नज़रिया: यूपी-बिहार की तरह गुजरात में जाति हुई अहम?

  • 23 अक्तूबर 2017
अल्पेश ठाकुर इमेज कॉपीरइट Getty Images
Image caption अल्पेश ठाकुर

ओबीसी समाज गुजरात में 50 फ़ीसदी से भी ऊपर है. 1985 में एक ऐसा समीकरण बना था जब यह समुदाय कांग्रेस के साथ था तो उसे 100 से अधिक सीटें मिली थीं.

भरत सिंह सोलंकी के पिता और पूर्व मुख्यमंत्री माधव सिंह सोलंकी ने 'खाम थ्योरी' बनाई थी जिसके बाद उन्हें यह सफलता हासिल हुई थी. उनकी थ्योरी थी कि क्षत्रिय, दलित, आदिवासी और मुस्लिम समुदाय को साथ लेकर चलेंगे तो गुजरात में सत्ता बनी रहेगी.

वही समीकरण आज 30 साल बाद बनते दिख रहे हैं.

बीजेपी की मुश्किलें बढ़ा सकती है ये तिकड़ी

इमेज कॉपीरइट Getty Images

कांग्रेस को कितना फ़ायदा

ओबीसी नेता अल्पेश ठाकोर कांग्रेस में शामिल हो गए हैं जिससे उसे 17-18 सीटों पर फ़ायदा मिलने वाला है. हालांकि, बीजेपी को कई जगहों पर नुकसान हो सकता है.

अल्पेश जिस समुदाय से आते हैं उसके 30 फ़ीसदी वोट कुल ओबीसी वोटों में हैं. अल्पेश ने अपने समुदाय को लेकर पहले आंदोलन शुरू किया था लेकिन उसके बाद उन्होंने ओबीसी के अलावा पूरे एससी, एसटी समुदाय को भी इसमें शामिल कर लिया.

कैसे शुरू हुआ उनका आंदोलन

सरकार के रवैये और शिक्षा के व्यावसायीकरण के ख़िलाफ़ युवाओं में रोष था. उत्तर गुजरात से अल्पेश ठाकोर ने इसके ख़िलाफ़ आंदोलन शुरू किया जो सौराष्ट्र और मध्य गुजरात तक पहुंचा.

इस आंदोलन के दौरान शराब के ख़िलाफ़ मुहिम भी देखने को मिली. गुजरात में शराबबंदी ज़रूर है लेकिन हर साल राज्य में 15 से 20 हज़ार लोग शराब पीने से मरते हैं.

अल्पेश के फ़ैसले से गुजरात चुनाव हुआ रोमांचक

इमेज कॉपीरइट Getty Images

जातिवादी राजनीति की शुरुआत?

उत्तर प्रदेश और बिहार की राजनीति में जाति का बोलबाला ज़रूर रहता है और ऐसा नहीं है कि गुजरात में जाति की राजनीति नहीं होती थी.

बीते दो चुनावों से जाति कभी भी केंद्र में नहीं रही है. उस समय केवल 'विकास' का ही बोलबाला था लेकिन पटेलों के आरक्षण आंदोलन की शुरुआत के बाद जाति का एंगल ज़रूर इसमें आया है.

अब तक नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी ने पटेलों के बड़े नेताओं को साइड लाइन कर दिया था. इनके आंदोलन के शुरू होने के बाद बाक़ी जातियों के भी आंदोलन शुरू हो गए.

आज गुजरात में 50 फ़ीसदी कुल वोट ओबीसी के हैं. 14-15 फ़ीसदी आदिवासी, 8 फ़ीसदी दलित, 12 फ़ीसदी पटेल, 8 फ़ीसदी मुसलमान और 4 फ़ीसदी अन्य वोट हैं.

पटेलों में भी दो प्रकार के विभाजन हैं. 12 फ़ीसदी वोट पटेलों का है और युवा नेता हार्दिक पटेल के साथ सभी पटेल नहीं हैं. अगर वह 6 फ़ीसदी वोट और अल्पेश ठाकुर 30 फ़ीसदी ओबीसी वोट कांग्रेस के समर्थन में लाने में सफल रहे तो कांग्रेस को जीतने से कोई नहीं रोक सकता है क्योंकि दलित और आदिवासी के आधे वोट कांग्रेस के पक्ष में जाते रहे हैं.

गुजरात में मोदी को टक्कर दे पाएंगे राहुल गांधी?

इमेज कॉपीरइट Getty Images

जाति का कार्ड बीजेपी का

हैरत की बात होगी लेकिन यह सच है कि बीजेपी जाति का कार्ड खेल रही है. वह जाति समीकरण ठीक कर रही है. नरेंद्र मोदी ज़रूर पिछड़े समुदाय से आते हों लेकिन राज्य में कांग्रेस अध्यक्ष भरत सिंह सोलंकी भी पिछड़े समुदाय से आते हैं.

सोशल मीडिया पर आम लोग भी काफ़ी सक्रिय हैं और वहां बीजेपी के ख़िलाफ़ माहौल बनता दिख रहा है. साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी गुजरात चुनाव में गंभीरता दिखानी पड़ रही है. वह राज्य का लगातार दौरा कर रहे हैं.

(बीबीसी संवाददाता मोहम्मद शाहिद से बातचीत पर आधारित.)

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए