ओशो की वजह से राजीव राजनीति में आए?

  • 11 दिसंबर 2017
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क्या आप सोच सकते हैं कि भारत के छठे प्रधानमंत्री राजीव गांधी और आध्यात्मिक गुरु ओशो के बीच कुछ संबंध हो सकता है. दरअसल एक नई किताब में इसे लेकर एक दावा किया गया है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ कवि और कलाकार राशीद मैक्सवेल की किताब 'द ओनली लाइफ: ओशो, लक्ष्मी एंड द वर्ल्ड इन क्राइसेस' में दावा किया गया है कि इंदिरा गांधी ओशो से प्रभावित थीं और उन्होंने अपने बेटे राजीव गांधी को राजनीति में लाने के लिए ओशो की सचिव लक्ष्मी की मदद ली थी.

दरअसल राजनीति में आने से पहले राजीव गांधी प्रोफेशनल पायलट थे और उनकी राजनीति में कोई ख़ास दिलचस्पी नहीं थी.

लेकिन संजय गांधी की एक प्लेन क्रैश में मौत के बाद इंदिरा गांधी चाहती थीं कि उनका दूसरा बेटा राजीव गांधी राजनीति में उतरें.

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ओशो की सचिव ने राजीव को समझाया

इंदिरा गांधी अपने पिता जवाहरलाल नेहरू की तरह ही अध्यात्म में दिलचस्पी रखती थीं. वो ओशो के शब्दों से प्रभावित थीं. लेकिन ओशो उस वक्त एक विवादास्पद व्यक्तित्व थे, इसलिए इंदिरा कभी उनके आश्रम जाकर सीधे उनसे नहीं मिलीं.

'द ओनली लाइफ: ओशो, लक्ष्मी एंड द वर्ल्ड इन क्राइसेस' के मुताबिक़ जब 1977 में इंदिरा गांधी सत्ता से बाहर हुईं तो ओशो की सचिव लक्ष्मी को उनके घर या ऑफिस किसी भी वक्त आने के लिए ग्रीन पास दिया गया.

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साल 1980 में इंदिरा गांधी के सत्ता में लौटने के बाद संजय गांधी की एक विमान दुर्घटना में अकास्मिक मौत हो गई.

राशीद मैक्सवेल ने लिखा है कि उस वक्त जब लक्ष्मी इंदिरा से मिलने आईं, तो उन्होंने लक्ष्मी से आग्रह किया कि वो राजीव गांधी को पायलट का पेशा छोड़कर राजनीति में आने के लिए समझाएं.

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ओशो की सचिव

राशीद मैक्सवेल के मुताबिक़, "इसके बाद जिसके बाद लक्ष्मी ने उनके कमरे में जाकर उनसे काफी देर तक बात की. उन्होंने राजीव को समझाया कि कैसे वो 20 शताब्दी में देश की प्रगति में अपना योगदान दे सकते हैं. इसके बाद अनिच्छुक राजीव गांधी ने राजनीति में हाथ आज़माने का फैसला किया."

साल 1984 में मां इंदिरा गांधी की हत्या के बाद वो देश के छठे प्रधानमत्री भी बने.

'द ओनली लाइफ: ओशो, लक्ष्मी एंड द वर्ल्ड क्राइसेस' किताब ओशो की सचिव लक्ष्मी की जीवनी है. ब्रिटिश इंडिया में पली-बड़ी लक्ष्मी ओशो की पहली सचिव थीं.

लक्ष्मी ने रहस्यवादी ओशो के मार्गदर्शन में अपने और दूसरे लोगों को रास्ता दिखाया. इस किताब में लक्ष्मी के जीवन में आए उतार-चढ़ावों के बारें में भी लिखा गया है.

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