गुजरात चुनावः इन नेताओं और सीटों पर हैं नज़र

  • 18 दिसंबर 2017
गुजरात विधानसभा चुनाव 2017 इमेज कॉपीरइट Getty Images

आज गुजरात विधानसभा चुनाव के नतीजे आ रहे हैं. इस चुनाव में वहां की कुछ सबसे महत्वपूर्ण सीटों पर सबकी निगाहें टिकी रहेंगी जिसकी वजह कुछ नेता और कुछ मुद्दे हैं.

मणिनगर

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Image caption अहमदाबाद की मणिनगर विधानसभा सीट से नरेंद्र मोदी चुनाव लड़ते थे

गुजरात के मुख्यमंत्री रहते नरेंद्र मोदी अहमदाबाद की मणिनगर सीट से विधानसभा पहुंचते थे. उनके प्रधानमंत्री बनने के बाद भी मणिनगर विधानसभा के नतीजों पर सबकी नज़र रहेगी.

नरेंद्र मोदी इस सीट से लगातार तीन बार 2002, 2007 और 2012 में विधायक रहे हैं. इस सीट पर 1990 से लगातार भाजपा का कब्ज़ा रहा है.

नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद 2014 में यहां हुए उपचुनाव में भाजपा के ही उम्मीदवार सुरेशभाई धनजीभाई पटेल जीते. सुरेशभाई ने महज़ 18,037 वोटों से जीत हासिल की जबकि नरेंद्र मोदी 2012 में इसी सीट से 86 हज़ार से भी ज़्यादा वोटों से जीते थे.

मौजूदा चुनाव में भाजपा ने सुरेशभाई को ही फिर से उतारा है जबकि कांग्रेस ने 34 साल की विदेश से पढ़कर आई श्वेता ब्रह्मभट्ट को मौक़ा दिया है.

इस विधानसभा क्षेत्र में कुल 2,52,391 मतदाता हैं जिनमें से 1,62,074 लोगों ने मतदान किया. औसत मतदान प्रतिशत 64.47 था.

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राजकोट पश्चिम

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Image caption गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी राजकोट पश्चिम से प्रत्याशी हैं

गुजरात की राजनीति में राजकोट पश्चिम विधानसभा सीट बेहद महत्वपूर्ण है. इसे भाजपा की सबसे सुरक्षित सीट भी माना जाता है. 1985 से ही इस पर भाजपा काबिज रही है. 2014 में यहां से वर्तमान मुख्यमंत्री विजय रूपाणी विधायक चुने गए.

3.16 लाख मतदाताओं के साथ यह सौराष्ट्र की सबसे बड़ी विधानसभा है. इनमें से ज़्यादातर पाटीदार है जो इस चुनाव में निर्णायक साबित हो सकते हैं. कांग्रेस ने यहां से इंद्रनील राज्यगुरु को मैदान में उतार कर मुक़ाबला दिलचस्प बना दिया है. राज्यगुरु गुजरात चुनाव के सबसे अमीर उम्मीदवारों में से एक हैं.

यह वही सीट है जहां से 2002 में नरेंद्र मोदी ने अपना पहला चुनाव लड़ा था. इस सीट से गुजरात के पूर्व मंत्री और कर्नाटक के वर्तमान राज्यपाल वजूभाई वाला लंबे अर्से तक जीतते रहे हैं.

यहां से 15 उम्मीदवार मैदान में हैं. इस चुनाव में यहां के 67.68 फ़ीसदी मतदाताओं ने ही अपने मताधिकार का उपयोग किया.

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सूरत

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Image caption हार्दिक पटेल

सूरत में 12 विधानसभा सीटें हैं.

साल 2015 के सूरत नगर निगम चुनाव में कांग्रेस को 36 सीटों पर जीत मिली थी. ऐसा 25 साल बाद हुआ था कि कांग्रेस नगर निगम चुनाव में पाटीदारों के दबदबे वाले इलाक़ों में जीत दर्ज करने में कामयाब रही थी.

स्थानीय नेताओं और पाटीदारों का मानना है कि 12 में से कम से कम सात सीटें ऐसी हैं जहां बीजेपी के लिए जीत आसान नहीं होगी. सूरत उत्तर, लिंबायत और कटारगाम जैसे इलाक़ों में कड़ी टक्कर होने की उम्मीद है. यहां की वरच्छा रोड, करंज, कटारगाम, कमरेज और सूरत दक्षिण सीटों पर पाटीदार वोटरों का दबदबा है.

2015 के नगर निगम चुनाव में कांग्रेस ने जिन 22 वॉर्डों में जीत हासिल की थी, उनमें से ज़्यादतर वॉर्ड इन्हीं निर्वाचन क्षेत्रों में हैं.

पाटीदार नेता हार्दिक पटेल ने इन क्षेत्रों में कई विधानसभा रैलियां की हैं.

वरच्छा सीट पर भाजपा के किशोर कनानी और कांग्रेस के धीरूभाई गजेरा आमने सामने हैं. यहां तक़रीबन 63 फ़ीसदी वोट पड़े थे.

मतदाताओं के लिहाज़ से सबसे छोटी विधानसभा सूरत उत्तर पर भाजपा के कांतिभाई बल्लार और कांग्रेस के दिनेशभाई मनुभाई कछाड़िया खड़े हैं. यहां 64.3 फ़ीसदी वोट डाले गए थे.

कामराज सूरत का सबसे बड़ा विधानसभा क्षेत्र है. यहां से भाजपा ने पूर्व कॉर्पोरेटर वीडी झालावाडिया और कांग्रेस ने अशोक जीरावाला को मैदान में उतारा है. यहां तक़रीबन 65 प्रतिशत वोट पड़े थे.

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वडगाम

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Image caption दलित नेता जिग्नेश मेवाणी बनासकांठा ज़िले के वडगाम सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं

गुजरात में उभरी तीन नेताओं की तिकड़ी में से एक जिग्नेश मेवाणी बनासकांठा के वडगाम सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं.

भाजपा की तरफ से यहां विजय चक्रवर्ती मैदान में हैं. इस चुनाव में यहां से 12 प्रत्याशी अपना किस्मत आज़मा रहे हैं. यहां मतदान औसत से अधिक 71.23 फ़ीसदी हुआ.

वडगाम एससी सुरक्षित सीट है. इसे कांग्रेस का गढ़ माना जाता है. 2012 में यहां से कांग्रेस प्रत्याशी मणिलाल वाघेला ने 90 हज़ार वोटों के बड़े अंतर से चुनाव जीता था. इस बार कांग्रेस ने यहां अपना प्रत्याशी नहीं उतारा है.

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विरमगाम

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Image caption डॉक्टर तेजश्री बेन पटेल

उत्तर गुजरात की विरमगाम विधानसभा सीट हार्दिक पटेल और अल्पेश ठाकोर का गृहनगर होने की वजह से काफी अहम है.

इस विधानसभा क्षेत्र में मारुति सुजुकी और होंडा मोटरसाइकिल का प्लांट है.

यहां से डॉक्टर तेजश्री पटेल 2012 में कांग्रेस के टिकट पर विधानसभा पहुंची. हालांकि वो बाद में भाजपा में शामिल हो गयीं. इस बार भाजपा ने उन्हें ही यहां से अपना प्रत्याशी बनाया है.

अल्पेश के फ़ैसले से गुजरात चुनाव हुआ रोमांचक

राधनपुर

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Image caption ओबीसी समुदाय के नेता अल्पेश ठाकोर राधनपुर से कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में मैदान में हैं

राधनपुर सीट पर भाजपा के 62 साल के ओबीसी प्रत्याशी लविंग जी ठाकोर के ख़िलाफ़ अन्य पिछड़ा वर्ग समुदाय के नए नवेले नेता अल्पेश ठाकोर चुनाव लड़ रहे हैं.

42 वर्षीय अल्पेश कांग्रेस के टिकट पर मैदान में हैं. चौथी पास ठाकोर के सामने खड़े अल्पेश 12वीं पास हैं. यहां तक़रीबन 67 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया.

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मांडवी, पोरबंदर, अमरेली

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Image caption कांग्रेस नेता शक्तिसिंह गोहिल मांडवी से प्रत्याशी हैं

ये तीनों सीटें कांग्रेस के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं.

कांग्रेस के महत्वपूर्ण प्रत्याशियों में से एक शक्तिसिंह गोहिल कच्छ जिले के मांडवी से चुनाव लड़ रहे हैं. भाजपा ने यहां से वर्तमान विधायक तारा चंद्र की जगह वीरेंद्र सिंह जडेजा को टिकट दिया. यहां 70.7 फ़ीसदी वोट डाले गए.

पोरबंदर से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अर्जुन मोडवाडिया अपनी किस्मत आज़मा रहे हैं. वहीं भाजपा ने यहां बाबूभाई बोखिरिया को ही उम्मीदवार बनाया है. यहां वोट प्रतिशत 64.34 फ़ीसदी रहा था.

सौराष्ट्र की अमरेली सीट से कांग्रेस ने मौजूदा विधायक परेश धनानी को ही मैदान में उतारा है जबकि भाजपा ने बवकुभाई नाथाभाई उधाड को अपना उम्मीदवार बनाया है. 2012 के विधानसभा चुनावों में परेश धनानी ने भाजपा के दिलीप संघानी को हराया था.

इस चुनाव में यहां 62.51 फ़ीसदी वोट पड़े थे.

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मेहसाणा

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Image caption गुजरात के वर्तमान उपमुख्यमंत्री नितिनभाई पटेल मेहसाणा सीट पर भाजपा प्रत्याशी हैं

पाटीदार आंदोलन के गढ़ रहे मेहसाणा सीट पर गुजरात के उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल चुनाव लड़ रहे हैं.

उन्होंने पहले ही एलान कर दिया था कि वो मेहसाणा से मैदान में उतरेंगे. कांग्रेस ने यहां से जीवाभाई पटेल को उतारा है.

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भावनगर पश्चिम

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Image caption जीतू वघानी

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष जीतू वघानी भावनगर पश्चिम सीट से चुनाव लड़ रहे हैं. कांग्रेस ने यहां से दिलीप सिंह गोहिल को उतारा है. यहां से 10 प्रत्याशी अपना भाग्य आज़मा रहे हैं. यहां 62.08 फ़ीसदी वोट डाले गए थे.

इसके अलावा वलसाड की सीट पर भी सभी की नज़र रहेगी क्योंकि ऐसा माना जाता है कि इस सीट से जो भी प्रत्याशी जीतता है, राज्य में सरकार उसी की पार्टी की बनती है.

वलसाड सीट पर भाजपा से भरत पटेल और कांग्रेस से नरेंद्र टडेल चुनाव लड़ रहे हैं. भरत पटेल ही यहां से वर्तमान विधायक हैं.

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