नज़रिया: 'मोदी सरकार राजनीतिक कीमत चुकाएगी'

  • 8 नवंबर 2017
नोटबंदी इमेज कॉपीरइट Getty Images

नोटबंदी के एक साल बाद हमारे देश की आर्थिक व्यवस्था पर काफ़ी असर पड़ा है. नोटबंदी से लाखों लोगों को परेशानी हुई है, रोज़गार खत्म हुआ है. लाखों लोगों के कारोबार पर असर पड़ा है.

मोदी सरकार की नीतियों के ख़िलाफ़ विरोध करने के लिए हम पूरे देश में प्रतिशोध दिवस मना रहे हैं. जिससे हम लोगों को नोटबंदी के नुकसान के बारे में बताएंगे.

सोशल: 'अगर आज मोदी फेल हुआ तो...'

इमेज कॉपीरइट Getty Images

एटीएम कतार में गरीब थे

जिस दिन से नोटबंदी का ऐलान किया गया. हम तब से इसके ख़िलाफ़ हैं. एक साल का अनुभव बताता है कि ये सब भ्रम था. अमीर लोग कतार में नहीं खड़े हुए, बल्कि उन्होंने अपने लोगों को कतार में लगवाया.

एटीएम की कतार में ग़रीब लोग खड़े थे. नोटबंदी को लेकर सरकार ने काफ़ी प्रचार किया था. कहा गया कि इससे कालाधन वापस आएगा, भ्रष्टाचार ख़त्म होगा. सरकार की बातों ने लोगों में भ्रम पैदा किया.

नोटबंदी की वजह से हमारी आर्थिक व्यवस्था को काफी नुकसान पहुंचा है. आर्थिक गति धीमी हुई है, बेरोज़गारी बढ़ी है, किसानों की हालत ख़राब हुई है.

विपक्ष समझता है कि इससे मोदी सरकार का पर्दाफाश किया जा सकता है.

20 फ़रवरी से बचत खाते से निकालिए 50 हज़ार

नोटबंदी: 16 हज़ार करोड़ नहीं लौटे वापस

इमेज कॉपीरइट Getty Images

पैराडाइज़ पेपर में कई लोगों के नाम

सरकार की तरफ से काला धन विरोधी दिवस मनाया जा रहा है. लेकिन दो दिन पहले दुनिया के सामने सच आ गया. पैराडाइज़ पेपर में हमारे देश के सबसे अमीर और प्रभावशाली लोगों के नाम शामिल हैं. आज भी लोग टैक्स हेवन्स में पैसा भेज रहे हैं.

नोटबंदी का फ़ैसला पूरी तरह से बेनकाब हो चुका है. विपक्ष के लिए ये अच्छा मौका है मोदी सरकार को बेनकाब करने का. नोटबंदी ने लोगों को परेशान किया है.

काला धन ऐसी चीज़ है जिसे कोई भी नक़द के रूप में नहीं रखता है. कालेधन के अलग-अलग रूप हैं. नोटबंदी से काला धन खत्म होगा ये तो एक मिथ्या था और यह अब जगज़ाहिर हो गया है.

काले धन की बड़ी वजह हमारे आर्थिक व्यवस्था में कमी है, उन कमियों को ठीक करने की बजाए नोटबंदी कर दी गई.

मोदी सरकार को नोटबंदी की राजनीतिक कीमत आने वाले दिनों में चुकानी पड़ेगी.

(बीबीसी संवाददाता पायल भुयन के साथ बातचीत पर आधारित)

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए

मिलते-जुलते मुद्दे