योगी आदित्यनाथ अपनी रणनीति में कामयाब हो रहे हैं?

  • 20 अक्तूबर 2017
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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर दीपावली के मौके पर भव्य शोभायात्रा निकाली गई. इसके बाद से अयोध्या फिर से सुर्खियों में है.

इससे पहले योगी सरकार की ओर सरयू तट पर 100 मीटर ऊंची राम की मूर्ति लगाए जाने की तैयारी की भी ख़बर मीडिया में आई है.

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पिछले कुछ महीने में अलग अलग मुद्दों को लेकर योगी सरकार विपक्ष की आलोचना के निशाने पर रही है, चाहे गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में नवजात शिशुओं की मौत का मामला हो या प्रदेश में क़ानून व्यवस्था का.

लेकिन ऐसा लगता है कि कुछ दिन पहले बैकफ़ुट पर दिख रही बीजेपी फिर से अपने मुद्दों पर आक्रामक हो रही है. तो क्या बीजेपी इन मुद्दों से विपक्ष की घेरेबंदी को तोड़ने में कामयाब हो गई है?

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उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार बने छह महीने से ज़्यादा हो चुका है, लेकिन विकास के मोर्चे पर उनकी कोई उपलब्धि नहीं दिखती.

नई सरकार की ओर से अभी तक कोई नई योजना नहीं आई है, ना ही किसी नए प्रोजेक्ट की घोषणा हुई है.

इस वजह से मुख्यमंत्री और सिद्धार्थ सिंह जैसे उनके मंत्री लगातार हिंदुत्व के एजेंडे को उभार रहे हैं. दशहरे पर योगी आदित्यनाथ ने 10 दिनों तक लखनऊ से लेकर अपने चुनावी क्षेत्र गोरखपुर में पूजा पाठ करते रहे.

अभी दीपावली के एक दिन पहले योगी ने अयोध्या में राम के वनवास से लौटने का भव्य उत्सव मनाया. ये विकास के मुद्दे से ध्यान हटाने की कोशिश का ही एक रूप है.

कहने के लिए ये अयोध्या को पर्यटन के मानचित्र पर लाने की कोशिश थी, लेकिन असल में वे लोगों को धर्म की राजनीति में लोगों को व्यस्त रखना चाहते हैं.

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Image caption गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की कमी से बच्चों की मौतें हुईं

'केंद्र भी चाहता है, हिंदुत्व का मुद्दा आगे रहे'

प्रदेश में शिक्षा और चिकित्सा के मुद्दे पर कहीं कोई काम नहीं हो रहा है. गोरखपुर में ऑक्सीजन की कमी से बच्चों की मौत की ख़बर राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचने के बाद भी वहां लगातार बच्चों की मौत होती रही है.

गोरखपुर से योगी सांसद रहे हैं, उनकी ये ज़िम्मेदारी बनती थी कि कम से कम अपने चुनाव क्षेत्र में तो व्यवस्था को दुरुस्त करते. लेकिन जब उनके ही क्षेत्र में इतनी अव्यवस्था है तो समझा जा सकता है कि बाकी प्रदेश की क्या हालत होगी.

हिंदुत्व के एजेंडे को धार लगाने का मामला सिर्फ योगी आदित्यनाथ से ही नहीं जुड़ा है, बल्कि केंद्र की मोदी सरकार भी ऐसा ही चाहती है. इसीलिए योगी को प्रदेश से बाहर गुजरात और केरल में भेजा जाता है.

मुद्दों से ध्यान भटकाने की अपनी योजना में वे कामयाब होते दिख भी रहे हैं. लोगों का ध्यान भी उसी तरफ जा रहा है जिस तरफ़ वो ले जाना चाहते हैं.

केरल में उन्हें स्थानीय स्तर पर भले उन्हें मनचाहा समर्थन हासिल नहीं हुआ, लेकिन उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर एक धारणा बनाने में तो कामयाबी हासिल कर ही ली कि वहां आरएसएस के कार्यकर्ता मारे जा रहे हैं.

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हिंदुत्व ने ही दिलाई जीत

जबकि हकीक़त ये है कि आरएसएस और सीपीएम के कार्यकर्ताओं में लगातार झड़प होती रहती है, दोनों तरफ़ के लोग हताहत होते हैं.

फ़िलहाल अभी तक जितने बड़े चुनाव हुए हैं उसमें भाजपा को जीत मिली है, ये इस बात का सबूत है कि उन्हें हिंदुत्व के एजेंडे पर कामयाबी हासिल हुई है.

हालांकि इधर छात्रसंघ चुनावों में बीजेपी के छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद को लगातार हार का सामना करना पड़ा है.

जेएनयू, दिल्ली यूनिर्सिटी, राजस्थान के कॉलेज, हैदराबाद यूनिवर्सिटी और इलाहाबाद विश्वविद्यालय में हार के पीछे की वजह है कि नौजवानों का मोहभंग हो रहा है.

साल 2014 में जब मोदी सत्ता में आए तो उन्होंने हर साल दो करोड़ नौकरियों के सृजन और शिक्षा के स्तर को बढ़ाने के वादे किए थे, वो पूरे नहीं होते दिख रहे हैं.

लेकिन ये मोहभंग जनता में कितना पहुंचा है, इस बात का अंदाज़ा हिमाचल प्रदेश और गुजरात के चुनाव के नतीजों से लगेगा.

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(बीबीसी संवाददाता संदीप राय से बातचीत पर आधारित.)

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