की वापसी होगी: शीला दीक्षित

  • 20 अक्तूबर 2017
शीला दीक्षित
Image caption शीला दीक्षित

अटकलें लगायी जा रही हैं कि जल्द ही राहुल गाँधी कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष घोषित किये जा सकते हैं. लेकिन क्या उनमें वो लीडरशिप गुण हैं जो पार्टी को उसकी खोई प्रतिष्ठा वापस कर सके? पिछले तीन सालों में उनके नेतृत्व पर कई बार प्रश्न चिन्ह लगाए गए हैं, कुछ बार तो पार्टी के अंदर से सवाल उठे हैं.

दूसरी तरफ़ भारतीय जनता पार्टी के समर्थकों ने उन्हें सोशल मीडिया पर ''पप्पू'' कहकर उनकी छवि को खराब करने की पूरी कोशिश की है. लेकिन क्या इससे उनकी सेहत पर कोई फ़र्क़ पड़ा है?

सबसे अधिक समय तक दिल्ली की मुख्यमंत्री रह चुकीं शीला दीक्षित, जो राहुल गाँधी को बचपन से जानती हैं, स्वीकार करती हैं कि पप्पू जैसे शब्दों का कुछ अरसे तक फ़र्क़ तो पड़ा लेकिन ज़्यादा समय तक नहीं.

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Image caption राहुल गाँधी

राहुल को मौका तो दीजिए

शीला दीक्षित राहुल गाँधी को पार्टी का अध्यक्ष बनाने का समर्थन करती हैं. उनका दावा है कि 2019 के आम चुनाव में राहुल गाँधी के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी सत्ता में वापस लौट सकती है.

शीला दीक्षित, जो दिल्ली की तीन बार लगातार मुख्यमंत्री रह चुकी हैं, कहती हैं कि उपाध्यक्ष के रूप में राहुल गाँधी को काफ़ी अनुभव हुआ है और वो अब पार्टी की बागडोर सँभालने के लिए तैयार हैं.

दिल्ली की 80 वर्षीय पूर्व मुख्यमंत्री राहुल के पिता राजीव गाँधी की सरकार में मंत्री रह चुकी हैं और वो इंदिरा गाँधी के ज़माने से पार्टी से जुड़ी हैं. उनका शुमार अब पार्टी के बड़े और अनुभवी नेताओं में होता है.

शीला दीक्षित के विचार में राहुल गाँधी एक बड़े नेता बन कर उभर सकते हैं. "उनको मौक़ा तो दीजिये, उन्हें मौक़ा तो मिले. वो अभी पार्टी अध्यक्ष बने भी नहीं हैं."

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शीला ने बदल दी दिल्ली की शक्ल

शीला दीक्षित दिल्ली की निज़ामुद्दीन बस्ती में अपने बड़े से घर में एक सेमी-रिटायरमेंट की ज़िन्दगी बसर कर रही हैं. ढलती उम्र के बावजूद वो स्वस्थ हैं और "पार्ट्री के आला कमान" के आदेश पर कोई भी बड़ा काम करने को तैयार हैं.

इन दिनों वो अपना समय पढ़ने-लिखने और रिश्तेदारों से मिलने में बिता रही हैं लेकिन सियासत पर उनकी गहरी नज़र अब भी बनी है.

शीला दीक्षित के प्रशंसक मानते हैं कि 15 साल तक, यानी 1998 से 2013 तक, दिल्ली के मुख्यमंत्री पद पर बने रह कर उन्होंने दिल्ली की शक्ल बदल दी.

उनके अनुसार मेट्रो हो या फ्लाईओवर या फिर सड़कें, दिल्ली ने उनके कार्यकाल में खूब तरक़्क़ी की. उनके ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार के इल्ज़ाम भी लगे हैं लेकिन दिल्ली के लिए उनके योगदान को सभी स्वीकार करते हैं.

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Image caption अरविंद केजरीवाल

केजरीवाल के काम से मायूसी

अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी की सरकार को सत्ता पर ढाई हो चुके हैं, यानी सरकार का कार्यकाल आधा ख़त्म हो चुका है.

शीला दीक्षित केजरीवाल सरकार से काफ़ी मायूस हैं. "मैं एक नागरिक की तरह बोलूंगी कि दिल्ली बहुत नीचे चली गयी है. बहुत बड़ी मायूसी हुई है. अब केजरीवाल जी के ऊपर है कैसे इसे ठीक करें"

अरविंद केजरीवाल ने अक्सर दिल्ली के उपराज्यपाल और नौकरशाहों के ख़िलाफ़ शिकायत की है कि उनकी सरकार को सहयोग नहीं दे रहे हैं.

कुछ दिनों पहले ही उन्होंने एक ट्वीट करके कहा कहा कि दिल्ली सरकार के 90 प्रतिशत नौकरशाह अपना काम नहीं कर रहे हैं जिसके कारण विकास का काम ठप पड़ गया है.

क्या शीला दीक्षित के प्रशासन के 15 साल के लम्बे अरसे में भी उन्हें इस तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था?

शीला दीक्षित कहती हैं, "उपराज्यपाल के साथ मिलकर काम नहीं करेंगे तो प्रशासन कैसे चलेगा. कई चीज़ों के लिए उसके हस्ताक्षर की ज़रूरत पड़ती है, उसी से अगर आप लड़ लेंगे तो काम नहीं होगा."

उन्होंने दिल्ली में मेट्रो का उदाहरण देते हुए कहा कि जब अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री थे तो इस योजना की मंज़ूरी लेने वो उनके दफ़्तर पहुंचीं. उन्होंने प्रधानमंत्री को योजना के फ़ायदे गिनाए और इसके लिए फ़ौरन इजाज़त मिल गयी.

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Image caption निर्भया कांड हार के कारणों में से एकः शीला दीक्षित

आने वाले हैं कांग्रेस के अच्छे दिन

शीला दीक्षित 2013 में दिल्ली विधानसभा चुनाव में अपनी पार्टी की ज़बरदस्त हार के कई कारण बताती हैं जिनमें "अरविंद केजरीवाल के फ़र्ज़ी वादे, 15 साल के बाद लोगों में बदलाव की उमंग और केंद्र में कांग्रेस के नेतृत्व वाली कमज़ोर सरकार ख़ास थीं."

लेकिन निर्भया काण्ड भी उनकी हार का कारण बना जिसे वो स्वीकार करती हैं. "वो एक कारण था, लेकिन अकेला कारण नहीं."

दिल्ली में 16 दिसंबर 2012 को एक चलती गाड़ी में एक महिला का बलात्कार और बाद में उसकी मौत के काण्ड ने शहर में दहशत पैदा कर दी थी. शीला दीक्षित सरकार ने जिस तरह से इस केस को हैंडल किया उस पर उनकी काफ़ी आलोचना हुई. उसके अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में लोगों ने शीला दीक्षित और उनकी सरकार को ख़ारिज कर दिया.

अब उनके विचार में कांग्रेस के अच्छे दिन वापस होने वाले हैं. तो क्या कांग्रेस 2019 का आम चुनाव जीतने वाली है?

उनका कहना है की कांग्रेस का प्रदर्शन पिछले चुनाव से बेहतर होगा. उनके मुताबिक़ प्रधानमंत्री मोदी और उनकी सरकार ने नोटबंदी और जीएसटी जैसे मुद्दों को जिस तरह से आम लोगों पर थोपा है उससे लोग परेशान हैं.

शीला दीक्षित का मानना है कि राहुल गाँधी कांग्रेस पार्टी में नई जान फूंक रहे हैं और अगले चुनाव में इसका असर नज़र आएगा.

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