पैराडाइज पेपर्स: बीजेपी मंत्री और सांसद का नाम

  • 6 नवंबर 2017
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भारत ने सोमवार को पैराडाइज़ पेपर्स मामले की जांच के आदेश दिए हैं. वित्त मंत्रालय ने एक बयान जारी कर बताया कि इनकम टैक्स विभाग की जांच एजेंसियों को पैराडाइज़ पेपर्स से मिली जानकारियों पर फौरन जरूरी कदम उठाने के लिए कहा गया है.

सरकार की तरफ़ से कहा गया है, "इसके अलावा पैराडाइज़ पेपर्स से जुड़े मामलों की जांच की निगरानी के लिए केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड के चेयरमैन की अध्यक्षता में एक समूह गठित किया है जिसमें सीबीडीटी, प्रवर्तन निदेशालय, रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया और फिनांशियल इंटेलीजेंस यूनिट के प्रतिनिधि शामिल होंगे."

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पैराडाइज़ पेपर्स की जांच

पैराडाइज़ पेपर्स

पनामा पेपर्स लीक होने के 18 महीने बाद एक और बड़े वित्तीय डेटा से पर्दा हटा है. यह डेटा जर्मन अख़बार ज़्यूड डॉयचे त्साइटुंग के पास है, जिसकी जांच इंटरनेशनल कंसोर्शियम ऑफ़ इंवेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स (आईसीआईजे) ने 96 समाचार एजेंसियों के साथ की है.

इस जांच प्रक्रिया में बीबीसी भी शामिल है. इसके साथ ही इस जांच में भारत से इंडियन एक्सप्रेस शामिल है. इस लीक को पैराडाइज पेपर्स कहा जा रहा है. इसमें 1.34 करोड़ दस्तावेज़ लीक हुए हैं. इस लीक में दुनिया भर के हस्तियों के नाम शामिल हैं. इनमें भारत से भी दो नाम हैं.

एक केंद्रीय मंत्री जयंत सिन्हा और दूसरे बीजेपी के राज्यसभा सांसद रवींद्र किशोर सिन्हा हैं. इन दोनों के बारे में offshoreleaks.icij.org तस्वीर के साथ जानकारी दी गई है. इंडियन एक्सप्रेस ने भी इन दोनों नेताओं की भूमिका की पूरी जानकारी दी है.

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कैसे होती है टैक्स चोरी?

जयंत सिन्हा का हलफनामा

जयंत सिन्हा 2014 में हज़ारीबाग़ से लोकसभा सांसद और मंत्री बनने से पहले ओमिड्यार नेटवर्क के इंडिया मैनेजिंग डायरेक्टर थे. ओमिड्यार नेटवर्क का अमरीकी कंपनी डिलाइट डिज़ाइन में निवेश है जो कैरिबियाई समुद्री तट केमन आइलैंड की सब्सिडरी है.

ऑफ़शोर लीगल फ़र्म ऐपलबी के रिकॉर्ड के अनुसार सिन्हा ने डिलाइट डिज़ाइन में निदेशक के पद काम किया है. इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक़ जब जयंत सिन्हा ने 2014 के आम चुनाव में बतौर उम्मीदवार हलफ़नामा भरा तो उसमें इसकी जानकारी नहीं दी थी. इसके साथ ही उन्होंने लोकसभा सचिवालय या 2016 में एक मंत्री के तौर पर इसकी जानकारी नहीं दी.

डिलाइट डिज़ाइन इंक की स्थापना 2006 में सैन फ्रांसिस्को, कैलिफ़ोर्निया में की गई थी. इसके साथ ही कैमन आइलैंड में इसी नाम से एक सब्सिडरी भी थी. सिन्हा ने ओमिड्यार नेटवर्क सितंबर 2009 में जॉइन किया था और इस्तीफ़ा दिसंबर 2013 में दिया.

ओमिड्यार नेटवर्क ने डिलाइट डिज़ाइन में निवेश किया और इसके लिए उसने कैमन आइलैंड की सब्सिडरी के ज़रिए नीदरलैंड्स स्थित एक निवेशक से 30 लाख डॉलर का क़र्ज़ लिया था. ऐपलबी के रिकॉर्ड में कहा गया है कि लोन एग्रीमेंट 31 दिसबंर 2012 को हुआ था. जब यह फ़ैसला लिया गया तब जयंत सिन्हा डिलाइट डिज़ाइन के निदेशक थे.

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कैमन आइलैंड

26 अक्टूबर 2016 को जयंत सिन्हा की तरफ़ से पीएमओ को दी गई जानकारी पीएमओ की वेबसाइट पर मौजूद है.

हालांकि इसमें ये बात कही गई है, ''घोषणापत्र में दी गई जानकारी से ऐसा लग सकता है कि 2009 से 2013 के बीच ओमिड्यार नेटवर्क कंपनी के ख़ास निवेशों से हित जुड़े हैं. अगर घोषणाकर्ता के ऐसे कुछ हित होंगे तो भी वो उसके निर्णय को प्रभावित करने लायक नहीं होंगे. ठीक यही बात 24 मार्च 2014 को चुनाव आयोग के हलफ़नामे में कही गई है.

जयंत सिन्हा की तरफ़ से दी गई यही जानकारी लोकसभा सचिवालय में भी है.

ऐपलबी के 2012 के एक दस्तावेज़ के मुताबिक़ कैमन आइलैंड में डिलाइट सब्सिडरी के ज़रिए पूरा लोन लिया गया. लोन की राशि दो हिस्सों में ली गई. इस दस्तावेज़ पर 6 हस्ताक्षरकर्ताओं में से एक जयंत सिन्हा का भी है. लोन ग्लोबल कमर्शियल माइक्रोफ़ोन कंसोर्शियम II B.V. ने दिया था जो कि नीदरलैंड्स-इनकॉर्पोरेटेड प्राइवेट लिमिटेड लाइबलिटी कंपनी है.

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ऐपलबी ने 31 दिसंबर 2012 को इस लोन पर एक लीगल पक्ष रखा था. इस क़ानूनी पक्ष के लिए ऐपलबी ने उसी दिन 5775.39 डॉलर एक बिल जारी किया था. डिलाइट डिज़ाइन उच्च गुणवत्ता के उपभोक्ता उत्पादों को बनाती और डिज़ाइन करती है.

इस कंपनी की स्थापना 2004 में ईबे संस्थापक पेरी ओमिड्यार और उनकी पत्नी पाम ने की थी. इसमें ओमिड्यार नेटवर्क का निवेश है. ओमिड्यार में इंडियन निवेशक क्विकर, अक्षरा फाउंडेशन, अनुदीप फाउंडेशन, एसपाइरिंग माइंड्स और हेल्थकार्ट हैं.

जयंत सिन्हा की प्रतिक्रिया

मैंने सितंबर 2009 में मैनेजिंग निदेशक के तौर पर ओमिड्यार नेटवर्क जॉइन किया था. दिसंबर 2013 में मैंने इस्तीफ़ा दिया. ओमिड्यार नेटवर्क से 2010 में डिलाइट डिज़ाइन में निवेश की पहल के लिए मैं ज़िम्मेदार था. डिलाइट डिज़ाइन दुनिया की अग्रणी सोलर पावर कंपनियों में से एक है.

इसके बाद मैं नवंबर 2014 तक डिलाइट डिज़ाइन के बोर्ड में रहा. दिसंबर 2013 तक मैं ओमिड्यार नेटवर्क के बोर्ड में प्रतिनिधि था. जनवरी 2014 से नवंबर 2014 तक बोर्ड में मैं एक स्वतंत्र निदेशक था. जब नवंबर 2014 में मंत्री बना तो बोर्ड मेंबर से इस्तीफ़ा दे दिया. मेरा इन कंपनियों से अब कोई संबंध नहीं है.

डिलाइट डिज़ाइन बोर्ड मेंबर के तौर पर मैंने कोई लाभ हासिल नहीं किया. जनवरी 2014 से नवंबर 2014 तक स्वतंत्र निदेशक के तौर पर मुझे परामर्श शुल्क के रूप में रक़म मिली और इसी तरह डिलाइट डिज़ाइन के शेयर भी मिले.

मैंने जो टैक्स फ़ाइल की है उसमें ये सारी जानकारी मौजूद है. मेरे कई हलफ़नामों में इसकी जानकारी दी गई है. इन सालों में जब मैं ओमिड्यार नेटवर्क में था तो इस फ़र्म ने कई निवेश किए थे, जिसमें डिलाइट डिज़ाइन भी शामिल है. बोर्ड मेंबर को तौर पर वित्तीय दस्तावेज़ों पर मेरे हस्ताक्षर की ज़रूरत थी.

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ओमिड्यार की प्रतिक्रिया

ओमिड्यार नेटवर्क ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा, ''जयंत सिन्हा पार्टनर, मैनेजिंग डायरेक्टर और सलाहकार रहे हैं. वो जनवरी 2010 से 31 दिसंबर 2013 तक कंपनी के साथ रहे. हम अपनी गतिविधियों और निवेश या फ़ायदों की जानकारी सार्वजनिक नहीं कर सकते. डिलाइट डिज़ाइन से जुड़े कामकाज के बारे में उससे जानकारी मांगी जा सकती है. ''

बीजेपी सांसद रवींद्र किशोर सिन्हा

इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार 2014 में बिहार से राज्यसभा सांसद चुने गए रवींद्र किशोर सिन्हा सदन में सबसे अमीर सांसद माने जाते हैं. पूर्व पत्रकार रवींद्र किशोर सिन्हा ने प्राइवेट सिक्युरिटी कंपनी एसआईएस की स्थापना की थी. जिस ग्रुप की रवींद्र किशोर सिन्हा अगुवाई कर रहे हैं उसकी दो ऑफ़शोर कंपनियां हैं.

माल्टा रजिस्ट्री के रिकॉर्ड के मुताबिक़ एसआईएस एशिया पैसिफिक होल्डिंग्स एलटीडी (SAPHL) का माल्टा में 2008 में एसआईएस की सब्सिडरी के रूप में रजिस्ट्रेशन हुआ था. रवींद्र किशोर सिन्हा इस कंपनी में नाममात्र के शेयरहोल्डर हैं, लेकिन उनकी पत्नी रीता किशोर सिन्हा एसएपीएचएल की निदेशक हैं.

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रिकॉर्ड से पता चलता है कि एसआईएस इंटरनेशनल होल्डिंग लिमिटेड (एसआईएचएल) की पहुंच ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड पर भी है जिसका 3,999,999 शेयर SAPHL में है जबकि एक शेयर रवींद्र किशोर सिन्हा के नाम है.

माल्टा रजिस्ट्री में 13 अक्टूबर, 2008 के दस्तावेज़ों के मुताबिक़ SAPHL के 1499 साधारण शेयर एक यूरो प्रति शेयर के मूल्य पर पीसीएल इंटरनेशनल होल्डिंग लीमिटेड माल्टा से इंटरनेशनल होल्डिंग्स लीमिटेड ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड में ट्रांसफ़र किया गया.

एक साधारण शेयर डेविड मैरिनेली की तरफ़ से रवींद्र किशोर सिन्हा के पक्ष में भेजा गया. SIHL के निदेशक सिन्हा, उनकी पत्नी रीता किशोर और बेटे ऋतुराज किशोर सिन्हा हैं.

जब राज्यसभा चुनाव में रवींद्र किशोर सिन्हा ने चुनाव आयोग को अपना हलफ़नामा भेजा तो उसमें यह जानकारी नहीं दी थी कि SAPHL से उनकी पत्नी भी जुड़ी हैं. राज्यसभा सांसद बनने के बाद भी उन्होंने इसकी जानकारी नहीं दी.

रवींद्र किशोर सिन्हा का पक्ष - इंडियन एक्सप्रेस को बताया

ये कंपनियां अप्रत्यक्ष रूप से 100 फ़ीसदी एसआईएस की सब्सिडरी हैं और मैं शेयरधारक हूं. मेरा इन कंपनियों से सीधा कोई हित नहीं है. मैं यहां शेयरधारक ज़रूर हूं. मैं इन कंपनियों का निदेशक भी हूं.

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इन देशों के नियमों के मुताबिक़ किसी भी कंपनी के लिए दो शेयरहोल्डर्स का होना ज़रूरी है. इन सभी कंपनियों में मेरा एक-एक शेयर है. इससे जुड़ी सारी जानकारियों को मैंने सेबी को दे दी है.

क्या है पैराडाइज पेपर्स- ये बड़ी संख्या में लीक दस्तावेज़ हैं, जिनमें ज़्यादातर दस्तावेज़ आफ़शोर क़ानूनी फर्म ऐपलबी से संबंधित हैं. इनमें 19 तरह के टैक्स क्षेत्र के कारपोरेट पंजीयन के पेपर भी शामिल हैं. इन दस्तावेज़ों से राजनेताओं, सेलिब्रेटी, कारपोरेट जाइंट्स और कारोबारियों के वित्तीय लेनदेन का पता चलता है.

1.34 करोड़ दस्तावेज़ों को जर्मन अख़बार ने हासिल किया है और इसे इंटरनेशनल कंसोर्शियम ऑफ़ इंवेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स (आईसीआईजे) से शेयर किया है. 67 देशों के क़रीब 100 मीडिया संस्था से इसमें शामिल हैं, जिसमें गार्डियन भी शामिल है. बीबीसी की ओर से पैनोरमा की टीम इस अभियान से जुड़ी है. बीबीसी इन दस्तावेज़ों को मुहैया कराने वाले स्रोत के बारे में नहीं जानती.

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