SPECIAL REPORT: शेख़ों ने उनको 'छुट्टियों वाली दुल्हन' समझा

  • 30 अक्तूबर 2017
सांकेतिक तस्वीर

हाल में खाड़ी देशों के पुरुषों द्वारा हैदराबाद के ग़रीब मुस्लिम परिवारों की लड़कियों के साथ शादी के कई मामले सामने आए हैं, जिसमें पैसों के बदले 'छुट्टियों वाली दुल्हन' का 'व्यापार' होता है.

बीबीसी ने इसी की पड़ताल की और इस व्यापार का शिकार होने वाली पीड़िताओं से मुलाक़ात की.

फ़रहीन पढ़ाई में रुचि लेती थीं और नर्स बनने का सपना देखती थीं. जब वह 13 साल की थीं तब 55 साल के जॉर्डन के एक शेख़ से उनकी शादी कर दी गई.

उनके पिता उन्हें एक कमरे में ले गए और तीन लोगों के सामने पेश किया. तब उन्हें बताया गया था कि इनमें से एक शख़्स के साथ उनकी शाम में शादी होगी.

फ़रहीन बताती हैं, "मैं चीख़ रही थी, गुज़ारिश कर रही थी कि मैं पढ़ना चाहती हूं लेकिन मेरी किसी ने नहीं सुनी."

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उनकी मां ने उन्हें दुल्हन बनाया और बताया कि वे लोग उन्हें इस शादी के बदले 25 हज़ार रुपये और उसके बाद हर महीने पांच हज़ार रुपये दिया करेंगे.

एक क़ाज़ी ने उनका निकाह पढ़ाया और वह शादीशुदा हो गईं.

फ़रहीन बताती हैं कि जब उन्होंने अकेले में उस पुरुष को देखा तो वह 40 साल से भी बड़ी उम्र का था.

वह बताती हैं, "उस रात जब मैं रोई तो वह मेरे ऊपर हावी हो गया. उसने तीन हफ़्तों तक मेरा बलात्कार किया."

इसके बाद उस पुरुष ने उन्हें अपनी बीवियों और बच्चों की देखभाल के लिए साथ जॉर्डन चलने के लिए कहा.

फ़रहीन कहती हैं कि उन्हें नहीं मालूम था कि वह शादीशुदा हैं.

एक समझौता हुआ कि वह शख़्स वापस जाएगा और फ़िर फ़रहीन के लिए बाद में वीज़ा भेजेगा, लेकिन इसके बाद वीज़ा कभी नहीं आया.

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पिछले 3 सालों में 48 मामले

फ़रहीन शादीशुदा हैं, लेकिन उन्हें मालूम नहीं है कि उनके पति कहां हैं.

वह कहती हैं, "इस पूरी घटना के बाद मैं साल भर तक शांत थी. मैं रोई नहीं. मैं इस अर्थहीन जीवन को समाप्त तक करना चाह रही थी. मुझे मेरे परिजनों ने भी धोखा दिया था."

इस घटना को आठ साल हो गए हैं, लेकिन फ़रहीन अभी भी सदमे में हैं और उन्होंने एक एनजीओ के दफ़्तर में हमसे मिलने की हामी भरी. वह उस एनजीओ में एक शिक्षिका के तौर पर काम करती हैं.

वह कहती हैं, "मेरे रिश्तेदार एक बूढ़े आदमी से शादी करने पर मेरा मज़ाक उड़ाते हैं और कुछ कहते हैं कि मुझे त्याग दिया गया है क्योंकि मैं अपने पति की इच्छाओं को संतुष्ट नहीं कर पाई."

फ़रहीन का मामला उन 48 मामलों में से एक है जो पिछले तीन सालों में तेलंगाना पुलिस ने दर्ज किए हैं.

उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी लेकिन इसमें शादी कराने वाला शख़्स ही गिरफ़्तार किया गया है.

80 साल के बुज़ुर्ग तक शामिल

हैदराबाद में दक्षिणी ज़ोन के डीसीपी वी. सत्यनारायण बताते हैं, "आमतौर पर पीड़ित हमारे पास नहीं आते हैं लेकिन वह तब आते हैं जब शेख़ देश से भाग चुके होते हैं. यह हमारे लिए बड़ी चुनौती है. इसके बाद हम विदेश मंत्रालय से संपर्क करते हैं. हालांकि इन शेख़ों को भारत वापस लाने की संभावनाएं कम होती हैं."

वरिष्ठ पुलिस अधिकारी बताते हैं कि यह बहुत जटिल आपराधिक नेटवर्क है जिसमें ऐसे बिचौलिए होते हैं जो फ़र्ज़ी शादी के प्रमाणपत्र बनाते हैं.

ये दस्तावेज़ हैदराबाद में एक छोटे से कमरे में हो रही किसी शादी को कानूनी मान्यता देते हैं.

सितंबर में आठ शेखों के एक समूह को तेलंगाना पुलिस ने गिरफ़्तार किया था. इनमें दो शेख़ 80 साल की उम्र और बाकी 35 साल के थे.

लेकिन इस मामले की रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई थी. सामाजिक कार्यकर्ता कहते हैं कि इन मामलों में लड़कियां 12 से 17 साल की उम्र के बीच की होती हैं.

तबस्सुम 12 साल की थीं जब उनकी 70 साल की उम्र के एक शख़्स से शादी हुई थी. उन्हें एक होटल में ले जाया गया था.

यौन दुर्व्यवहार के बाद उन्हें इस वादे के साथ घर वापस भेज दिया गया था कि उनके पति वीज़ा भेजेंगे.

बच्ची मां को मानती है बहन

तबस्सुम ने एक साल बाद बच्ची को जन्म दिया लेकिन उसका पालन-पोषण उनकी बहन के रूप में हुआ है.

वह कहती हैं, "मेरी बेटी मुझे बहन कहती है और हर बार मेरा दिल धड़कने लगता है. मेरे कान अम्मी सुनने के लिए बेताब रहते हैं."

अधिकतर शेख़ ओमान, क़तर, सऊदी अरब और यमन से आते हैं.

कई शादियों में तो लोग भारत भी नहीं आते हैं. 15 वर्षीय ज़ेहरा अनाथ हैं और अपनी दादी के साथ रहती हैं.

उनकी चाची ने उनको बेचने के उद्देश्य से तस्वीर सोशल मीडिया पर इस्तेमाल की थी.

ज़ेहरा बताती हैं, "उस रात एक क़ाज़ी आया और उसने घर पर फ़ोन के ज़रिए निकाह पढ़ाया. मुझे नहीं मालूम था कि मेरी किसके साथ शादी हो रही है."

इसके बाद वह वीज़ा पर यमन गईं और 65 साल के एक पुरुष ने ख़ुद को उनका पति बताया. इसके बाद वह उन्हें एक होटल में ले गया.

दिल दहलाने वाली कहानी

ज़ेहरा बताती हैं कि उसने ज़बरदस्ती की और इसके बाद उसने वापस उन्हें हैदराबाद भेज दिया.

फ़रहीन और ज़ेहरा जैसी लड़कियों का इस्तेमाल करके उन्हें छोड़ दिया जाता है.

शाहीन नामक एनजीओ चलाने वालीं जमीला निशत ऐसी महिलाओं की मदद करती हैं.

वह बताती हैं कि जिस मुस्लिम इलाके में वह काम करती हैं वहां एक तिहाई परिवारों ने पैसों के लिए अपनी बेटियों की शादी की है.

जमीला कहती हैं, "अधिकतर परिवार ग़रीबी में रहते हैं. स्कूल से मिलने वाले मिड-डे मील पर बच्चों का भरण-पोषण होता है."

लोग यह स्वीकार नहीं करते हैं कि वह पैसों के लिए यह कर रहे हैं बल्कि वह यह दिखाते हैं कि वह एक सामाजिक रस्म को पूरा कर रहे हैं.

यह एक दुखद स्थिति है लेकिन एक कहानी और भी दिल दहलाने वाली है.

एक पुरुष से दो दोस्तों की शादी

रूबिया और सुल्ताना बचपन की दोस्त थीं. उन दोनों की शादियां हुई थीं और बाद में दोनों को पता चला कि उनकी शादी एक ही पुरुष से हुई है.

रूबिया 13 साल की थीं जब उनकी शादी ओमान के एक 78 वर्षीय शेख़ से शादी हुई.

वह रोते हुए बताती हैं, "वह मुझे और मेरी दोस्त को छोड़ गए. हमें हफ़्तों तक उनके बारे में कुछ पता नहीं चला. आख़िरकार मेरी दोस्त ने आत्महत्या कर ली."

इस्लामिक विद्वान मुफ़्ती हाफ़िज़ अबरार ऐसी शादियों को 'वेश्यावृत्ति' कहते हैं.

वह कहते हैं, "जो काज़ी पैसे लेकर दूसरे देशों के मर्दों से लड़कियों की ऐसी शादी कराते हैं. वह मुस्लिम क़ौम और इस्लाम का नाम ख़राब कर रहे हैं."

तेलंगाना के बाल अधिकार सुरक्षा अधिकारी इम्तियाज़ अली ख़ान ऐसी शादियों को रोकने के लिए मस्जिदों से सहायता प्राप्त करना चाहते हैं.

इम्तियाज़ कहते हैं, "हमने मस्जिदों से कहना शुरू किया है कि वह ऐसी शादियों के ख़िलाफ़ नमाज़ के दौरान संदेश दें."

फ़रहीन, तबस्सुम, ज़ेहरा, रूबिया और सुल्ताना जैसी महिलाओं को आशा की एक किरण दिखाई जाती है.

Image caption इन लड़कियों की उम्मीद है क़ायम

इतनी मुश्किलात के बाद भी फ़रहीन यह ख़्वाब देखती हैं कि एक दिन समाज में महिलाओं की शिक्षा को लेकर जागरूकता आएगी और उन्हें सेक्स की वस्तु नहीं समझा जाएगा.

वह कहती हैं, "मेरे परिजन अब अपने किए के लिए माफ़ी मांगते हैं और यह जागरूकता बाकी लोगों में आए तो दूसरे परिजन अपनी बेटियों को पैसों के लिए शादी करने की जगह उन्हें पढ़ाएंगे."

*इस स्टोरी में सभी पीड़िताओं के नाम बदले गए हैं.

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