आपने देखा आंबेडकर का जर्जर होता स्कूल?

7 नवंबर 1900 को डॉ. भीमराव आंबेडकर ने पहली कक्षा में दाख़िला लिया था.

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डॉ. भीमराव आंबेडकर ने 7 नवंबर 1900 को सतारा के सरकारी स्कूल मे दाख़िला लिया था. यह दिन महाराष्ट्र सरकार द्वारा स्कूल प्रवेश दिन के रूप में मनाया जाता है. इसी दिन पर बीबीसी द्वारा फोटो फ़ीचर की ख़ास पेशकश. आज ये स्कूल प्रताप सिंह हाई स्कूल नाम से जाना जाता है. उस वक्त यह स्कूल पहली से चौथी तक था. चौथी कक्षा तक आंबेडकर इसी स्कूल में पढ़े.

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सतारा सरकारी स्कूल राजवाडा इलाके में एक हवेली (वाडा) में चलता था. आज भी ये हवेली इतिहास की गवाह है. 1824 में छत्रपती शिवाजी महाराज के वारिस प्रताप सिंह राजे भोसले ने इसे बनावाया था. उस वक्त राजघराने की लड़कियों को पढ़ाने के लिए यहां स्कूल खोला गया. 1851 में यह हवेली स्कूल के लिए ब्रिटिश सरकार के हवाले कर दी गई.

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डॉ. आंबेडकर के पिताजी सुभेदार रामजी सकपाल आर्मी से रिटायर्ड होने के बाद सतारा में बस गये थे. वहीं पर 7 नवंबर 1900 को 6 साल के भिवा (आंबेडकर का बचपन का नाम) ने सातारा गवर्नमेंट स्कूल में दाखिला लिया. सुभेदार रामजी ने स्कूल में दाखिल करते वक्त आंबेडकर का सरनेम आंबडवे गांव के नाम से आंबडवेकर लिख दिया. उस स्कूल में कृष्णाजी केशव आंबेडकर शिक्षक थे. उनका सरनेम आंबेडकर उनको दिया गया.

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स्कूल के रजिस्टर में भिवा आंबेडकर ऐसा नाम दर्ज है. रजिस्टर में 1914 इस नंबर के आगे उनका हस्ताक्षर है. यह ऐतिहासिक दस्तावेज़ स्कूल में संरक्षित करके रखा गया है.

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स्कूल को 100 साल पूरे होने पर 1951 में इस स्कूल का नाम छत्रपति प्रताप सिंह हाई स्कूल रखा गया.

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10वीं कक्षा में पढ़ने वालीं पल्लवी रामचंद्र पवार कहती हैं, “भारतरत्न डॉ. भीमराव आंबेडकर जिस स्कूल में पढ़े उसी स्कूल में मैं पढ़ रही हूं इसका मुझे अभिमान है. हर साल स्कूल में आंबेडकर जयंती, स्कूल प्रवेश दिन जैसे प्रोग्राम होते हैं. इन प्रोग्राम में मेहमान भाषण में बताते हैं कि बाबा साहेब किन मुश्किल हालातों मे पढ़े. मैं भी वह हालात समझ सकती हूं. मेरी माँ घरेलू कामकाज करती हैं और पिताजी पेंटर हैं. मुझे बड़ा होकर डीएम बनना है.”

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विराज महिपती सोनावाले 10वी कक्षा में पढ़ते हैं. वह कहते हैं, “मैं सुबह अख़बार बेचकर स्कूल में पढ़ने आता हूं. उस वक्त मुझे बाबा साहेब का संघर्ष अपनी आँखों के सामने दिखता है. मैं अपने मन में कहता हूं की मेरी मेहनत उनके सामने कुछ भी नहीं. मैं बाबा साहेब के स्कूल में पढ़ता हूं इसकी मुझे खुशी है. बाबा साहेब की तरह मुझे भी समाज के लिए काम करना है.”

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स्कूल की प्रधानाचार्य एस जी मुजावर कहती हैं, “प्रताप सिंह हाई स्कूल में ग़रीब, ज़रूरतमंद तबके से छात्र मेहनत करके सीखते हैं. आंबेडकर की विरासत को हम संरक्षित कर रहे हैं इसकी हमें खुशी है. लेकिन इस स्कूल को फुल टाईम हेडमास्टर की ज़रूरत है. स्कूल बिल्डिंग पुरानी हो चुकी है और जर्जर होती जा रही है. हमें नये बिल्डिंग की ज़रूरत है. स्कूल मे छात्रों की संख्या बढ़ाने की हम कोशिश कर रहे हैं.”

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लोक निर्माण विभाग ने कुछ साल पहले स्कूल की बिल्डिंग को ख़तरनाक बिल्डिंग की श्रेणी में डाल दिया था और उसकी जगह बदलने की सिफारिश की है. यह पुरानी हवेली ऐतिहासिक धरोहर करके नामित हुई है.