#metoo: 11 साल की उम्र में मेरा यौन उत्पीड़न हुआ

  • 29 अक्तूबर 2017
शायमा ख़लील
Image caption शायमा ख़लील बीबीसी वर्ल्ड सर्विस में न्यूज़डे के लिए प्रेज़ेंटर हैं.

हार्वी वाइनस्टीन पर लगे यौन उत्पीड़न के आरोपों के बाद महिलाएं #metoo हैशटेग के जरिए अपने अनुभव साझा कर रही हैं. यहां शायमा ख़लील ने मिस्र में यौन उत्पीड़न के अपने अनुभव के बारे में लिखा.

वो एक खास दिन था, जिसके तुरंत बाद मैं 11 साल की होने वाली थी. मैं उस दिन को नहीं भूल सकती.

मैं अपनी दादा-दादी के घर पर थी और पहली बार मुझे किसी बड़े व्यक्ति के बिना अपनी बहन (कज़न) और उसके दोस्तों के साथ जाने की इज़ाजत मिली थी.

हम तीन लड़कियां अपने पहले साहसिक अनुभव के लिए बाहर निकली थीं.

मेरी दादी ने मुझसे कहा, ''सावधान रहना. ज्यादा दूर मत जाना और बेकार की चीजों पर पैसे खर्च मत करना.''

उनका मतलब था कि आइसक्रीम पर पैसे खर्च मत करना, लेकिन हम लोग तो यही खरीदने के बारे में सोच रहे थे.

Image caption शायमा ख़लील

जब शुरू हुआ पीछा

मैं बहुत उत्साहित थी और थोड़ा डर भी था. इस बार सबकुछ सही होना चाहिए तभी मुझे आगे भी अकेले जाने का मौका मिल सकता था.

एलेक्ज़ेंड्रिया की भीड़ भरी सड़कों पर हमें पता नहीं चला कि कोई हमारा पीछा कर रहा है.

लेकिन, हमारा पीछा कर रहे तीन लड़के हमसे टकराने लगे. उनमें से एक ने मुझे जबरदस्ती छुआ.

मैं ​बचने के लिए उस वक्त सिर्फ इतना कर सकती थी कि अपनी बहन और दोस्त के साथ उन लड़कों से जितना हो सके तेज चलने लगी.

लेकिन, वो अब भी हमारा पीछा कर रहे थे.

अब हम तीनों ने एक-दूसरे के हाथ पकड़े और जल्दी-जल्दी मेरे दादा-दादी के घर की तरफ वापस चले गए.

वो लड़के ठीक हमारे पीछे थे और कुछ न कुछ बोलकर हमें परेशान कर रहे थे.

पीड़ित से बन गई दोषी

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मैं डरी हुई थी पर मुझे गुस्स भी आ रहा था. उन लड़कों ने मेरा इतना बड़ा दिन खराब कर दिया था. मैं मुड़ी और ज़ोर से चिल्लाई: ''कैफाया! बहुत हुआ!''

''कैफाया!'' उनमें से एक मेरी नकल करते हुए चिल्लाया.

बाद में मेरी मां ने मुझे डांटा. उन्होंने गुस्सा करते हुए कहा, ''तुमने उनसे बात की? जो तुम्हें परेशान कर रहा है तुम्हें उससे बात करने की जरूरत नहीं है. तुम्हें बस चलते रहना है.''

मां ने कहा, ''वो लोग यही चाहते हैं- अगर तुम उनके साथ उलझोगी और बात बढ़ाओगी, तो वो जीत जाएंगे.''

मेरी दादी ने पूछा, ''क्या तुमने तेज़ आवाज़ में बोला था? क्या तुम हंस रही थीं और बिना बात के बेवकूफ की तरह व्यवहार कर रही थीं शायमा?''

मैंने याद करने की कोशिश की कि क्या मैं हंसी थी. शायद मैं हंसी थी. जब तक मेरा यौन शोषण नहीं हुआ था तब तक मुझे बहुत अच्छा लग रहा था.

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वह आगे कहती गईं, ''ये बिना ​बाजू की कमीज़ क्यों? ये बहुत छोटी है, नीचे सब दिख रहा है.''

मुझे पता ही नहीं चला कि कैसे उन तीन लड़कों की हरकतों की मेरी शिकायत मुझे ही दोषी ठहराने में बदल गई.

आगे भी होते रहे ऐसे मामले

यह पहली बार था जब मेरा यौन उत्पीड़न हुआ था, लेकिन ऐसा आखिरी बार नहीं था. बाद में हुई घटनाएं और बुरी थीं. लेकिन, उस दिन का मुझ पर बहुत गहरा असर पड़ा था.

सारी जिंदगी मैंने खुद काम करने की आज़ादी चाही थी और यहां मैं मिस्र की महिलाओं की अ​सलियत का सामना कर रही थी- ये सड़कों पर आने की आज़ादी के साथ उत्पीड़न भी आया है.

मेरी मां ने बनाए कुछ नियम:

1. ऐसा होता रहता है. ये सामान्य है.

2. हंसो नहीं. गुस्से में दिखो.

3. तेज़ी से चलो. देर मत करो.

4. लंबी कमीज़ पहनो जिससे पीछे का हिस्सा ढक सके.

5. अपने ऊपर किसी का ध्यान मत जाने दो.

आने वाले सालों में इन नियमों ने कभी-कभी तो काम किया, लेकिन अक्सर कोई फायदा नहीं हुआ.

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यौन उत्पीड़न मेरी और मेरी दोस्तों की जिंदगी का हिस्सा बन गया था. बोलकर परेशान करने से लेकर गलत तरह से छूने, जबरदस्ती छूने और हमारे कपड़े फाड़ने की कोशिश करने तक, बस हमारे अनुभव अलग-अलग थे.

अपराधियों में हर कोई शामिल था-गली में चलने वाला कोई शख्स, दुकानदार, गार्ड, शिक्षक, सहकर्मी और रिश्तेदार.

लेकिन, हमने बोलने के बारे में कभी सपने में भी नहीं सोचा. मिस्र की सभी महिलाओं के साथ हमें भी घर की पाबंदियों के खिलाफ गली के यौन उत्पीड़न के साथ संतुलन बनाना था.

क्या कहते हैं आंकड़े?

साल 2013 में संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के मुताबिक मिस्र की 99 प्रतिशत महिलाओं के साथ यौन उत्पीड़न किया गया था.

उस समय मेरी एक दोस्त ने हंसते हुए कहा था, ''हमें किसी रिपोर्ट की जरूरत नहीं. बस आकर हमारे साथ थोड़े समय के लिए रह लें.''

हाल ही में हुए एक पोल के मुताबिक काहिरा महिलाओं के लिए दुनिया का सबसे खतरनाक शहर है. लेकिन, मैं कह सकती हूं कि मेरा शहर भी इसी स्तर पर है.

हालांकि, बीतते समय के साथ स्थितियां कुछ बदली हैं. युवा लड़कियां अब ज्यादा बोल लेती हैं. यहां यौन उत्पीड़न के खिलाफ अभियान चल रहे हैं और कानून उसे अधिक गंभीरता से लेता है.

हालांकि, इस सबके बावजूद भी यौन उत्पीड़न करने वाले रुके नहीं हैं.

मैं अब मिस्र में नहीं रहती, लेकिन जब भी वहां जाती हूं तो मुझे तनाव होने लगता है. मुझे अब भी मेरी मां के बनाए नियम याद आते हैं. गलियों में अकेले चलते वक्त मेरे दिमाग में हमेशा सावधानी बनी रहती है.

मेरी एक आठ साल की भतीजी है जो मुझे मेरे बचपन की याद दिलाती है. जल्द ही वह भी अकेले निकलना चाहेगी.

और शायद मैं उसे ये बोलूंगी: ''हंसना मत, देर मत करना, अगर कुछ होता है तो किसी को बुलाना और वापस घर आ जाना.''

लेकिन, असल में मैं उसे ये बोलना चाहती हूं, ''तुम बहुत सुंदर हो. हंसो, मस्ती करो, मज़े करो- और अगर कोई तुम्हें परेशान करे तो चिल्लाओ, सबको बताओ और अपने आपको बचाओ! और हमेशा, हमेशा याद रखो: इसमें तुम्हारी कोई गलती नहीं है. ''

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