आख़िर क्या था 2 जी घोटाला और किन किन पर था आरोप?

  • 21 दिसंबर 2017
ए राजा इमेज कॉपीरइट Getty Images
Image caption पूर्व केंद्रीय मंत्री ए राजा

दिल्ली की एक अदालत ने 2 जी घोटाले मामले में जिन 14 लोग और तीन कंपनियों पर आरोप लगा था, उन सबको बरी कर दिया है.

इन लोगों के ख़िलाफ़ धारा 409 के तहत आपराधिक विश्वासघात और धारा 120बी के तहत आपराधिक षडयंत्र के आरोप लगाए गए थे लेकिन अदालत को कोई सबूत नहीं मिला है.

सीबीआई के विशेष जज ओ पी सैनी ने 700 पन्नों के अपने आदेश में आरोपियों पर धोखाधड़ी, घूस लेने और सबूतों से छेड़छाड़ के आरोप लगाए थे लेकिन अदालत के सामने ये आरोप नहीं टिके.

क्या था घोटाला?

अब तक 2 जी घोटाला को भारत का सबसे बड़ा आर्थिक घपला माना जाता था.

ये घोटाला साल 2010 में सामने आया जब भारत के महालेखाकार और नियंत्रक (कैग) ने अपनी एक रिपोर्ट में साल 2008 में किए गए स्पेक्ट्रम आवंटन पर सवाल खड़े किए.

2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में कंपनियों को नीलामी की बजाए पहले आओ और पहले पाओ की नीति पर लाइसेंस दिए गए थे, जिसमें भारत के महालेखाकार और नियंत्रक के अनुसार सरकारी खजाने को अनुमानत एक लाख 76 हजार करोड़ रुपयों का नुक़सान हुआ था.

2जी घोटाला: राजा गवाह बनना चाहते हैं

2जी घोटाला: सुप्रीम कोर्ट निगरानी करेगा

शहरी इलाक़ों का मुद्दा है 2जी घोटाला

इमेज कॉपीरइट Getty Images

आरोप था कि अगर लाइसेंस नीलामी के आधार पर दिए जाते तो ख़जाने को कम से कम एक लाख 76 हज़ार करोड़ रुपए और हासिल हो सकते थे.

हालांकि महालेखाकार के नुक़सान के आंकड़ों पर कई तरह के आरोप थे, लेकिन ये एक बड़ा राजनीतिक विवाद बन गया था और मामले पर देश के सर्वोच्च न्यायालय में याचिका भी दाखिल की गई थी.

भारत में घोटालों के लंबे इतिहास में सबसे बड़ा बताए जाने वाले इस मामले में प्रधानमंत्री कार्यालय और तत्कालीन वित्त मंत्री पी. चिदंबरम पर भी सवाल उठाए गए.

इस मामले में ए. राजा के अलावा मुख्य जांच एजेंसी सीबीआई ने सीधे-सीधे कई और हस्तियों और कंपनियों पर आरोप तय किए थे.

पूर्व दूर संचार मंत्री पर आरोप था कि उन्होंने साल 2001 में तय की गई दरों पर स्पेक्ट्रम बेच दिया जिसमें उनकी पसंदीदा कंपनियों को तरजीह दी गई. क़रीब 15 महीनों तक जेल में रहने के बाद ए. राजा को हाल ही में ज़मानत दी गई.

इमेज कॉपीरइट Getty Images

तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एम. करुणाधि की बेटी कनिमोड़ी को भी मामले में जेल जाना पड़ा था और उन्हें बाद में ज़मानत मिली. 2 जी घोटाले से भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि को भी नुक़सान पहुंचा था.

टू-जी स्पेक्ट्रम घोटाले में ए. राजा के अलावा के राजनीतिक और उद्योग जगत की कई और बड़ी हस्तियों को इस मामले से जुड़े अलग-अलग आरोपों में हिरासत में लिया गया.

इस घोटाले में जिन लोगों के नाम थे

ए. राजा: पूर्व केंद्रीय दूर संचार मंत्री और द्रमुक नेता को इस मामले में पहले तो मंत्री पद से इस्तीफ़ा देना पड़ा, इसके बाद 2011 में इन्हें जेल भी जाना पड़ा. करीब 15 महीने के बाद इन्हें ज़मानत मिली. इन पर आरोप था कि इन्होंने नियम क़ायदों को दरकिनार कर 2जी स्पेक्ट्रम की नीलामी षड्यंत्रपूर्वक की.

सीबीआई के अनुसार इन्होंने 2008 में साल 2001 में तय की गई दरों पर स्पेक्ट्रम बेच दिया और अपनी पसंदीदा कंपनियों को पैसे लेकर ग़लत ढंग से स्पेक्ट्रम आवंटित कर दिया. हालांकि अब राजा बरी कर दिए गए हैं.

इमेज कॉपीरइट Getty Images

कनिमोड़ी: द्रमुक सुप्रीमो एम करुणानिधि की बेटी राज्य सभा सदस्य थीं और इन पर राजा के साथ मिलकर काम करने का आरोप लगा था. आरोप था कि इन्होंने अपने टीवी चैनल के लिए 200 करोड़ रुपयों की रिश्वत डीबी रियलटी के मालिक शाहिद बलवा से ली बदले में उनकी कंपनियों को ए राजा ने ग़लत ढंग से स्पेक्ट्रम दिलाया.

सिद्धार्थ बेहुरा: जब राजा केंद्रीय दूरसंचार मंत्री थे तब सिद्धार्थ बेहुरा दूरसंचार सचिव थे. सीबीआई का आरोप था कि इन्होंने ए. राजा के साथ मिलकर इस घोटाले में काम किया और उनकी मदद की. बेहुरा भी ए राजा के साथ ही दो फ़रवरी 2011 को गिरफ़्तार हुए थे.

आर के चंदोलिया: ए राजा के पूर्व निजी सचिव पर आरोप था कि इन्होंने ए राजा के साथ मिलकर कुछ ऐसी निजी कंपनियों को लाभ दिलाने के लिए षड्यंत्र किया जो इस लायक़ नहीं थीं. चंदोलिया भी बेहुरा और राजा के साथ ही दो फ़रवरी 2011 को गिरफ़्तार हुए थे.

शाहिद बलवा: स्वॉन टेलिकॉम के महाप्रबंधक बलवा पर सीबीआई का आरोप ये था कि उनकी कंपनियों को जायज़ से कहीं कम दामों पर स्पेक्ट्रम आवंटित हुआ. बलवा आठ फ़रवरी 2011 को जेल में बंद किए गए थे.

इमेज कॉपीरइट Getty Images

संजय चंद्रा: यूनिटेक के पूर्व महाप्रबंधक चंद्रा की कंपनी भी इस घोटाले में सीबीआई के अनुसार सबसे बड़े लाभार्थियों में से एक थे. स्पेक्ट्रम लेने के बाद उनकी कंपनी ने स्पेक्ट्रम को विदेशी कंपनियों को ऊँचे दामों पर बेच दिया और मोटा मुनाफ़ा कमाया. चंद्रा को 20 अप्रैल 2011 को गिरफ़्तार किया गया था.

विनोद गोयनका: स्वॉन टेलिकॉम के निदेशक पर सीबीआई ने आरोप लगाया था कि उन्होंने अपने साझीदार शाहिद बलवा के साथ मिलकर आपराधिक षड्यंत्र में भाग लिया था.

गौतम दोषी, सुरेन्द्र पिपारा और हरी नायर: अनिल अंबानी समूह की कम्पनियों के ये तीन शीर्ष अधिकारी थे. इन तीनों पर भी षड्यंत्र में शामिल होने का आरोप था. इन तीनों अधिकारियों को भी 20 अप्रैल 2011 को जेल में बंद किया गया था.

इमेज कॉपीरइट Getty Images

राजीव अग्रवाल: कुसगाँव फ्रूट्स और वेजिटेबल प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक पर आरोप था कि उनकी कंपनी से 200 करोड़ रुपए रिश्वत के लिए करीम मोरानी की कंपनी सिनेयुग को दिए गए जो आख़िरकार करुणानिधि की बेटी कनिमोड़ी तक पहुँच गए. राजीव अग्रवाल 29 मई 2011 को गिरफ़्तार किया गया था.

आसिफ़ बलवा: शाहिद बलवा के भाई कुसगावं फ्रूट्स और वेजीटेबल प्राइवेट लिमिटेड में 50 फ़ीसदी के हिस्सेदार थे. राजीव अग्रवाल के साथ आसिफ़ बलवा को भी 29 मई 2011 को गिरफ़्तार किया गया था.

करीम मोरानी: सिनेयुग मीडिया और एंटरटेनमेंट के निदेशक पर आरोप था कि उन्होंने कुसगावं फ्रूट्स और वेजिटेबल प्राइवेट लिमिटेड से 212 करोड़ रुपए लिए और कनिमोड़ी को 214 रुपये रिश्वत दिए ताकि शहीद बलवा की कंपनियों को ग़लत ढंग से स्पेक्ट्रम आवंटित कर दिया जाए.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए

मिलते-जुलते मुद्दे