भीम आर्मी के चंद्रशेखर की 'लाचार तस्वीर' की कहानी

  • 2 नवंबर 2017
चंद्रशेखर आजाद रावण इमेज कॉपीरइट Kamalkishore Jatav
Image caption भीम सेना के संस्थापक चंद्रशेखर सहारनपुर की जेल में बंद हैं.

व्हीलचेयर पर बैठे लाचार, बेबस और बीमार दिख रहे चंद्रशेखर आज़ाद की तस्वीर जब सामने आई तो उनकी सेहत और हालत को लेकर कई सवाल उठे.

भीम सेना के संस्थापक चंद्रशेखर सहारनपुर की जेल में बंद हैं. उन पर बलवा और दंगा कराने और पुलिस पर हमले का नेतृत्व करने के गंभीर आरोप हैं.

गुरुवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चंद्रशेखर को सभी चार मामलों में ज़मानत दे दी है.

चंद्रशेखर की ज़मानत की पुष्टि करते हुए भीम आर्मी के प्रवक्ता कल्याण सिंह ने बीबीसी से कहा, "हमें कल तक ज़मानत के काग़ज़ मिल जाएंगे. उम्मीद है कि चंद्रशेखर सोमवार को जेल से बाहर आ जाएंगे."

जेल प्रशासन ने बीते शनिवार को चंद्रशेखर को सहारनपुर ज़िला अस्पताल में भर्ती करवाया था. वायरल हुई ये तस्वीर उसी दिन की है.

सहारनपुर जेल के अधीक्षक डॉ. वीरेश राज शर्मा ने बीबीसी को बताया, "चंद्रशेखर के पेट में इंफ़ेक्शन है जिसके लिए उन्हें ज़िला अस्पताल ले जाया गया था. अभी उनकी हालत बेहतर है और वो जेल के ही अस्पताल में भर्ती हैं."

प्लेबैक आपके उपकरण पर नहीं हो पा रहा
भीम आर्मी जैसी सेनाएं खड़ी होने लगेंगी तो लोकतंत्र के लिए अलग चुनौती खड़ी हो सकती है.

शर्मा ने बताया, "चंद्रशेखर के स्वास्थ्य की देखरेख करना हमारी ज़िम्मेदारी है. उनकी देखरेख कर रहे डॉक्टरों का कहना है कि सेहत में सुधार हुआ है. "

वहीं चंद्रशेखर के भाई कमलकिशोर जाटव ने बीबीसी को बताया कि उनकी तबीयत क़रीब एक महीने से ख़राब है. कमलकिशोर के मुताबिक चंद्रशेखर को टायफ़ाइड भी हुआ था.

भीम आर्मी- बेज़ुबानों की आवाज़ या लोकतंत्र को चुनौती?

किससे लड़ रही है आज़ाद की भीम आर्मी

इमेज कॉपीरइट Kamalkishore Jatav

हालांकि जेल अधीक्षक का कहना है कि चिकित्सकीय जांच में पता चला है कि उन्हें अब टायफ़ाइड नहीं है.

कमलकिशोर ने मंगलवार को ही चंद्रशेखर से जेल में मुलाकात की थी. उन्होंने बताया, "वो काफ़ी कमज़ोर हो गए हैं और उनके पेट में गंभीर इंफ़ेक्शन है."

चंद्रशेखर से अस्पताल में मुलाक़ात करने वाले उनके एक दोस्त ने बीबीसी से कहा, "चंद्रशेखर जेल में मिलने वाला खाना ही खाते हैं और नियमित तौर पर जेल में मिलने वाले दूध का सेवन करते हैं. उन्हें इंफ़ेक्शन कैसे हुआ इसकी जांच होनी चाहिए."

जाति आधारित आरक्षण बंद हो: जस्टिस काटजू

'मुस्लिम हिंदू समझकर काटते हैं, हिंदू चमार समझकर'

इमेज कॉपीरइट Kamalkishore Jatav

चंद्रशेखर ने सहारनपुर में दलितों के संगठन भीम सेना की स्थापान की थी. बीते साल ये संगठन तेज़ी से उभरा था. बहुत कम समय में ही चंद्रशेखर दलित समाज में लोकप्रिय भी हो गए.

लेकिन इसी साल मई में सहारनपुर में जातीय हिंसा हुई थी. ठाकुर और दलित समाज के लोगों के बीच हुई झड़पों में कई घर भी चला दिए गए थे. पुलिस ने चंद्रशेखर पर इस हिंसा की साज़िश रचने और भीड़ का नेतृत्व करने के आरोप लगाए हैं.

चंद्रशेखर को जून में गिरफ़्तार किया गया था और वो तब से जेल में ही बंद हैं.

चंद्रशेखर के भाई कहते हैं, "आप जानते हैं इस समय यूपी में किसकी सरकार है और जो चंद्रशेखर के साथ हो रहा है उसके पीछे कौन है."

मीडिया को क्यों नहीं दिखता दलितों का संघर्ष?

इलाज में लापरवाही

इमेज कॉपीरइट Kamalkishore Jatav
Image caption हालत खराब होने के बाद चंद्रशेखर को ज़िला अस्पताल लाया गया था

भीम आर्मी के प्रवक्ता कल्याण सिंह सवाल उठाते हैं, "चंद्रशेखर के इलाज में लापरवाही की जा रही है जिससे ज़ाहिर होता है कि उनका इरादा ख़राब है. "

कल्याण सिंह कहते हैं, "हमें सिर्फ़ पेट के इंफ़ेक्शन के बारे में ही बताया गया है. टायफ़ाइड की क्या स्थिति है ये जानकारी नहीं दी गई है. यदि टायफ़ाइड पूरी तरह ठीक न हो तो ख़तरनाक भी हो सकता है."

वो कहते हैं, "चंद्रशेखर राजनीतिक बंदी हैं, इसी आधार पर उनके ख़िलाफ़ भेदभाव भी किया जा रहा है."

हालांकि जेल प्रशासन ऐसे सभी आरोपों को ख़ारिज करता है. जेल अधीक्षक वीरेश शर्मा कहते हैं कि सेहत में सुधार होने पर ही चंद्रशेखर को ज़िला अस्पताल से जेल अस्पताल लाया गया था.

कल्याण सिंह कहते हैं, "चंद्रशेखर की चिकित्सकीय जांच होनी चाहिए और उनकी बीमारी के बारे में पूरी जानकारी देनी चाहिए. यदि प्रशासन को सहारनपुर में चिकित्सकीय जांच कराने में दिक्क़त है तो उन्हें मेरठ या दिल्ली के अस्पताल ले जाया जाना चाहिए."

चंद्रशेखर के बाद भीम आर्मी का क्या?

कल्याण सिंह कहते हैं कि ये आंदोलन चंद्रशेखर या किसी एक व्यक्ति ने नहीं खड़ा किया है बल्कि ये अत्याचार के ख़िलाफ़ दलितों का आक्रोश है जो बाहर आया है.

वो कहते हैं, "चंद्रशेखर भले जेल में हैं, लेकिन दलित आंदोलन मज़बूत हो रहा है. दलित युवा अब भेदभाव के ख़िलाफ़ खड़े हो रहे हैं. चंद्रशेखर के रूप में इन युवाओं को ईमानदार नेतृत्व मिला है. वो सोमवार को जेल से आ जाएंगे तो फिर ये आंदोलन तेज़ हो जाएगा."

स्थानीय अदालत में ज़मानत याचिका रद्द हो जाने के बाद अब हाई कोर्ट में चंद्रशेखर की ज़मानत के लिए याचिका दायर की गई थी. गुरुवार को हाई कोर्ट ने सभी चार मामलों में चंद्रशेखर को ज़मानत दे दी.

भीम आर्मी अब दलित और मुस्लिम युवकों को एकजुट कर उन्हें आत्मरक्षा में प्रशिक्षण देने की तैयारी भी कर रही है.

कल्याण सिंह कहते हैं, "एक बार चंद्रशेखर बाहर आ जाएं तो युवाओं को प्रशिक्षित करने के लिए आत्मरक्षा कैंप भी लगाए जाएंगे."

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए

मिलते-जुलते मुद्दे