इस 'जुगाड़' का कोई जवाब नहीं!

  • 19 दिसंबर 2017
जुगाड़

सेब को अंग्रेज़ी में एपल कहते हैं. गेंद को बॉल बोलते हैं. गधे को डंकी कहते हैं. दौड़ने को अंग्रेज़ी में रनिंग बोलते हैं.

कहने का मतलब ये कि हिंदी कमोबेश सारे लफ़्ज़ों के लिए अंग्रेज़ी में शब्द हैं.

मगर क्या वाक़ई ऐसा है?

अगर ऐसा है तो बताइए जुगाड़ को अंग्रेज़ी में क्या कहेंगे? नहीं मालूम न! क्योंकि जुगाड़ के लिए अंग्रेज़ी में कोई शब्द होता ही नहीं. ये तो ख़ालिस हिंदी, उर्दू और पंजाबी का शब्द है.

हर ज़बान पर उस इलाक़े की छाप होती है, जहां वो बोली जाती है. फिर चाहे वो अंग्रेज़ी हो, हिंदी-उर्दू या फिर स्पेनिश. इस वजह से हर भाषा में कई शब्द ऐसे होते हैं, जो उसी ज़बान में मिलते हैं. उनका कोई तर्जुमा या ट्रांसलेशन वाला विकल्प दूसरी भाषाओं में नहीं होता.

लैंडलाइन की तरह मोबाइल चलाने का जुगाड़

जुगाड़ से 140 चीजें बना चुका है ये शख्स

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Image caption बिहार के पश्चिम चंपारण ज़िले के दोन में लैंडलाइन की तरह मोबाइल चलाने का जुगाड़

जुगाड़ ऐसा ही शब्द है. खालिस हिंदुस्तानी. जिसका किसी और भाषा में विकल्प नहीं मिलता.

जुगाड़ यानी किसी ख़ास ज़रूरत का कामचलाऊ विकल्प. जो फौरी तौर पर तैयार कर लिया जाए. ऑक्सफोर्ड ने इसे अपने शब्दकोश में कुछ दिन पहले ही इसे शामिल तो कर लिया लेकिन इसके लिए अंग्रेज़ी का कोई विशेष शब्द नहीं दिया.

छात्रा अनु्श्री श्रीधर कहती हैं कि जुगाड़ वो हुनर है, जो फौरी ज़रूरत को पूरा करने के लिए तुरंत से कोई चीज़ तैयार करने में काम आता है.

प्लेबैक आपके उपकरण पर नहीं हो पा रहा
'जुगाड़' से दूसरों की ज़िंदगी संवारने वाला शख्स

पंजाब के करनजीत सिंह से जब पूछा गया तो उन्होंने एक क़िस्सा बताया. एक शख़्स के यहां टूटी हुई आधी दीवार घड़ी लटकी हुई थी.

उसने आधी घड़ी वाले हिस्से पर हाथ से ही नंबर लिख दिए थे, ताकि घड़ी की सुइयां चलें, तो उसे सही वक़्त पता चलता रहे.

वहीं अनुश्री श्रीधर अपना तजुर्बा बताती हैं कि वो परिवार समेत कहीं जा रही थीं, तो गाड़ी में सब लोगों के बैठने की जगह नहीं थी.

एक बक्से पर छह लोगों ने जैसे-तैसे बैठने का जुगाड़ कर लिया था.

पिच सुखाने के देसी जुगाड़

Image caption नारियल को निकालने का जुगाड़

जिंदगी को आसान बनाते जुगाड़

सिख लोग अक्सर एक जुगाड़ और करते दिख जाते हैं. वो बाइक चलाते वक़्त अपनी पगड़ी में मोबाइल फंसा लेते हैं. फिर वो मोबाइल पर बतियाते हुए आराम से बाइक भी चलाते रहते हैं.

छात्र सुधांशु कौशिक कहते हैं कि जुगाड़ ऐसा शब्द है जिसको एक शब्द में परिभाषित नहीं किया जा सकता.

छात्र उदितिंदर ठाकुर कहते हैं कि जुगाड़ वो चीज़ है, जो ज़िंदगी की चुनौतियों का सामना करने में मददगार हो.

करनजीत सिंह कहते हैं कि जुगाड़ ज़िंदगी की रोज़मर्रा की मुश्किलात का चलताऊ हल है.

जैसे मुंबई में अक्सर कई जगह दो प्लेट के बीच में सैंडविच फंसाकर उसे आग पर सेंकते हुए लोग दिख जाते हैं.

जुगाड़ एकदम हिंदुस्तानी चीज़ है. जो हमारी सभ्यता में, हमारे समाज में और हमारी रग-रग में बसी हुई है. ये हमारी ज़िंदगी को आसान बनाते हैं. जुगाड़ से हिंदुस्तानी लोग कई चुनौतियों को चुटकियों में निपटा देते हैं.

जुगाड़ का कोई जवाब नहीं.

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