चरक और अल-बरूनी के समय भी पकती थी खिचड़ी

  • 2 नवंबर 2017
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केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने स्पष्ट कर दिया है कि खिचड़ी को राष्ट्रीय व्यंजन नहीं बनाया जा रहा है.

लेकिन इस बारे में ख़बर आने के बाद से खिचड़ी को लेकर खूब चर्चा हो रही है.

आमतौर पर दाल और चावल को मिलाकर बनाए जाने वाला ये व्यंजन भारत के अधिकतर हिस्सों में खाया जाता है.

उत्तर भारत में खिचड़ी रोज़ाना का भोजन है.

बीते साल दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में खिचड़ी को लेकर एक परिचर्चा हुई थी जिसमें खिचड़ी के महत्व पर विस्तार से बात की गई थी.

खिचड़ी यानी 'काल्पनिक राष्ट्रीय व्यंजन'

पारिवारिक भोजन

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Image caption खिचड़ी के हैं चार यार दही, पापड़, घी, अचार.

जेएनयू के प्रोफ़ेसर और व्यंजनों के बारे में जानकारी रखने वाले पुष्पेश पंत ने इस परिचर्चा में कहा था, "खिचड़ी पारिवारिक भोजन है जो भारत के लगभग हर हिस्से में बनाई और खाई जाती है."

पुष्पेश पंत मानते हैं कि खिचड़ी एक शुभ खाना भी है. मकर संक्रांति समेत कई त्योहारों पर खिचड़ी का प्रसाद भी बांटा जाता है.

पंत कहते हैं, "पंजाब की चना दाल खिचड़ी से लेकर दक्षिण की पोंगल तक सबका अपना महत्व है. कोई लाख मुंह बनाए, लेकिन खिचड़ी के महत्व से इनकार नहीं किया जा सकता."

"मज़ेदार बात है कि खिचड़ी पुलाव और बिरयानी को भी मात देती है. लंदन में केजरी मिलती है जिसमें मछली पड़ती है. जॉनसन की डिक्शनरी में इसका ज़िक्र मिलता है जो खिचड़ी का ही एक रूप है."

खिचड़ी को कुछ लोग पसंद करते हैं तो कुछ इसे बीमारों का खाना भी मानते हैं. खिचड़ी के बारे में अलग-अलग धारणाएं सदियों से चली आ रही हैं.

देवताओं को पसंद

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पंत बताते हैं, "अल-बरुनी ने किताब-उल-हिंद में लिखा है कि खिचड़ी सर्वप्रिय भोजन है. ये बात और है कि इसको लेकर लोगों के मन में अलग-अलग धारणाएं हैं."

वहीं बीएल इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडोलोजी के निदेशक जीसी त्रिपाठी के अनुसार खिचड़ी का ज़िक्र आयुर्वेद की पुस्तकों में मिलता है.

उनके अनुसार चरक संहिता में भी खिचड़ी का उल्लेख है.

त्रिपाठी कहते हैं, "किशर शब्द से निकला है खिचड़ी, जिसका उत्तम समय मकर संक्रांति के बाद शुरू होता है. इस समय देवयोग शुरू हो जाता है और खिचड़ी देवताओं को पसंद है. सूर्य का उत्तरायण होना उत्साह और ऊर्जा के संचारित होने का काल है जिसकी शुरुआत खिचड़ी से होती है."

पोंगल

उत्तर भारत में जिसे खिचड़ी कहते हैं वही दक्षिण भारत में पोंगल के नाम से भी जानी जाती है. इस नाम का एक पर्व भी है जिस दिन पोंगल का प्रसाद दिया जाता है.

तमिलनाडु में पोंगल सूर्य, इन्द्र देव, नई फ़सल और पशुओं को समर्पित पर्व है जो चार दिन का होता है. पोंगल चावल, मूंगदाल और दूध के साथ गुड़ डाल कर पकाया जाता है.

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