गुजरात चुनाव में देरी पर चुनाव आयोग का जवाब

  • 24 अक्तूबर 2017
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Image caption मुख्य चुनाव आयुक्त एके जोती

हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव की तारीख़ों की घोषणा हो जाने और गुजरात में देरी होने को लेकर चुनाव आयोग पर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं.

सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी को छोड़ कई पार्टियां गुजरात विधानसभा चुनाव में देरी को लेकर सवाल उठा रही हैं. इसे लेकर कई लोगों ने चुनाव आयोग की आलोचना की है. इन आलोचनाओं के बीच चुनाव आयोग ने अपना पक्ष रखा है.

बीबीसी गुजराती के संपादक अंकुर जैन को दिए इंटरव्यू में मुख्य चुनाव आयुक्त एके जोती ने कहा, ''चुनाव आयोग एक स्वतंत्र संस्था है. गुजरात में बाढ़ आई है और इसमें 200 से ज़्यादा लोग मारे गए हैं. अगर हम चुनाव की तारीख़ घोषित कर देते तो राहत-बचाव कार्य प्रभावित होते. तारीख़ घोषित होते ही आचार संहिता लागू हो जाती है.''

जोती ने कहा कि 27 सितंबर को गुजरात के मुख्य सचिव ने चुनाव आयोग को चिट्ठी भेजी थी. सरकार बाढ़ के कारण राहत और बचाव कार्यों को लेकर चिंतित थी. उत्तरी गुजरात के 45 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं. हमने इसे लेकर बात की. इसके साथ ही गुजरात में दिवाली एक बड़ा त्योहार होता है. गुजराती दिवाली और गुजराती नव वर्ष वहां के लोगों के लिए बेहद ख़ास है. ऐसे में हमने सोचा कि इन त्योहारों के ख़त्म होने के बाद ही चुवाव की तारीखें घोषित की जाएं.''

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जोती ने कहा कि नियमों के मुताबिक़ चुनाव की तारीख़ें मतदान के 21 दिन पहले तक घोषित हो जानी चाहिए. उन्होंने कहा, ''2012 में चुनाव आयोग ने मतदान से 60 दिन पहले चुनाव की तारीख़ों का एलान कर दिया था. ऐसे में लंबे समय तक आचार संहिता लागू रही थी.''

क्या तारीख़ों की घोषणा में देरी से नरेंद्र मोदी को फ़ायदा नहीं होगा? इस सवाल के जवाब में मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि राहुल गांधी भी गुजरात में चुनावी दौरे कर रहे हैं. तारीखों की घोषणा के बाद भी हर कोई चुनाव प्रचार कर सकता है.

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इस सवाल के जवाब में मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा, ''क़रीब 26 हज़ार कर्मियों की तैनाती गुजरात विधानसभा चुनाव संपन्न कराने के लिए होगी. ऐसे में बाढ़ के लिए जारी राहत और बचाव कार्य प्रभावित होंगे. हम जल्द ही चुनाव की तारीखों की घोषणा करने वाले हैं. हिमाचल प्रदेश और गुजरात के विधानसभा चुनाव की तारीखों के घोषणा में कोई संबंध नहीं हैं. हम हमेशा एक ही दिन तारीखों की घोषणा नहीं करते हैं.''

जोती से पूछा गया कि मीडिया में रिपोर्ट छप रही है कि आपने गुजरात सरकार से पक्ष लेने की बात कही है. क्या यह सच है? इस सवाल के जवाब में मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि यह सच नहीं है.

उन्होंने कहा, ''सरकार ने मुझे वो आवास तब दिया था जब मैं वहां मुख्य सचिव था. जब मेरा ट्रांसफर हुआ तो रहने के लिए मेरे पास कोई ठिकाना नहीं था. ऐसे में मैंने उसी आवास में रहने देने के लिए अनुरोध किया था. इसमें कोई पक्ष लेने वाली बात नहीं है.''

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