सीबीआई जज लोया की मौत के मामले में नया मोड़

  • 27 नवंबर 2017
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सीबीआई के विशेष जज ब्रजगोपाल लोया की मौत की परिस्थितियों को अंग्रेज़ी पत्रिका 'द कैरेवन' ने संदेहास्पद बताया था, पत्रिका में मृत जज के परिजनों से बातचीत के आधार पर एक रिपोर्ट प्रकाशित की गई थी.

इस रिपोर्ट के आने के बाद से कुछ रिटायर्ड जजों, वकीलों और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सहित कई नेताओं ने लोया की मौत की जाँच कराने की माँग की थी.

लेकिन अब अंग्रेजी दैनिक 'इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट ने 'द कैरेवन' की रिपोर्ट पर सवाल उठाए हैं. लोया की मौत एक दिसंबर की सुबह नागपुर में हुई थी जहाँ वे एक शादी में शामिल होने गए थे, उनकी मौत की वजह दिल का दौरा पड़ना बताई गई है.

सोशल मीडिया पर जज लोया की मौत की चर्चा

पत्रिका 'द कैरेवन' की रिपोर्ट में कहा गया था कि जज लोया को ऑटो रिक्शा में अस्पताल ले जाया गया था, इसके अलावा लोया की बहन ने सवाल उठाया था कि दिल का दौरा पड़ने की हालत में उनका ईसीजी क्यों नहीं किया गया?

'इंडियन एक्सप्रेस' ने एक ईसीजी रिपोर्ट भी छापी है, दांडे अस्पताल के प्रबंधकों ने भी अख़बार को बताया है कि जज लोया का ईसीजी टेस्ट किया गया था.

मगर 'द कैरेवन' के राजनीतिक मामलों के संपादक हरतोष सिंह बल ने ट्विट करके कहा है कि "अभी तक के लिए तो इतना ही नोट करना काफ़ी है कि इंडियन एक्सप्रेस ने जो ईसीजी रिपोर्ट छापी है और जिसका हवाला एनडीटीवी ने दिया है, उस पर तारीख़ 30 नवंबर की है, जो जज लोया की मौत से एक दिन पहले की है."

अंग्रेज़ी दैनिक 'इंडियन एक्सप्रेस' ने 'द कैरेवन' की रिपोर्ट में किए गए दावों पर सवाल उठाए हैं, अख़बार ने मुंबई हाई कोर्ट के दो जजों--जस्टिस भूषण गवई और जस्टिस सुनील शुकरे--से बातचीत की है, इन दोनों का कहना है कि वे जज लोया की मौत के समय अस्पताल में मौजूद थे.

लातूर बार एसोसिएशन का प्रदर्शन

'इंडियन एक्सप्रेस' का कहना है कि दोनों जजों ने माना है कि लोया की मौत की परिस्थितियों में ऐसा कुछ नहीं था जिस पर शक किया जा सके.

जस्टिस शुकरे ने कहा, "उन्हें ऑटो रिक्शा से अस्पताल ले जाने का सवाल ही नहीं है, जज बरडे उन्हें अपनी कार में दांडे हॉस्पिटल ले गए थे." कैरेवन की रिपोर्ट में कहा गया था कि उन्हें ऑटो से अस्पताल ले जाया गया था.

इस बीच, जज लोया के गृह नगर लातूर के बार एसोसिएशन ने मामले की जाँच की माँग करते हुए सोमवार को प्रदर्शन करने की घोषणा की है.

जज लोया अपनी मौत से पहले सोहराबुद्दीन शेख़ मुठभेड़ केस की सुनवाई कर रहे थे जिसमें भाजपा के मौजूदा अध्यक्ष अमित शाह अभियुक्त थे, लोया के बाद आने वाले सीबीआई जज ने अमित शाह को बरी कर दिया था.

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