प्रेस रिव्यूः तीन तलाक़ देना होगा ग़ैर ज़मानती अपराध, मिलेगी तीन साल की सजा

  • 2 दिसंबर 2017
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इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक केंद्र सरकार के प्रस्तावित क़ानून के तहत तीन तलाक़ देना ग़ैर ज़मानती अपराध होगा जिसके लिए तीन साल तक की सजा हो सकती है. मौख़िक, लिखित या किसी भी रूप में दिए गए तीन तलाक़ को आपराधिक कृत्य माना जाएगा.

तीन महीने पहले भारत के सुप्रीम कोर्ट ने एक साथ तीन तलाक़ या तलाक़-ए-बिद्दत की प्रथा को अवैध क़रार दिया था. मुस्लिम महिला विवाह संरक्षण विधेयक नामक प्रस्तावित क़ानून पर केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों से राय मांगी है.

इस क़ानून के तहत एक बार में तीन तलाक़ (तलाक़-ए़-बिद्दत) देना चाहे वो किसी रूप में क्यों न हो (लिखित, मौखिक, ईमेल, व्हाट्सएप या एसएमएस) गैरक़ानूनी होगा.

इस क़ानून के बनने से मुस्लिम महिलाओं को वो अधिकार मिल जायेंगे जिसके आधार पर वो अपने और अपने बच्चों को लिए गुजारा भत्ता देने की मांग कर सकेंगी. साथ ही वो नाबालिग बच्चों की कस्टडी भी मांग सकती हैं. गुजारा भत्ता उस स्थिति को देखते हुए दिये जाने का प्रस्ताव है जब महिला का पति उसे घर से निकलने के लिए कहता है.

यह क़ानून जम्मू-कश्मीर को छोड़ पूरे देश में लागू होगा. रिपोर्ट के मुताबिक इस साल पूरे देश में 244 तीन तलाक़ के मामले सामने आये हैं.

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ओरल सेक्स मैरिटल रेप नहीं

गुजरात सरकार ने हाई कोर्ट में दिए एक हलफ़नामे में कहा है कि पत्नी को ओरल सेक्स के लिए मजबूर करना घरेलू हिंसा का मामला है, न कि बलात्कार या अप्राकृतिक सेक्स का.

द टाइम्स ऑफ़ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक बीते महीने हाई कोर्ट ने पूछा था कि ये कृत्य अप्राकृतिक सेक्स है (धारा 377 के तहत अपराध), बलात्कार (धारा 376 के तहत अपराध) है या 498ए के तहत घरेलू हिंसा और मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न है.

साबरकांठा की एक महिला ने अपने पति के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज करवाई थी. महिला का कहना था कि उसका पति उसे जबरदस्ती ओरल सेक्स के लिए मजबूर करता है.

अपने जवाब में गुजरात सरकार ने कहा है कि भारत में 'वैवाहिक बलात्कार' यानी 'मैरिटल रेप' कानून की नज़र में अपराध नहीं है, इसलिए पत्नी के साथ ज़बरदस्ती ओरल सेक्स में बलात्कार के आरोप तय नहीं होते.

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Image caption अयोध्या स्थित बाबरी मस्जिद को 6 दिसंबर 1992 को गिरा दिया गया था

बाबरी मस्जिद गिराये जाने की सुनवाई पहले हो

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक अयोध्या मामले की जांच करने वाले जज लिब्रहान ने कहा है कि विवादित भूमि पर फ़ैसला देने से पहले मस्जिद गिराए जाने के मामले की सुनवाई होनी चाहिए.

6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद गिराए जाने की जांच करने वाले जस्टिस मनमोहन सिंह लिब्रहान का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट को मस्जिद गिराए जाने की सुनवाई पूरी करने के बाद ही मालिकाना हक़ के विवाद की सुनवाई करनी चाहिए.

लिब्रहान ने अपनी जांच में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी पर आरोप तय किए थे.

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शहीद की बेटी को रूपाणी की सभा से निकाला गया

द टाइम्स ऑफ़ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने पुलिस अधिकारियों के अपनी एक चुनावी सभा से एक महिला को घसीटकर बाहर निकालने का वीडियो सामने आने के बाद उसके परिवार के लिए कई सुविधाओं की घोषणा की है.

वीडियो में दिख रही महिला को शहीद सैनिक की बेटी बताया जा रहा है. कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने ये वीडियो ट्वीट कर कहा था, "'परम देशभक्त' रूपाणीजी ने शहीद की बेटी को सभा से बाहर फिंकवा कर मानवता को शर्मसार किया. 15 साल से परिवार को मदद नहीं मिली, खोखले वादे और दुत्कार मिले. इंसाफ़ माँग रही इस बेटी को आज अपमान भी मिला. शर्म कीजिए,न्याय दीजिए."

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