हॉस्टल में लड़कों 'संग' रहने पर छात्राएं निष्कासित

सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टिट्यूट इमेज कॉपीरइट संजय दास
Image caption सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टिट्यूट

सत्यजित रे फ़िल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट (एसआरएफ़टीआई) में एक नया विवाद खड़ा हो गया है. संस्थान से 14 छात्राओं को निष्कासित कर दिया गया है.

इन लड़कियों का कसूर ये था कि उन्होंने लड़कों के हॉस्टल से निकल कर लड़कियों के लिए बने अलग हॉस्टल में जाने से इनकार कर दिया था.

संस्थान ने लड़कियों के लिए बने कमरों पर कब्ज़े के आरोप में 10 छात्रों के ख़िलाफ़ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई और उनको भी हॉस्टल से निकाल दिया है.

छात्राओं के लिए बनाया अलग हॉस्टल

तीन महीने तक चले विवाद के बाद संस्थान प्रबंधन ने सोमवार को 14 छात्राओं को निकालने का फैसला किया.

इसके विरोध में मंगलवार को छात्रों ने प्रशासनिक भवन में ताला लगा दिया और निदेशक देवप्रिया मित्र समेत किसी भी कर्मचारी को दफ्तर में प्रवेश नहीं करने दिया. फिलहाल परिसर में पुलिस तैनात कर दी गई.

यौन उत्पीड़न मामले में तीन शिक्षक निलंबित

इमेज कॉपीरइट संजय दास

एसआरएफ़टीआई निदेशक देवप्रिया मित्र बताती हैं कि संस्थान के गवर्निंग काउंसिल ने छात्र और छात्राओं को अलग-अलग हॉस्टल में शिफ्ट करने का फैसला किया था. पहले अलग हॉस्टल नहीं होने की वजह से लड़के और लड़कियां एक ही भवन के अलग-अलग हिस्सों में रहते थे.

लेकिन लड़कियों के लिए अलग हॉस्टल बनने के बावजूद 14 छात्राओं ने शिफ्ट होने से इंकार कर दिया. मित्र का कहना है कि बार-बार कहने, चेतावनी देने और अभिभावकों को सूचित करने के बावजूद गतिरोध नहीं टूटा जिस वजह से मजबूरी में उनको निकालने का फैसला लेना पड़ा.

'संस्थान कर रहा है मोरल पोलिसिंग'

वहीं दूसरी ओर, छात्रों का आरोप है कि संस्थान अब 'मोरल पुलिसिंग' पर उतर आया है.

एसआरएफ़टीआई छात्र संघ की अध्यक्ष अक्षय गौरी कहती हैं, "संस्थान कई अहम मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए ऐसा कर रहा है, अब वह मोरल पुलिसिंग कर रहे हैं."

गौरी पूछती हैं कि जब इतने दिनों तक छात्र-छात्राओं को एक ही हॉस्टल में रहने के बावजूद कभी कोई समस्या नहीं हुई तो अब इन 14 छात्राओं के वहां रहने से कौन सी आफ़त आ जाएगी?

छात्र संघ ने निदेशक को अपनी मांगों के समर्थन में एक ज्ञापन भी सौंपा है. लेकिन प्रबंधन का कहना है कि जब तक छात्र और छात्राओं के अलग-अलग हॉस्टल में शिफ्ट नहीं हो जाते तब तक बातचीत संभव नहीं है.

इमेज कॉपीरइट संजय दास

संस्थान से निकाली गई एक छात्रा नाम नहीं बताने की शर्त पर आरोप लग रही हैं, "प्रबंधन छात्रों को बांटने का प्रयास कर रहा है अपनी कमियों को ढकने और हमारी दूसरी कई मांगों से बचने के लिए ही संस्थान ने बेवजह हमको बाहर निकालने का फैसला किया."

दूसरी तरफ निदेशक की दलील है कि अलग-अलग हॉस्टल में रखने का फैसला छात्रों की सुरक्षा को ध्यान में रख कर किया गया है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

मिलते-जुलते मुद्दे