चारा घोटाले में लालू यादव को साढ़े तीन साल की सज़ा

  • 6 जनवरी 2018
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सीबीआई की विशेष अदालत ने लालू प्रसाद यादव को चारा घोटाले के एक मामले में साढ़े तीन साल की सज़ा सुनाई है.

लालू फ़िलहाल रांची की बिरसा मुंडा जेल में हैं.

रांची में मौजूद स्थानीय पत्रकार नीरज सिन्हा के मुताबिक उन्हें ये सज़ा वीडियो कांफ्रेंसिंग के ज़रिए सुनाई गई है. साढ़े तीन साल की सज़ा के अलावा लालू प्रसाद पर पांच लाख रुपये का ज़ुर्माना भी लगाया गया है.

ये सज़ा तीन साल से ज़्यादा की है, लिहाजा उन्हें इसी अदालत से ज़मानत नहीं मिलेगी.

रांची में लालू प्रसाद की पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता प्रभात कुमार ने बताया कि अब वे लोग उच्च न्यायालय में अपील करेंगे.

देवघर कोषागार के इस मामले में लालू को 23 दिसंबर 2017 को दोषी ठहराया गया था.

लालू के अलावा पंद्रह लोग और दोषी क़रार दिए गए थे जिनमें छह दोषियों को सात-सात साल की सजा सुनाई गई है.

यह मामला 1991 से 94 के बीच का है. इस दौरान देवघर कोषागार से अवैध तरीक़े से 84.54 लाख रुपये निकाले गए थे.

मामले में कुल 22 अभियुक्त थे जिनमें से बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री डॉक्टर जगन्नाथ मिश्र समेत छह लोग बरी कर दिए गए थे.

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क्या था मामला?

इस मामले में लालू यादव पर इल्ज़ाम है कि उन्होंने साज़िश रचने वालों को बचाने की कोशिश की.

सीबीआई के मुताबिक़ उस वक़्त राज्य के मुख्यमंत्री रहे लालू ने जांच की फ़ाइलें अपने क़ब्जे में रखी थीं.

इसके अलावा नौकरशाहों की आपत्ति के बावजूद लालू प्रसाद ने तीन अधिकारियों को एक्सटेंशन दिया था. सीबीआई का कहना था कि लालू यादव को ग़बन के बारे में पता था फिर भी उन्होंने इस लूट को नहीं रोका.

शुरू में इस केस में 34 लोगों पर आरोप तय किए गए थे लेकिन इनमें से 11 लोगों की मामले की सुनवाई के दौरान मौत हो गई.

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लालू पर तीन और मामले चल रहे हैं

लालू यादव चारा घोटाले के तीन और मामलों में अभियुक्त हैं जिनकी सुनवाई रांची में सीबीआई की अलग-अलग अदालतों में चल रही है. इनमें से एक और मामले में जल्द ही फ़ैसला आ सकता है.

ग़ौरतलब है कि नवंबर 2014 में झारखंड हाई कोर्ट ने लालू प्रसाद को राहत देते हुए कहा था कि एक मामले में दोषी ठहराए गए एक व्यक्ति के ख़िलाफ़ उन धाराओं से मिलते-जुलते अन्य मामलों में सुनवाई नहीं हो सकती.

इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की जिसे कोर्ट ने मंज़ूर किया और मई 2017 में लालू के ख़िलाफ़ चारा घोटाले के अलग-अलग मामलों में मुकदमा चलाने का आदेश दिया.

सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड हाई कोर्ट के फैसले को रद्द करते हुए कहा कि हर मामले की अलग सुनवाई होनी चाहिए. साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत को इन मामलों में नौ महीने में सुनवाई पूरी करने का निर्देश दिया था.

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Image caption कड़े सुरक्षा इंतज़ाम

चारा घोटाले में कई बार जेल जा चुके हैं लालू

900 करोड़ के गबन वाले चारा घोटाले में एक मामला चाईबासा कोषागार का है. चाईबासा तब अविभाजित बिहार का हिस्सा था. वहां के कोषागार से कथित तौर पर 37.7 करोड़ रुपये अवैध तरीक़े से निकाले गए थे.

इस मामले में तीन अक्तूबर 2013 को रांची की एक सीबीआई अदालत ने लालू यादव को पांच साल की सज़ा सुनाई थी. साथ ही अदालत ने उन्हें 25 लाख का जुर्माना भी अदा करने को कहा था.

दो महीने जेल में रहने के बाद लालू को सुप्रीम कोर्ट से ज़मानत मिल गई लेकिन सज़ायाफ़्ता होने की वजह से वे संसद की सदस्यता गंवा बैठे और चुनाव लड़ने के लिए भी अयोग्य हो गए.

2013 में जब लालू जेल गए थे उस समय झारखंड में झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के साथ उनकी पार्टी सरकार में थी, अब झारखंड में भाजपा की सरकार है.

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