गुजरात: मतदान ख़त्म, नतीजों का इंतज़ार

  • 14 दिसंबर 2017
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गुजरात विधानसभा की 182 सीटों में से 93 सीटों के लिए गुरुवार को दूसरे और अंतिम चरण का मतदान हुआ.

पहले चरण में 89 सीटों पर 68 फ़ीसदी मतदान हुआ था. पहले चरण की तरह ही दूसरे चरण में भी भाजपा और कांग्रेस के अलावा हार्दिक पटेल का आरक्षण मुद्दा अहम है.

हालांकि, पहले चरण के मुकाबले में दूसरे चरण में पाटीदार फ़ैक्टर वाली सीटें कम हैं.

पहले चरण में सौराष्ट्र और सूरत में इनकी संख्या 25 थीं जबकि इस चरण में ये 17 हैं जो महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी.

अब दूसरे चरण के मतदान में शहरी मतदाताओं का झुकाव किस ओर होगा, यह देखना दिलचस्प होगा.

इसके अलावा पाटीदारों के वर्चस्व वाली सीटों पर कितना मतदान होता है उसपर भी सबकी नज़र बनी रहेगी.

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हार्दिक, जिग्नेश, अल्पेश के लिए अहम

इस चुनाव में गुजरात में पिछले 22 वर्षों से लगातार सत्ता में रहने वाली भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के ख़िलाफ़ असंतोष दिख रहा है.

नरेंद्र मोदी 14 वर्षों तक गुजरात के मुख्यमंत्री रहे. उनके प्रधानमंत्री बनने के बाद से राज्य ने केवल तीन वर्षों के भीतर ही दो मुख्यमंत्री देख लिए.

आरक्षण आंदोलन के अलावा जीएसटी, नोटबंदी, और महंगाई के मुद्दों पर भाजपा को जनता के असंतोष का सामना करना पड़ रहा है.

इसी के चलते हार्दिक पटेल, जिग्नेश मेवाणी, अल्पेश ठाकोर के लिए दूसरे चरण का मतदान महत्वपूर्ण रहेगा.

अहमदाबाद विधानसभा की पांच सीटों समेत सभी 17 सीटों पर पाटीदार फ़ैक्टर की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी.

पाटीदारों के आरक्षण आंदोलन के केंद्र रहे मेहसाणा की सीटों पर भी कितना मतदान होता है उस पर भी सभी की निगाहें टिकी होंगी.

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क्या हैं मुद्दे?

दूसरे चरण के मतदान के लिए लोगों के मुद्दे पुराने ही हैं लेकिन प्रचार के दौरान नेताओं के मुद्दे बदल गए थे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनाव प्रचार की शुरुआत गुजरात से 2022 तक गरीबी हटाने की चर्चा के साथ की थी लेकिन आखिरी दिन सी-प्लेन लॉन्च करने के साथ उन्होंने अपना प्रचार समाप्त किया.

वरिष्ठ पत्रकार अजय उमट कहते हैं, "गरीबी हटाने की बात कह कर वो सी-प्लेन लॉन्च कर रहे हैं. उनके आचरण में ही विरोधाभास दिख रहा है. विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा से पहले ही कांग्रेस के 'विकास पगला गया है' कैम्पेन से भाजपा बौखला गई थी."

भाजपा इसके जवाब में 'मैं हूं विकास, मैं हूं गुजरात' और 'अडीखम गुजरात' (अडिग गुजरात) जैसे कुछ नारों के साथ प्रचार में उतरी. दूसरी ओर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने जीएसटी, नोटबंदी, बेरोजगारी, किसानों को बिजली-पानी, महिला सुरक्षा और व्यापार जैसे मुद्दों पर प्रचार शुरू किए.

राहुल गांधी ने अपने प्रचार का समापन मोदी पर तंज कसते हुए किया. उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी मेरे बारे में कुछ भी कहें, मैं उनके बारे में कुछ भी नहीं कहता.

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क्या कांग्रेस को फायदा होगा?

दूसरे चरण के मतदान पर इस तरह के प्रचार का क्या प्रभाव पड़ेगा इस पर वरिष्ठ पत्रकार आरके मिश्रा कहते हैं, "दूसरे चरण का अधिकांश मतदान शहरी क्षेत्रों में हैं. एक अनुमान के मुताबिक, पहले चरण में ग्रामीण गुजरात ने भाजपा के विरुद्ध वोट किया है. इस लिहाज से दूसरे चरण का मतदान निर्णायक होगा."

वर्तमान स्थिति और आखिरी दिन के प्रचार का लाभ कांग्रेस को होगा कि या नहीं इस पर राजनीतिक विश्लेषक अच्युत याग्निक कहते हैं, "यह पूरी स्थिति कांग्रेस के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है. भाजपा के ख़िलाफ़ जनता की नाराज़गी का लाभ कांग्रेस को मिल सकता है."

उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने शुरू से ही भाजपा को विकास के मुद्दे पर चुनौती दे रखी है. राहुल के भाषणों में शुरू से ही बेरोजगारी का मुद्दा छाया रहा.

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2012 में क्या थी स्थिति?

2012 के चुनाव में कांग्रेस को 40 फ़ीसदी, जबकि भाजपा को 48 फ़ीसदी वोट मिले थे. इससे पहले 2007 की विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को करीब 39 फ़ीसदी और भाजपा को 49 फ़ीसदी वोट मिले.

पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा को 115, कांग्रेस को 61, गुजरात परिवर्तन पार्टी को दो, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को दो, जनता दल यूनाइटेड को एक और निर्दलीय को एक सीट मिली थी.

कांग्रेस के विधायकों और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अमित शाह के इस्तीफ़े के साथ ही राज्य की 15 सीटें खाली हैं, और चुनाव से पहले की स्थिति में भाजपा के पास 120 जबकि कांग्रेस के पास 43 सीटें हैं.

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