दिल्ली: मैक्स अस्पताल का लाइसेंस रद्द, मरीज़ों का क्या होगा?

  • 8 दिसंबर 2017
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दिल्ली सरकार ने शालीमार बाग मैक्स अस्पताल का लाइसेंस शुक्रवार को रद्द कर दिया. अस्पताल पर जुड़वा बच्चों के इलाज में लापरवाही बरतने का आरोप है, जिसके बाद दोनों बच्चों की मौत हो गई थी.

अस्पताल ने लाइसेंस रद्द पर जारी एक बयान में कहा है, "हम मानते हैं कि ये फ़ैसला काफ़ी कठोर है. और हमें अपना पक्ष रखने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया गया. हम सभी विकल्पों पर ध्यान दे रहे हैं."

ऐसे में सवाल ये है कि किसी भी अस्पताल के लाइसेंस रद्द होने का क्या मतलब होता है और इसका मरीज़ों पर क्या असर होगा?

साल 2011 में शालीमार बाग मैक्स अस्पताल दिल्ली नर्सिंग होम रजिस्ट्रेशन एक्ट 1953 के तहत रजिस्टर हुआ था. इस एक्ट के तहत किसी भी अस्पताल का लाइसेंस रद्द करने का अधिकार दिल्ली सरकार को है.

बीते शुक्रवार को दिल्ली के एक दंपत्ति ने अस्पताल पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा था कि अस्पताल ने उनके नवजात ज़िंदा बच्चे को मृत बता कर उन्हें सौंप दिया था.

मामला संज्ञान में आने के बाद दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने तुरंत जांच के आदेश दिए थे और एक हफ्ते में रिपोर्ट मांगी थी.

लाइसेंस रद्द होने के बाद क्या नहीं कर सकता अस्पताल?

दिल्ली सरकार के मुताबिक, "मैक्स अस्पताल में जो हुआ, वो बर्दाश्त से बाहर है. इस अस्पताल को ईडब्ल्यू कोटा, अतिरिक्त बेड को लेकर कई मामलों में नोटिस जारी किए गए हैं, वहां भी इस अस्पताल की गलती पाई गई है. ऐसे में शालीमार बाग स्थित मैक्स अस्पताल का दिल्ली सरकार लाइसेंस रद्द करती है.''

दिल्ली सरकार द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि तत्काल प्रभाव से अस्पताल किसी नए मरीज़ को भर्ती करने की प्रक्रिया पर रोक लगाए.

लाइसेंस रद्द होने के बाद अस्पताल की ओपीडी सेवाएं भी नही चल सकती हैं.

इसके अलावा लाइसेंस रद्द करने के आदेश में ये भी लिखा गया है कि जो मरीज़ अस्पताल में पहले से भर्ती हैं वो चाहें तो मरीज़ के इलाज पूरा होने तक वहां रुक सकते हैं या फिर तत्काल प्रभाव से दूसरे अस्पताल में शिफ्ट हो सकते है या ट्रांसफर करवा सकते हैं.

शालीमार बाग मैक्स अस्पताल जब शुरू हुआ था, तब अस्पताल में 80 बेड की सुविधा हुआ करती थी. 2017 जनवरी में इस अस्पताल को 250 बेड तक बढ़ाने की इज़ाजत दी गई.

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Image caption ये वर्षा हैं, जिन्होंने हफ़्तेभर में अपने दो बच्चों को खो दिया

कब तक मान्य था अस्पताल का लाइसेंस

इस अस्पताल का लाइसेंस 31 मार्च 2020 तक मान्य था. लेकिन एक दिसंबर को जिंदा बच्चे को मृत घोषित करने के अलावा भी कई अनियमितताएं इस अस्पताल के जांच में पाई गईं थी. अस्पताल में ईडब्ल्यू कोटा, अतिरिक्त बेड को लेकर कई मामलों में नवंबर महीने में नोटिस जारी किए गए थे, जिसमें अस्पताल से जवाब मांगा गया था.

शालीमार बाग मैक्स अस्पताल डीडीए की जमीन पर बना हुआ है. दिल्ली सरकार ने अस्पताल को जारी नोटिस में अस्पताल की लीज़ क्यों न रद्द की जाए, इस बारे में भी सवाल पूछा था.

दिल्ली सरकार के नोटिस का अस्पताल प्रशासन ने जवाब भी भेजा, जिससे सरकार संतुष्ट नहीं थी.

नवजात जिंदा शिशु को मृत घोषित करने के मामले में दिल्ली सरकार ने अपनी जांच में अस्पताल के नर्स को दोषी पाया है. साथ ही जांच में ये बात भी सामने आई है कि बिना डॉक्टर के साइन के एटेंडेंट ने बच्चे को परिवार के हवाले कर दिया था.

इस पूरे विवाद पर बीबीसी ने इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आइएमए) से बात की. आईएमए अध्यक्ष के के अग्रवाल के मुताबिक, "दिल्ली सरकार का फैसला गलत है. उन्हें इस पर दोबारा विचार करना चाहिए. एक डॉक्टर और कुछ कर्मचारियों की गलती की सज़ा पूरे अस्पताल को नहीं दी जा सकती.''

ज़िंदा बच्चे को मृत बताने वाले मैक्स अस्पताल का लाइसेंस रद्द

''मेरे ज़िंदा बच्चे को मेरी मरी हुई बच्ची के साथ सुला रखा था''

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