क्या ब्रांड मोदी में पड़ गई है दरार?

  • 16 दिसंबर 2017
नरेंद्र मोदी इमेज कॉपीरइट Getty Images

अहमदाबाद के एक कैफ़े में बैठे कुछ लोग गपशप कर रहे थे. मैं उनके बीच घुस गया और थोड़ी देर बाद पूछा कि हिन्दू हृदय सम्राट बोलने पर उनके दिमाग़ में किसका नाम सामने आता है तो सभी ने एक आवाज़ में कहा नरेंद्र मोदी का.

ये इसलिए कि मोदी एक ब्रांड हैं. किसी मज़बूत ब्रांड की पहचान उसकी रिकॉल वैल्यू है यानी अगर निरमा कहें तो हम तुरंत इसे वाशिंग पाउडर से जोड़ते हैं.

ब्रांड मोदी की शुरुआत 2002 के बाद से बननी शुरू हुई. प्रधानमंत्री बनने के बाद उनकी विकास पुरुष की छवि बनी. उन्होंने विश्व भर का दौरा किया और भारत की छवि बेहतर करने की कोशिश की. धीरे-धीरे ब्रांड मोदी उनके समर्थकों के बीच ब्रांड इंडिया बन कर साथ जुड़ गया.

लेकिन कैफ़े में मौजूद लोगों ने कहा कि अब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ का नाम भी हिन्दू हृदय सम्राट से जोड़ा जा सकता है.

कार्टून : 'ब्रांड इंडिया' फ़ूड का 'ब्रांड एम्बेसडर'!

हिटलर, मुसोलिनी भी ताकतवर ब्रांड थे: राहुल गांधी

प्लेबैक आपके उपकरण पर नहीं हो पा रहा
कई लोग अब खुलकर उनका विरोध करते दिख रहे हैं.

खुल कर होने लगी है आलोचना

तो क्या गुजरात में ब्रांड मोदी कमज़ोर पड़ता जा रहा है? इसके कई संकेत मिलते हैं.

एक समय था जब गुजरात में नरेंद्र मोदी की आलोचना करना आसान नहीं था. कारण? उनकी ज़बरदस्त लोकप्रियता और अधिकतर गुजरातियों के दिलों में उनकी भारी इज़्ज़त.

मुख्यमंत्री की हैसियत से उनकी तूती बोलती थी. लेकिन आज ऐसा नज़र नहीं आता. इसके उदाहरण कई हैं.

गुजरात के विधानसभा चुनाव के नतीजे कुछ भी हों, अब लोग मोदी की आलोचना खुल कर करने लगे हैं. उनके विरोध में उतरे 24 वर्षीय हार्दिक पटेल तो अपनी सभाओं में मोदी का मज़ाक़ भी उड़ाते हैं और मज़े लेकर उनकी नक़ल करते हैं.

इमेज कॉपीरइट Getty Images

पिछले तीन चुनावों में किसी कांग्रेसी नेता ने चुनावी मुहिम के दौरान मोदी के शहर वडनगर में जाने का साहस नहीं किया था.

इस बार राहुल गाँधी ने वहां एक बड़ी सभा की, यानी उन्होंने मोदी के घर में सेंध मारने की हिम्मत की. पिछले तीन विधानसभा चुनावों के विपरीत इस बार राहुल गाँधी विश्वास से भरे नज़र आए लेकिन प्रधानमंत्री भावनात्मक रूप से अस्थिर और बेकाबू नज़र आए.

इस बार मोदी ने इतनी सभाएं की हैं कि ये सवाल उठने लगा कि कहीं उनका ज़रूरत से ज़्यादा एक्सपोजर तो नहीं हो रहा है?

एक बार शाहरुख़ ख़ान के बारे में भी इसी तरह की बातें कही जा रही थीं. वो अनेक प्रोडक्ट के लिए विज्ञापन कर रहे थे. हर वक़्त टीवी पर कुछ बेचते नज़र आते थे.

तब मैंने उनसे पूछा था कि क्या उनका ज़रूरत से ज़्यादा एक्सपोज़र नहीं हो रहा है? उनका जवाब था, "शाहरुख़ ख़ान एक ब्रांड है. शाहरुख़ ख़ान बिकता है."

नरेंद्र मोदी से आज यही सवाल किया जाए तो उनका जवाब शाहरुख़ ख़ान के जवाब से शायद अलग होगा.

मोदी का जादू बरक़रार

सूफ़ी अनवर शेख़ प्रधानमंत्री मोदी के सियासी करियर पर उस समय से नज़र रखे हुए हैं जब वो एक ब्रांड नहीं बने थे.

वो कहते हैं, "मोदी का मतलब एक ब्रांड, मोदी का मतलब व्यापार, मोदी मीन्स मेक इन इंडिया. इस तरह की पूरी एक ब्रांड थी. लेकिन मुझे दुःख के साथ कहना पड़ रहा है कि अब मोदी मीन्स मज़ाक़ हो गया है."

गुजराती अख़बार सन्देश से जुड़े वरिष्ठ पत्रकार देविंदर पटेल के अनुसार, ब्रांड मोदी कमज़ोर हुआ है लेकिन अब भी ये ब्रांड काफी शक्तिशाली है.

इमेज कॉपीरइट Getty Images

"आज भी नरेंद्र मोदी का जादू गुजरात की प्रजा पर बरक़रार है. थोड़ी सी, हलकी फुल्की सी आंच आई है. ऐसा नहीं है कि जैसे पहले था वैसा ही है."

वो कहते हैं कि आज भी मोदी के पास ऐसी दो चीज़ें हैं जो दूसरे किसी नेता के पास नहीं.

"एक तो नरेंद्र भाई मोदी गुजरात का प्रतिनिधत्व पूरे देश स्तर पर रहे हैं. गुजरात से जाकर वो प्रधानमंत्री बने हैं. दूसरा भारतीय जनता पार्टी के पास नरेंद्र मोदी के अलावा कोई विकल्प नहीं है. आज भी हिंदुस्तान के लोगों में वो हिन्दू ह्रदय सम्राट हैं."

इमेज कॉपीरइट Getty Images

'कोई ब्रांड फीका नहीं पड़ा'

गुजरात में भाजपा के चुनावी उम्मीदवारों की कड़ी आलोचना के तौर पर ये कहा गया कि वो अपने चुनावी क्षेत्र में मोदी की सभाओं के भरोसे जीत की आशा कर रहे थे. जब मैंने यही सवाल भाजपा विधायक और चुनावी उम्मीदवार भूषण भट से किया तो उन्होंने कहा कि एक विधायक के रूप में वो अपनी जनता से पहले से ही जुड़े हैं.

उनके अनुसार, "नरेंद्र भाई मोदी के भाषण से उनकी उम्मीदवारी और भी मज़बूत होगी."

लेकिन क्या वो मानते हैं कि ब्रांड मोदी फीका नज़र आ रहा है? वो बोले, "नहीं. कोई ब्रांड फीका नहीं पड़ा है. उनके काम की वजह से जो जन सुविधा मध्यम वर्ग और ग़रीबों में देनी चाहिए मोदी जी ने सरकार के माध्यम से देने की शुरुआत की है."

उन्होंने आगे कहा, "मोदी जी पहले भी एक ब्रांड थे आज भी एक ब्रांड हैं."

अहमदाबाद के एसके मोदी एक ज़माने में नरेंद्र मोदी से काफी क़रीब थे. वो क्या सोचते हैं?

उनके मुताबिक, "सम्पूर्ण सत्य कुछ नहीं है. सम्पूर्ण असत्य कुछ नहीं है. तो यदि किसी का भी ये पर्सपेक्टिव है कि उनकी ब्रांड फीकी पड़ी है तो ये भी झूठ नहीं है और उनकी ब्रांड क़ायम है वो भी झूठ नहीं है."

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए