पत्रकार विनोद वर्मा की ज़मानत याचिका ख़ारिज

  • 7 नवंबर 2017
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छत्तीसगढ़ के एक मंत्री की कथित अश्लील सीडी मामले में गाज़ियाबाद से गिरफ़्तार वरिष्ठ पत्रकार विनोद वर्मा की ज़मानत याचिका खारिज़ हो गई है. रायपुर की स्थानीय अदालत ने कहा कि प्रकरण की प्रकृति गंभीर है, ऐसे में जमानत देना उचित नहीं है.

विनोद वर्मा के वकील फ़ैसल रिज़वी ने कहा, "विनोद वर्मा को पुलिस ने झूठे मामले में फंसाया है. हमने अदालत में यह दलील दी कि जिन धाराओं में विनोद वर्मा के ख़िलाफ़ मामला दर्ज़ किया गया है, वे धाराएं उनपर लागू नहीं होतीं. लेकिन अदालत का कहना था कि अपराध की धाराएं गंभीर प्रकृत्ति की हैं."

उन्होंने कहा कि इस मामले में जल्द ही सेशन कोर्ट में ज़मानत याचिका दायर की जाएगी.

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रायपुर के न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी भावेश कुमार वट्टी की अदालत में विनोद वर्मा की ओर से शुक्रवार को ज़मानत की अर्जी लगाई गई थी, लेकिन केस डायरी के अभाव में इस पर सुनवाई नहीं हो पाई थी. अदालत ने सोमवार तक पुलिस को केस डायरी प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे.

सोमवार को केस डायरी पेश किए जाने के बाद वकीलों ने बहस की. लगभग डेढ़ घंटे की बहस के बाद अदालत ने भोजनावकाश तक फ़ैसला सुरक्षित रखा. इसके बाद जमानत की याचिका खारिज कर दी गई.

क्या है मामला?

गौरतलब है कि 27 अक्टूबर की सुबह छत्तीसगढ़ में रमन सिंह सरकार के मंत्री राजेश मूणत से जुड़ी एक कथित सेक्स सीडी के मामले में वरिष्ठ पत्रकार विनोद वर्मा को छत्तीसगढ़ पुलिस ने ग़ाज़ियाबाद से गिरफ़्तार किया था.

इसके बाद उन्हें 29 अक्टूबर को रायपुर की स्थानीय अदालत में पेश किया गया था. जहां से पूछताछ के लिए उन्हें तीन दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा गया था. पूछताछ के बाद अदालत ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया था.

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Image caption छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह और राजेश मूणत (दाएं)

शुक्रवार को विनोद वर्मा की जमानत के लिए रायपुर की स्थानीय अदालत में याचिका लगाई गई थी.

इस पर सुनवाई करते हुए न्यायाधीश भावेश कुमार वट्टी की अदालत ने पुलिस को सोमवार को केस डायरी पेश करने का निर्देश दिया था.

छत्तीसगढ़ सरकार ने इस पूरे मामले की जांच सीबीआई से करवाए जाने की घोषणा की है. हालांकि, अभी तक सीबीआई की ओर से मामले को स्वीकार किए जाने के कोई संकेत नहीं मिले हैं.

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सामने आए शिकायतकर्ता

मंत्री की कथित सेक्स सीडी को लेकर छत्तीसगढ़ में बीजेपी और कांग्रेस में चल रही राजनीतिक लड़ाई के बीच इस मामले में पुलिस के समक्ष एफआईआर दर्ज़ कराने वाले प्रकाश बजाज लगभग नौ दिनों तक भूमिगत रहने के बाद मीडिया के सामने आए.

उन्होंने कहा कि एफआईआर दर्ज़ किए जाने के बाद से जिस तरह से फ़ोन आना शुरू हुए, उससे वह डर गए थे. इस कारण उन्होंने अपना फ़ोन बंद कर लिया था और दो दिन के लिए शहर से भी बाहर चले गए थे.

भाजपा के पदाधिकारी प्रकाश बजाज ने ही पुलिस में रिपोर्ट दर्ज़ कराई थी, जिसमें उन्होंने बताया था कि उन्हें एक फ़ोन आया जिसमें उनके 'आका' की सेक्स सीडी बनाने की बात कही गई.

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Image caption प्रकाश बजाज

प्रकाश बजाज की एफ़आईआर में विनोद वर्मा के नाम का ज़िक्र नहीं है, लेकिन एक दुकान का ज़िक्र है, जहां पर कथित तौर पर सीडी की नकल बनाई जा रही थी.

26 अक्टूबर की दोपहर साढ़े तीन बजे के आस पास दर्ज़ की गई इस रिपोर्ट के दर्ज़ होने के लगभग 11 घंटों के भीतर ही छत्तीसगढ़ पुलिस ने दिल्ली और फिर वहां से गाजियाबाद पहुंचकर विनोद वर्मा को गिरफ़्तार कर लिया था.

बजाज ने रिपोर्ट में दर्ज़ 'आका', फ़ोन करने वाले की पहचान या विनोद वर्मा के बारे में किसी भी तरह की जानकारी से अनभिज्ञता जताई.

उन्होंने कहा, मेरे पास जो भी जानकारी थी, मैंने अपनी रिपोर्ट में दर्ज़ करा दी है. अब यह मामला अदालत में है, इसलिए इस पर कोई टिप्पणी करना उचित नहीं होगा."

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