अमरीका पर किस हद तक भरोसा किया जा सकता है?

  • 24 अक्तूबर 2017
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अमरीकी विदेश मंत्री रेक्स टिलरसन मंगलवार को भारत आ रहे हैं. उन्होंने भारत के साथ रिश्ते मज़बूत करने को लेकर अहम बातें भी कही हैं.

टिलरसन के भारत दौरे और अफ़ग़ानिस्तान-पाकिस्तान पर अमरीका की नीतियों को लेकर बीबीसी संवाददाता वात्सल्य राय ने अमरीका में भारत की राजदूत रह चुकी मीरा शंकर से बात की और जानना चाहा कि टिलरसन का दौरा भारत के लिए कितना अहम है?

मीरा शंकर की राय उन्हीं के शब्दों में -

अच्छी बात है कि टिलरसन भारत आ रहे हैं और आने से पहले उन्होंने महत्वपूर्ण स्पीच भी दी है जिसमें भारत के साथ रिश्तों को लेकर अपनी राय रखी है. इससे भारत को एशिया में महत्वपूर्ण स्थिति मिलती है. लेकिन ट्रंप सरकार की नीति अब तक स्थिर नहीं रही, तो सवाल उठता है कि किस हद तक भरोसा किया जा सकता है.

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चीन से रिश्ते

भारत और अमरीका के हित एशिया में काफ़ी हद तक मिलते-जुलते हैं, ख़ासतौर से चीन को लेकर. दोनों देश चाहते हैं कि चीन के साथ उनके रिश्ते ठीक रहें और एशियाई देश उसके दबाव में नहीं आएं. लेकिन भारत के पश्चिम में जो देश हैं और वहां की जो स्थिति है उस पर अमरीका ख़ुद को संकट में पाता है.

कई सालों से वहां पर लड़ाई चल रही है और अभी तक वहां नतीजा ऐसा नहीं निकला जो वो चाहते थे. ट्रंप सरकार ने जो अफ़ग़ानिस्तान नीति कुछ दिन पहले अपनाई थी उसका भारत ने स्वागत किया था. उसमें कहा गया था कि हमारी सैन्य मौजूदगी तब तक चलेगी जब तक यहां स्थिति ठीक नहीं होती. यह परिस्थितियों पर आधारित है कोई तारीख तय नहीं की गई थी कि अमरीका कब अफ़ग़ानिस्तान छोड़ेगा.

दूसरे यह कहा था कि आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई में तैनात सैनिकों की संख्या को बढ़ाया जाएगा और तीसरी बात जो कही थी वो ये कि पाकिस्तान पर दबाव डाला जाएगा और भारत को अफ़ग़ानिस्तान के विकास में अहम भूमिका दी जाएगी. भारत ने इसका स्वागत किया था.

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तालिबान पर दबाव

अमरीका बातचीत के साथ ही यह भी चाहता है कि सेना के ज़रिए तालिबान पर दबाव डाला जाए. लेकिन वो ये भी जानते हैं कि सुझाव बातचीत से ही निकलेगा. उसमें पाकिस्तान अभी भी अहमियत रखता है क्योंकि तालिबान पाकिस्तान में मौजूद है.

भारत अमरीका की नई अफ़ग़ान नीति का स्वागत कर चुका है और यह भी कहा है कि जब अमरीका वहां प्रतिबद्ध रहेगा तो भारत भी कुछ और करने के लिए तैयार है, ख़ासकर विकास के क्षेत्र में.

यह भी बात हो सकती है कि कौन क्या कर सकता है और कैसे मामला आगे बढ़ाया जाए.

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