मालेगांव ब्लास्ट: साध्वी-पुरोहित से मकोका हटा, आरोप नहीं

  • 27 दिसंबर 2017
प्रज्ञा

2008 के मालेगांव ब्लास्ट मामले में साध्वी प्रज्ञा और कर्नल पुरोहित पर मकोका हटा लिया गया है. दोनों पर अब यूएपीए और आईपीसी के तहत मुकदमा चलेगा.

यह फ़ैसला मुंबई की एनआईए कोर्ट ने सुनाया.

इस मामले में ग्यारह अभियुक्तों पर 2010 में मकोका (महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण क़ानून) लगाया गया था जिनमें से श्याम साहू, शिवनारायण और प्रवीण तकालकी को अदालत ने बरी कर दिया.

साध्वी प्रज्ञा और कर्नल पुरोहित समेत सात अभियुक्तों पर अब

  • चरमपंथ के ख़िलाफ़ बनाए गए क़ानून यूएपीए की धारा 16 और 18,
  • और आईपीसी की धारा 120बी (आपराधिक साज़िश),
  • 302 (हत्या),
  • 307 (हत्या की कोशिश)
  • और 326 (इरादतन किसी को नुकसान पहुंचाना) के तहत मामला चलेगा.

कब हुए थे मालेगांव धमाके

महाराष्ट्र के मालेगांव के अंजुमन चौक और भीकू चौक पर 29 सितंबर 2008 को बम धमाके हुए थे. इनमें छह लोगों की मौत हो गई थी और 101 लोग घायल हुए थे. इन धमाकों में एक मोटरसाइकिल इस्तेमाल की गई थी.

इस मामले की शुरुआती जांच महाराष्ट्र आतंकवाद विरोधी दस्ते ने की थी, जो बाद में एनआईए को सौंपी गई थी.

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कौन हैं कर्नल पुरोहित?

मालेगांव ब्लास्ट केस में अभियुक्त बनाए गए कर्नल श्रीकांत पुरोहित का संबंध दक्षिण पंथी संगठन अभिनव भारत से बताया जाता है.

बॉम्बे हाइकोर्ट ने एनआईए की रिपोर्ट के आधार पर कहा था, "पुरोहित वह हैं जिन्होंने हिंदू राष्ट्र के लिए अलहदा संविधान बनाने के साथ, एक अलग भगवा झंडा बनाया. उन्होंने हिंदुओं पर मुस्लिमों के अत्याचार का बदला लेने पर भी विचार-विमर्श किया."

बॉम्बे हाईकोर्ट ने पुरोहित की याचिका को अस्वीकार कर दिया था.

जांच एजेंसियों के मुताबिक, मालेगांव ब्लास्ट को कथित तौर पर अभिनव भारत नामक दक्षिणपंथी संस्था ने अंजाम दिया था.

एनआईए के मुताबिक, पुरोहित ने गुप्त बैठकों में हिस्सा लेकर धमाकों के लिए विस्फ़ोटक तक जुटाने की सहमति दी."

लेकिन बीती 17 अगस्त को कोर्ट के सामने पुरोहित ने ख़ुद के राजनीति का शिकार होने की बात कही थी.

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