नज़रिया: गुजरात में आम आदमी पार्टी बीजेपी की बी टीम?

  • 1 नवंबर 2017
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ऐसा लग रहा है कि आम आदमी पार्टी ने गुजरात में मुक़ाबला शुरू होने से पहले ही हार मान ली है.

हाल ही में बड़ी संख्या में आम आदमी पार्टी के नेता और कार्यकर्ता कांग्रेस में शामिल हुए थे. राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इससे प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी को फ़ायदा होगा.

गुजरात के सियासी हलकों में कहा जा रहा है कि आम आदमी पार्टी बीजेपी की बी टीम हो गई है. हालांकि आम आदमी पार्टी प्रदेश में अपनी इस स्थिति से इनकार कर रही है.

आप का कहना है कि कांग्रेस उसके नेताओं को टिकट का लालच देकर तोड़ रही है. गुजरात में आप के कई नेता 200 कार्यकर्ताओं के साथ कांग्रेस में शामिल हुए थे.

इन नेताओं में प्रदेश महिला मोर्चा प्रमुख वंदना पटेल के अलावा अहमदाबाद, खेड़ा, मेहसाणा और राजकोट के पार्टी प्रभारी रितुराज मेहता, हसमुख पटेल, लालूभाई बड़िवाल, अंकुर धमेलिया और तुषार जानी शामिल हैं.

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Image caption कनुभाई कलसारिया बीजेपी छोड़ आम आदमी पार्टी में आए थे

गुजरात में आम आदमी पार्टी के डॉ कनु कलसारिया और पार्टी संयोजक सुखदेव पटेल जाने-पहचाने नाम रहे हैं. इन दोनों नेताओं ने अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी से ख़ुद को दूर कर लिया है. कलसारिया अलग मंच से चुनाव लड़ने जा रहे हैं जबकि सुखदेव पटेल ने अलग सिसासी समूह बना लिया है.

सुखदेव पटेल ने कहा, ''गुजरात में आम आदमी पार्टी के लिए के कांग्रेस और बीजेपी का विकल्प बनने का स्वर्णिम मौक़ा था, लेकिन पार्टी की बेरुखी के कारण यह मौक़ा हाथ से निकल चुका है. ऐसा दिल्ली में बैठे आप के सीनियर नेताओं की उपेक्षा के कारण हुआ है. दिल्ली में बैठे नेताओं ने कभी प्रदेश ईकाई को स्वतंत्र होकर काम नहीं करने दिया. इसी वजह से पार्टी लगातार पिछड़ती गई.''

आप के रितुराज मेहता 2014 के आम चुनाव में बीजेपी के वरिष्ठतम नेता लालकृष्ण आडवाणी के ख़िलाफ़ गांधीनगर लोकसभा से खड़े थे. वो ख़ुद के कांग्रेस में शामिल होने को सही ठहराते हैं. उनका कहना है कि आम आदमी पार्टी की शीर्ष नेतृत्व ने प्रदेश के नेताओं को अभरने का मौक़ा नहीं दिया.

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रितुराज मेहता कहते हैं कि वंदना पटेल ने कुच नालिया सेक्स स्कैंडल में बीजेपी नेताओं को बेनकाब करने के लिए कड़ी मेहनत की थी, लेकिन उन्हें भी पार्टी में तवज्जो नहीं मिली. मेहता कहते हैं कि आम आदमी पार्टी ने बीजेपी को अलग-थलग करने का मौक़ा गंवा दिया है.

इन नेताओं का कहना है कि गुजरात में आप प्रभारी गोपाल राय के कारण स्थिति और ख़राब हुई. इनका कहना है कि गोपाल राय ने स्थानीय नेताओं की नहीं सुनी. इन नेताओं का मानना है कि गुजरात के पूर्व पार्टी प्रभारी गुलाबसिंह यादव पार्टी कार्यकर्ताओं की निराशा, सलाह और शिकायत को सब्र के साथ सुनते थे.

आप छोड़ कांग्रेस में शामिल हुए इन नेताओं का कहना है कि यादव को इसलिए हटाया गया था, क्योंकि उनके ख़िलाफ़ स्थानीय नेताओं की नहीं सुनने की शिकायत की गई थी. लेकिन उनकी जगह पर जिसे भेजा गया वो तो उनसे भी ख़राब साबित हुए. यहां तक पिछली गर्मियों में आयोजित पार्टी सम्मेलन के बाद इन्हें कभी देखा नहीं गया.

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कई नेताओं को लगता है कि अरविंद केजरीवाल की ही गुजरात चुनाव में दिलचस्पी ख़त्म हो गई है.

आम आदमी पार्टी ने गुजरात विधानसभा चुनाव के लिए 11 उम्मीदवारों की घोषणा की है, लेकिन पर्यवेक्षकों का मानना है कि आलाकमान की उपेक्षा और हाल ही में अहम नेताओं के कांग्रेस में शामिल होने के बाद से पार्टी का चुनाव लड़ना बीजेपी के हक़ में जाएगा.

पर्यवेक्षकों का मानना है कि जो वोट आम आदमी पार्टी की पक्ष में जाएगा, उससे कांग्रेस को ही नुक़सान होगा.

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हालांकि आप के प्रवक्ता हर्षिल नायक का कहना है कि जो नेता पार्टी छोड़ कांग्रेस में शामिल हो रहे हैं, वो ऐसा टिकट के लालच में कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि कांग्रेस की प्रदेश ईकाई पर आलाकमान से दबाव बनाया गया है कि वो आप समर्थकों को पार्टी में शामिल कराए.

नायक ने कहा कि वंदना पटेल जैसी नेताओं के लिए आप छोड़ने की कोई वजह नहीं थी. उन्होंने कहा कि वंदना पटेल के हाथों में पार्टी की बड़ी ज़िम्मेदारी थी और उन्हें काफ़ी आदर भी मिला था. नायक ने कहा कि कुछ लोगों के आम आदमी पार्टी छोड़ जाने से पार्टी की सेहत पर कोई फ़र्क़ नहीं पड़ेगा.

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