राजीव गांधी के क़ातिलों पर सोनिया गांधी करें रहम: जस्टिस थॉमस

  • 20 नवंबर 2017
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कई वजहों से ये केस दूसरे मुक़दमों से अलग रहा है. दुनिया इस मुक़दमे को राजीव गांधी हत्याकांड के नाम से जानती है.

ये मुक़दमा एक बार फिर से सुर्खियों में है क्योंकि राजीव गांधी की हत्या की साज़िश में शामिल लोगों की सज़ा पर मुहर लगाने वाले जज ने अब उनकी विधवा सोनिया गांधी से दोषियों के प्रति दया दिखाने की अपील की है ताकि वे जेल से रिहा किए जा सकें.

21 मई 1991 को तमिलनाडु के श्रीपेरुम्बुदुर में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की एक चुनावी रैली के दौरान आत्मघाती हमलावरों ने हत्या कर दी थी.

ये हत्यारे श्रीलंका से आए थे. तभी से इंसाफ़ का पहिया आहिस्ता-आहिस्ता घूमता रहा है. इस मामले में जिन्हें सज़ा सुनाई गई, वे 28 साल से सलाखों की पीछे हैं.

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सोनिया से अपील

यहां तक कि तमिलनाडु सरकार की तरफ़ राजीव के हत्यारों के लिए साल 2014 में दायर की गई माफ़ी की अपील भी सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं.

दोषियों की सज़ा पर मुहर लगाने वाली सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय बेंच के मेंबर रहे जस्टिस केटी थॉमस ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से उदारता दिखाने की अपील करते हुए 18 अक्टूबर को ये चिट्ठी लिखी.

जस्टिस थॉमस एक मैगज़ीन में छपे आर्टिकल का जिक्र करते हैं जिसमें एक दोषी की मां का हवाला दिया गया था. उस अपराधी को साल में एक बार ही अपनी मां से मिलने के लिए परोल पर जेल से रिहा किया जाता था.

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Image caption जस्टिस थॉमस की चिट्ठी का पहला पन्ना

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जस्टिस केटी थॉमस ने बीबीसी हिंदी से लिखा, "इससे मुझे बेहद तकलीफ़ हुई. ये आदमी पिछले 28 सालों से जेल में बंद है. मुझे लगा कि ये सिलसिला कहीं तो ख़त्म होना चाहिए. मेरे ख़्याल में केवल सोनिया गांधी ही वो शख़्स हैं जिनकी अपील पर कोई रास्ता बन सकता है."

जस्टिस थॉमस कहते हैं, "मेरे सामने अभी तक ऐसा कोई मामला नहीं आया है, जिसमें उम्र कैद की सज़ा 14 सालों से ज़्यादा लंबी हो गई हो. महात्मा गांधी के क़ातिल नाथूराम गोडसे के भाई गोपाल गोडसे को भी 14 साल जेल में रखने के बाद रिहा कर दिया गया था. मुझे लगता है कि उनके प्रति थोड़ी सी दया दिखाई जानी चाहिए."

वे आगे कहते हैं, "इसका मतलब ये नहीं है कि उन्हें सज़ा नहीं दी जानी चाहिए. उन्हें सज़ा दी जा चुकी है लेकिन सज़ा की भी एक हद हो." 18 अक्टूबर को सोनिया गांधी के नाम लिखी चिट्ठी में जस्टिस थॉमस ने उनसे मानवाधिकार के मुद्दे पर क़दम उठाने की अपील की है.

Image caption जस्टिस थॉमस की चिट्ठी का दूसरा पन्ना

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