कोरेगांव हिंसा: दलित संगठनों का आज महाराष्ट्र बंद

  • 3 जनवरी 2018
हिंसा

महाराष्ट्र में पुणे के नज़दीक कोरेगांव भीमा में दलितों पर हुए कथित हमले के बाद मंगलवार को महाराष्ट्र के कई इलाक़ों में दलित संगठनों ने प्रदर्शन किया.

कोरेगांव भीमा की घटना के 200 साल पूरे होने की खुशी में सोमवार को एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था. इस दौरान अचानक हिंसा भड़क उठी थी. घटना में एक शख्स की मौत हो गई.

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डॉक्टर भीमराव आंबेडकर के पोते और एक्टिविस्ट प्रकाश आंबेडकर सहित आठ संगठनों ने बुधवार को महाराष्ट्र बंद का आह्वान किया है. भारिप बहुजन महासंघ (बीबीएम) के नेता प्रकाश आंबेडकर ने बुधवार को राज्यव्यापी बंद का आह्वान करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने न्यायिक जांच के जो आदेश दिए हैं वो उन्हें मंज़ूर नहीं हैं.

उन्होंने कहा कि इस घटना की जांच के लिए सरकार को बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायधीश से अनुरोध करना चाहिए कि वे किसी सिटिंग जज से घटना की जांच कराएं. इसके साथ ही जिस जज को घटना की जांच की ज़िम्मेदारी मिले उनको सबूत इकट्ठा करने और अपराधियों को दंडित करने की पावर मिलनी चाहिए. उन्होंने कहा कि जांच किसी ग़ैर दलित न्यायाधीश से कराई जानी चाहिए.

तोड़फोड़ और आगजनी

Image caption पुणे में लोगों ने की आगजनी

मंगलवार दोपहर तीन बजे के आसपास मुंबई के चेंबूर, गोवंडी और घाटकोपर इलाक़ों में रास्ता जाम किया गया और पत्थरबाज़ी हुई. इन इलाक़ों में दलित आबादी काफ़ी है. प्रदर्शनकारियों ने आगजनी भी की.

पुणे के पिंपरी में शाम साढ़े पांच बजे के आसपास चक्काजाम शुरू हुआ और कई कारों को आग लगा दी गई. पुणे में मुख्यमंत्री फडणवीस को एक कार्यक्रम में शामिल होना था लेकिन इसे रद्द कर दिया गया.

पुणे ग्रामीण के पुलिस अधीक्षक सुहेज हक़ ने बीबीसी को बताया कि सीसीटीवी फ़ुटेज की जांच की जा रही है.

अब तक अलग-अलग हिस्सों में क़रीब 176 बसों में तोड़फोड़ किए जाने की ख़बर है. मुंबई के चेंबूर और घाटकोपर में तोड़फोड़ और आगजनी की घटना ज़्यादा हुई.

पुलिस ने दो लोगों के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज की है.

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न्यायिक जांच के आदेश

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं. मुख्यमंत्री ने कहा, ''पुणे में कोरेगांव भीमा युद्ध की 200वीं वर्षगांठ समारोह में हिंसा की न्यायिक जांच कराई जाएगी.''

इतिहासकार बताते हैं कि कोरेगांव भीमा वो जगह है जहां 200 साल पहले 1 जनवरी 1818 को 'अछूत' माने जाने वाले लगभग आठ सौ महारों ने चितपावन ब्राह्मण पेशवा बाजीराव द्वितीय के 28 हज़ार सैनिकों को घुटने टिका दिए थे.

ये महार सैनिक ईस्ट इंडिया कंपनी की ओर से लड़े थे और इसी युद्ध के बाद पेशवाओं के राज का अंत हुआ था.

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अचानक शुरू हुआ पथराव

इस बार भी हज़ारों दलित इसमें हिस्सा लेने पहुंचे थे. लेकिन अचानक वहां तोड़फोड़ और पत्थर मारने की घटना शुरू हो गई. इसमें कई लोग घायल हुए. कई गाड़ियों में भी तोड़फोड़ की गई.

घटना में एक व्यक्ति की मौत हो गई है. मुख्यमंत्री फडणवीस ने मृतक के परिवार को 10 लाख देने की घोषणा की है.

साथ ही उन्होंने अपील की है कि सोशल मीडिया पर इस घटना के बारे में फैल रही अफ़वाहों पर जनता ध्यान न दे.

उन्होंने कहा है कि अफ़वाह फैलाने वालों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई की जायेगी.

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बीजेपी पर भड़के राहुल

उधर, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने महाराष्ट्र में कोरेगांव भीमा हिंसा मामले में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी आरएसएस पर सवाल उठाए हैं.

उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी और आरएसएस दलितों का सामाजिक स्तर नीचे ही रखना चाहते हैं.

राहुल गांधी ने मंगलवार को ट्वीट किया, ''भारत के लिये आरएसएस और बीजेपी की फासिस्ट सोच की धुरी ये है कि दलित हमेशा भारतीय समाज के निचले हिस्से में रहें. उना, रोहित वेमुला और अब भीमा-कोरेगांव की घटना इस प्रतिरोध का जीता-जागता उदाहरण हैं.''

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कोरेगांव में हुई घटना के बाद महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में रास्ता जाम कर दिया गया. औरंगाबाद में धारा 144 लागू की गई है.

गोवंडी स्टेशन पर हार्बर लाइन बाधित कर दी गई थी. इस कारण कई लोकल ट्रेनें प्रभावित हुई.

इस बीच, एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार ने आरोप लगाया है कि इस मामले में सरकार की तरफ से सख़्ती बरती गई.

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शरद पवार ने कहा कि राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में काम करने वालों को इस घटना पर राजनीति नहीं करनी चाहिए.

केंद्रीय सामाजिक न्याय और आधिकारिता मंत्री रामदास अठावले ने कहा है कि लोग शांति बनाए रखें. यदि कोई हिंसा भड़काने में शामिल होगा तो उस पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

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