गुजरात चुनाव के नतीजों पर क्यों टिकी चीन की नज़र?

  • 15 दिसंबर 2017
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जिस राज्य ने नरेंद्र मोदी को बतौर नेता स्थापित किया, अगले पांच साल के लिए उसकी कमान किसके हाथ में रहेगी, इस बात का फ़ैसला सोमवार दोपहर हो जाएगा.

देश भर की निगाहें इन्हीं नतीजों पर टिकी हैं. गुजरात को लेकर किस कदर दिलचस्पी है, ये इस बात से पता चलता है कि इसी दिन हिमाचल प्रदेश के नतीजे भी आने हैं, लेकिन उसका ज़िक्र ज़रा सा है.

और ऐसा नहीं कि गुजरात पर सिर्फ़ देश की नज़र है. भारत के पड़ोसी देश भी इसमें दिलचस्पी दिखा रहे हैं. गुजरात के चुनाव प्रचार में पाकिस्तान का ज़िक्र आया, लेकिन इनके नतीजों में चीन काफ़ी उत्सुकता दिखा रहा है.

चीन की दिलचस्पी क्यों?

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चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के मुखपत्र 'ग्लोबल टाइम्स' का गुरुवार को छपा लेख इसी तरफ़ इशारा करता है.

इसमें लिखा गया है, ''भारत के गुजरात राज्य में गुरुवार को दूसरे दौर का चुनाव संपन्न हुआ और चीन में कई जानकार इस पर पैनी निगाह टिकाए हैं, जिसके नतीजे सोमवार को आने हैं.''

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''गुजरात चुनाव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सुधारवादी एजेंडे को लेकर भारतीय मतदाताओं के रुख़ की अग्निपरीक्षा है. और भारत के साथ चीन की बढ़ती राजनीतिक नज़दीकियों की वजह से ये चीन के लिए गंभीर चिंता का विषय है.''

पढ़िए, क्या लिखा है 'ग्लोबल टाइम्स' ने

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''मोदी की भारतीय जनता पार्टी गुजरात में चुनावी हार से बचने के लिए गंभीर कोशिश कर रही है. साल 2014 में प्रधानमंत्री बनने से पहले मोदी इसी राज्य में 13 बरस मुख्यमंत्री रहे हैं.''

''मोदी के 'मेक इन इंडिया' जैसे अभियान और जीएसटी जैसे आर्थिक सुधारों को 'गुजरात के विकास मॉडल' को आगे बढ़ाने वाला कहा जाता है जिसके बारे में मोदी ने कहा था कि वो देश में भी इसे लागू करेंगे.''

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''हालांकि नरेंद्र मोदी के सुधारों को दूसरे राजनीतिक दलों और कुछ अर्थशास्त्रियों की आलोचना का भी सामना करना पड़ा लेकिन 'गुजरात मॉडल' की समीक्षा करने में सबसे दक्ष गुजरात की जनता है.''

चीनी कंपनियों पर असर

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''चुनाव के नतीजे जो भी आएं, मोदी के सुधारवादी एजेंडे को लागू करने से जुड़ी जनता की राय पर इसका काफ़ी असर होगा. चीन के निवेश में इज़ाफ़ा हुआ है और साल 2016 में भारत में उसका प्रत्यक्ष निवेश पिछले साल से कहीं ज़्यादा बढ़ा है.''

''भारत के आर्थिक सुधारों से जुड़ी संभावना शियोमी और ओप्पो जैसी भारत में काम करने वाली चीनी कंपनियों से सीधी जुड़ी है.''

''अगर भाजपा, गुजरात चुनावों में धमाकेदार जीत दर्ज करती है तो मोदी सरकार आर्थिक सुधारों को लेकर और आक्रामक होगी और भारत की तरह चीन की कंपनियों को भी बदलाव दिखेंगे.''

अगर भाजपा हारी तो क्या होगा?

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''लेकिन अगर दूसरी तरह से देखें और गुजरात में भाजपा हारती है तो ये उन आर्थिक सुधारों के लिए बड़ा झटका साबित होगा, जो मोदी सरकार ने शुरू किए हैं.''

''ये भी संभव है कि गुजरात में भाजपा की हार का असर दूसरे राज्यों के मतदाताओं पर भी पड़े और किसी बड़े असर से बचने के लिए मोदी के आर्थिक सुधारों को बीच में ही छोड़ दिया जाए.''

''अगर भाजपा गुजरात चुनाव जीतने में कामयाब रहती है लेकिन उसके बहुमत पर असर पड़ता है तो भारत के सुधारों को लेकर संकट के बादल देखने को मिल सकते हैं.''

नतीजों पर नज़र रखने की बात

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''गुजरात में भाजपा की हार की आशंका पर बाज़ार में डर भारत के आर्थिक सुधारों में कमी को रेखांकित करता है.''

''लोगों को इस बात पर संदेह है कि इन सुधारों से देश के छोटे कारोबारियों और आम लोगों को फ़ायदा नहीं मिल रहा. सरकार को रास्ता निकालना चाहिए कि इन सुधारों से आम लोगों का समर्थन मिले.''

''चीन को भाजपा के गुजरात अभियान पर करीबी नज़र रखनी चाहिए. भारत में काम करने वाली कंपनियों को लंबी अवधि में आर्थिक नीतियों में संभावित बदलावों और अगले हफ़्ते नतीजों के ऐलान के बाद भारत के फ़ाइनेंशियल बाज़ारों में उथल-पुथल के लिए तैयार रहना चाहिए.''

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