2015 में भारत में प्रदूषण से हुईं 25 लाख मौतें

  • 22 अक्तूबर 2017
प्रदूषण, वायु प्रदूषण, दिल्ली प्रदूषण इमेज कॉपीरइट Getty Images

भारत में प्रदूषण को लेकर पहले से ही चिंताएं ज़ाहिर की जाती रही हैं. एक नए अध्ययन के मुताबिक, भारत साल 2015 में प्रदूषण से हुई मौतों के मामले में 188 देशों की सूची में पांचवें स्थान पर रहा है.

ये मौतें वायु, जल और अन्य तरह के प्रदूषण के कारण हुई हैं.

प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल, द लांसेट में प्रकाशित इस अध्ययन के मुताबिक, दक्षिण पूर्व एशिया में साल 2015 में 32 लाख मौतें हुई हैं. दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के इस आंकड़े में भारत भी शामिल है.

दुनियाभर में हुई करीब 90 लाख मौतों में से 28 प्रतिशत मौतें अकेले भारत में हुई हैं. यानी यह आंकड़ा 25 लाख से ज़्यादा है.

प्रदूषण से होने वाली मौतें की लिस्ट में बांग्लादेश सबसे ऊपर है और उसके बाद सोमालिया का नंबर है. वहीं, चीन में ये प्रदूषण से होने वाली मौंतों का आंकड़ा 22 लाख रहा है जो इस सूची में 16वें स्थान पर है.

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निम्न आय वाले देशों में खराब स्थिति

निम्न और मध्यमवर्गीय आय वाले देशों में सबसे ज्यादा 92 प्रतिशत मौतें हुई हैं. सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में प्रत्येक चार में से एक से ज़्यादा मौत प्रदूषण के कारण हो रही है.

सबसे ज्यादा ख़तरा वायु प्रदूषण से बताया गया है. वायु प्रदूषण से होने वाली मौतों की संख्या सबसे ज्यादा है.

इससे करीब 65 लाख असमय मौतें हुई हैं जो कुल मौतों का दो-तिहाई हिस्सा है.

इसमें बाहर से होने वाला प्रदूषण जैसे गैसें और घर में होने वाला प्रदूषण जैसे लड़की के जलने या चारकोल से होने वाला धुंआ, शामिल हैं.

इनमें से ज्यादातर मौतें प्रदूषण से जुड़ी बीमारियों जैसे हृदय रोग, हृदयाघात और फेफड़ों के कैंसर से हुई हैं.

इसके बाद जल प्रदूषण सबसे बड़ा ख़तरा रहा है. इससे 18 लाख मौतें हुई हैं.

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विकसित देशों की​ स्थिति

विकसित देशों की बात करें तो ब्रिटेन में प्रदूषण के कारण 50 हजार मौतें हुई हैं. ब्रिटेन का 188 देशों की सूची में 55वां नंबर है.

अमेरिका इस सूची में 54वें स्थान पर है. इस सूची में प्रदूषण से होने वाली सबसे कम मौतों में ब्रूनेई और स्वीडन का नाम शामिल है.

इस अध्ययन के लेखक प्रोफेसर फिलिप लैंड्रिगन कहते हैं, ''प्रदूषण पर्यावरणीय चुनौती से कहीं ज्यादा है. यह एक गहन और व्यापक खतरा है जो मानव स्वास्थ्य और कल्याण के कई पहलुओं को प्रभावित करता है.''

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दिल्ली में प्रदूषण

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दिल्ली में प्रदूषण का मसला भी लगातार उठता रहा है.

दिवाली के बाद होने वाले प्रदूषण को देखते हुए इस बार सुप्रीम कोर्ट ने पटाखों की बिक्री पर रोक लगा दी थी. ये रोक 31 अक्टूबर तक जारी रहेगी.

पिछले साल दीपावली के बाद दिल्ली के कई इलाकों में प्रदूषण उच्च स्तर पर पहुंच गया था.

दिल्ली में प्रदूषण का एक बड़ा कारण हरियाणा और पंजाब में जलने वाला पुआल भी माना जाता है, जिस पर नियंत्रण के लिए इस बार कोशिशें की जा रही थीं.

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