नज़रिया: 'असली हिंदू’, 'नकली हिंदू' और योगी का गीत

  • 24 दिसंबर 2017
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403 सदस्यों वाली उत्तर प्रदेश विधानसभा में 325 सीटें पाने वाली भारतीय जनता पार्टी का असर विधानसभा के भीतर विपक्षी सदस्यों पर भी यदि दिखाई पड़ने लगे तो बहुत आश्चर्य नहीं होना चाहिए.

लेकिन जब संन्यासी वेशधारी मुख्यमंत्री अपने आध्यात्मिक जीवन की तमाम वर्जनाओं को तोड़ते हुए विपक्षी सदस्यों पर तंज़ कसने के लिए बॉलीवुड फ़िल्मों की घोर श्रृंगारिक पंक्तियों का उदाहरण पेश करें तो हैरान हुए बिना नहीं रहा जा सकता.

विधानसभा का पिछला सत्र तो सदन के भीतर पाए गए विस्फोटक की बलि चढ़ गया था, भले ही विस्फोटक अभी तक की जांच के मुताबिक़ एक सफ़ेद पाउडर से ज़्यादा कुछ नहीं था, लेकिन 14 दिसंबर से शुरू हुए शीत सत्र में सदस्यों की गर्मी दोनों खेमों यानी सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों में जमकर दिखी.

यूपीकोका विधेयक सरकार ने विपक्ष के तमाम विरोधों के बावजूद विधानसभा में पेश कर दिया, विपक्षी सदस्य बाहर चले गए, फिर भी सदन ने विधेयक को पारित कर दिया. लेकिन विधान परिषद में विपक्षी मज़बूत थे, सो वहां इसे अटकना ही था, लिहाज़ा प्रवर समिति को भेज दिया गया.

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अर्धकुंभ क्या होगा कुंभ?

ठीक इसी तरह सरकार एक और विधेयक लाई है जो कि इलाहाबाद में होने वाले कुंभ मेले और हर साल लगने वाले माघ मेला के संदर्भ में है. सरकार इस विधेयक के ज़रिए एक मेला प्राधिकरण का गठन करने जा रही है.

विपक्ष को इसमें कोई आपत्ति नहीं थी लेकिन अभी तक प्रचलित अर्धकुंभ और कुंभ नाम बदलकर सरकार ने जो नया नामकरण किया है, उससे विपक्ष भड़क गया. अभी तक परंपरा ये थी कि छह साल पर अर्धकुंभ आता था और बारह साल पर कुंभ, लेकिन अब अर्धकुंभ को कुंभ कहा जाएगा और पहले के कुंभ को महाकुंभ.

इस नामकरण पर पहली आपत्ति समाजवादी पार्टी की ओर से आई और कांग्रेस ने उसका जमकर साथ दिया. विपक्ष ने इसे मुद्दा बनाते हुए भारतीय जनता पार्टी की सरकार पर हिंदू धर्म के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगा दिया. फिर क्या था, सत्ता पक्ष और विपक्ष में 'असली हिंदू' और 'नकली हिंदू' को लेकर जमकर विवाद हुआ.

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Image caption समाजवादी पार्टी विधायकों के साथ विपक्षी नेताओं ने किया विरोध

खगोलीय घटनाओं पर नियंत्रण

विधानसभा में विपक्ष के नेता रामगोविंद चौधरी बोले, "शास्त्र, वेद और पुराण की परंपराओं को बदलने का अधिकार किसी को नहीं है. जो कार्य ऋषि मुनि नहीं कर सके, उसे इस सरकार ने कर दिया. यह सनातन धर्म के विनाश पर तुली है. बहुमत के नाम पर सरकार सनातन संस्कृति और हिंदू धर्म को नष्ट कर रही है."

रामगोविंद चौधरी यहीं नहीं रुके, और भी काफी कुछ बोल गए. उन्होंने कहा "कुंभ का आयोजन खगोलीय संयोगों पर निर्भर करता है. रामराज का दावा करने वाली 'महामंडलेश्वर' की सरकार ने लगता है खगोलीय घटनाओं पर नियंत्रण प्राप्त कर लिया है." उन्होंने कहा कि इससे पहले यह प्रयास रावण ने किया था.

रामगोविंद चौधरी के वक्तव्य का सारांश ये रहा कि बीजेपी वाले नकली हिंदू हैं और वो असली हिंदू हैं. रामगोविंद चौधरी का जवाब देने के लिए वैसे तो संसदीय कार्यमंत्री सुरेश खन्ना ने मोर्चा संभाला और कहा कि ऐसा इसलिए किया गया है क्योंकि सनातन धर्म में कहीं भी 'अर्ध' या 'आंशिक' शब्द नहीं है.

यानी सदियों से ये नाम अभी तक चला आ रहा था तो क्या ये ग़ैर सनातनी था? बहरहाल, ये सवाल न तो किसी ने पूछा और न ही सुरेश खन्ना ने ख़ुद से इसकी व्याख्या की. लेकिन रामगोविंद चौधरी के असली और नकली हिंदू वाले सवाल का जवाब दिया मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने.

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Image caption उत्तर प्रदेश विधानसभा

योगी ने बोले गीत के बोल

सिद्धार्थनाथ सिंह ने जवाब कांग्रेस और सपा दोनों को दिया. वो बोले, "जिन लोगों ने कारसेवकों पर गोली चलवाई वह असली हिन्दू नहीं हो सकते हैं. जिस दल ने मंदिर का ताला खुलवाया और फिर बंद करवाया वह तो हिंदू हो ही नहीं सकता."

हंगामा करते हुए सपा और कांग्रेस विधायक सदन में 'हिंदू विरोधी ये सरकार नहीं चलेगी' और 'धर्म विरोधी ये सरकार नहीं चलेगी' जैसे नारे लगाते हुए सदन से बाहर चले गए, शायद ये सोचकर कि उन्हें इस 'धर्म विरुद्ध कृत्य' का भागी न बनना पड़े.

बहरहाल, ये विधायक भी विधानसभा में वैसे ही पारित हुआ जैसे यूपीकोका विधेयक, यानी विपक्ष की मौजूदगी के बिना. यूपीकोका विधेयक के दौरान भी बेहद तल्ख लेकिन दिलचस्प चर्चा हुई. यहां मुख्यमंत्री विपक्ष की आपत्ति पर पूछ बैठे कि जब सरकार दुरुपयोग न होने का भरोसा दे रही है तो आशंका कैसी?

लेकिन अपनी दलील में योगी ने जब फ़िल्म 'अमर प्रेम' का गीत सुनाया, 'सावन जब आग लगाए, उसे कौन बुझाए' तो सब उन्हीं की ओर ही देखते रह गए. सदन के बाहर एक वरिष्ठ पत्रकार की टिप्पणी थी, "असली हिंदू बनने की होड़ को तो बीजेपी के प्रचंड बहुमत का असर मान सकते हैं लेकिन योगी जी पर किसका असर आन पड़ा है?"

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