प्रेस रिव्यूः विधायक ने कराया झारखंड में सामूहिक चुंबन का आयोजन

  • 12 दिसंबर 2017
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नवभारत टाइम्स के मुताबिक, झारखंड के पाकुड़ जिले में परंपरागत ग्रामीण मेले के दौरान आदिवासी दंपतियों के लिए चुंबन प्रतियोगिता आयोजित कर झारखंड मुक्ति मोर्चा के दो विधायकों ने विवाद पैदा कर दिया.

राज्य में सत्ताधारी बीजेपी ने मांग की कि दोनों विधायकों को निलंबित किया जाए, क्योंकि उन्होंने स्थानीय संस्कृति का अपमान किया है.

प्रतियोगिता के आयोजक जेएमएम विधायक साइमन मरांडी ने कहा कि आदिवासी समाज में तलाक की बढ़ती संख्या पर लगाम लगाने के लिए चुंबन प्रतियोगिता आयोजित की गई.

साइमन संथाल परगना के लिट्टीपारा से विधायक हैं.

पार्टी के विधायक स्टीफन मरांडी भी इस दौरान मौजूद थे. रांची से करीब 400 किलोमीटर दूर संथाल परगना के झुमरिया गांव में इस मेले का आयोजन हुआ था.

आयोजन का विडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है जिसमें भीड़ के घेरे के बीच दंपति चुंबन लेते दिख रहे हैं.

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इकोनॉमिक टाइम्स की एक ख़बर के मुताबिक, सरकार ने एक अहम फैसले में टीवी चैनलों पर कंडोम के विज्ञापनों को लेकर पाबंदी की घोषणा करते हुए कहा है कि इसके विज्ञापन देर रात को ही प्रसारित किए जा सकेंगे.

सूचना प्रसारण मंत्रालय ने कहा है कि अब कंडोम के विज्ञापन रात 10 बजे से लेकर सुबह 6 बजे के बीच ही प्रसारित किए जा सकेंगे.

टीवी चैनलों को एक एडवाइजरी जारी कर मंत्रालय ने कहा कि कंडोम के ऐसे विज्ञापन जो एक खास आयुवर्ग के लोगों के लिए ही हैं और जो बच्चों के देखने लायक नहीं हैं, उनका प्रसारण नहीं किया जाए.

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इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने कहा है कि मौजूदा कॉलेजियम सिस्टम की समीक्षा किए जाने की ज़रूरत है.

उन्होंने दावा किया कि आज़ादी के बाद से देश के सिर्फ़ ढाई सौ-तीन सौ परिवारों के लोग की सुप्रीम कोर्ट के जज बने हैं.

इंडियन एक्सप्रेस की एक अन्य ख़बर के मुताबिक, जयपुर के एक सरकारी स्कूल में दसवीं की परीक्षा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में पूछे गए अंग्रेज़ी के प्रश्नपत्र में कई सारी त्रुटियों से राजस्थान शिक्षा बोर्ड को शर्मसार होना पड़ा है.

नरेंद्र मोदी के बारे में पूछे गए एक सवाल में कई त्रुटियां पाई गईं, मसलन स्पीकर की जगह उन्हें 'स्पोकर' और क्राउड पुलर की जगह 'क्राओड पुलर' लिखा गया है.

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टाइम्स ऑफ़ इंडिया के मुताबिक द लांसेट ग्लोबल हेल्थ मेडिकल जर्नल के शोध में दावा किया गया है कि 2015 में देश में 1.6 करोड़ गर्भपात हुए हैं.

ये आंकड़ा 7 लाख के उस आंकड़े का 22 गुना है जो सरकार लगभग हर साल पेश करती रही है.

खबर के अनुसार, इनमें से 81 प्रतिशत घर में होते हैं यानी इसके लिए महिलाएं घर में ही दवाएं लेती हैं और अस्पताल नहीं जातीं.

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