बहन को आज़ाद कराने जब कोठे पर ग्राहक बना भाई

  • 8 जनवरी 2018
पीड़िता इमेज कॉपीरइट Getty Images

बिहार में बेगूसराय ज़िले के कस्बाई इलाके बखरी में एक नौजवान एक दलाल को रुपए देता है. इसके बाद वह एक महिला के साथ कमरे में दाखिल होता है और चंद मिनटों के बाद ही निकल कर लौट जाता है.

फिर कुछ समय बाद वही नौजवान पुलिस के साथ वापस पहुंचता है. इस बार वह उस महिला को देह व्यापार के दलदल से बाहर निकालने आया है. दरअसल वह महिला कोई और नहीं बल्कि उसकी अपनी बहन है.

पहली नजर में ये चौंकाने वाली घटना फ़िल्मी या काल्पनिक लग सकती है लेकिन बुधवार को बखरी में कुछ ऐसा ही हुआ. पुलिस कार्रवाई में दो महिलाओं को देह व्यापार के चंगुल से मुक्त कराया गया.

इनमें से जिनका ऊपर जिक्र है वह बिहार के शिवहर जिले से हैं और दूसरी महिला झारखंड की हैं.

जबरन देह व्यापार में धकेली गई नेपाली औरतों की दास्तां

देह व्यापार के मामले में रात भर चला मुक़दमा

इमेज कॉपीरइट Amit Parmar

परिचित फेरी वाले को देख जगी आस

शिवहर की प्रतिमा (बदला हुआ नाम) ने अपने मायके पहुंचने के बाद बीबीसी को फोन पर बताया, "करीब तीन साल पहले अशोक खलीफा सीतामढ़ी से भगाकर मुझे बखरी लाया और फिर मुझसे यह काम कराने लगा."

बखरी में वह अपने बेटे के साथ रहती थीं. उनके मुताबिक उन्हें बंद करके रखा जाता था. वह कहीं निकल नहीं पाती थीं.

उन्होंने आगे बताया, "करीब दो हफ्ते पहले मेरे यहां एक फेरीवाला आया तो हम उसको देख कर बोले कि हम तुमको पहचान रहे हैं. वह भी बोला कि हम भी तुमको पहचान रहे हैं. इसके बाद हम उनका नंबर लिए और यहां से निकलने के लिए उससे बात करते थे."

दरअसल वह फेरीवाला प्रतिमा के मायके का था.

देह व्यापार पर सख़्ती

'हमें बेहोश कर रेप किया जाता और वीडियो बनाया जाता'

इमेज कॉपीरइट Amit Parmar

मायकेवालों तक पहुंची ख़बर

फेरी वाले ने शिवहर आकर पूरा मामला प्रतिमा के परिवारवालों को बताया जिसके बाद प्रतिमा को आज़ाद कराने उनके मायकेवाले बेगूसराय पहुंचे.

प्रतिमा के भाई मनोज (बदला हुआ नाम) ने उनकी रिहाई की कहानी इन शब्दों में बयान की, "फेरीवाले ने बहन को बता रखा था कि मैं आऊंगा. मैं अशोक खलीफा के पास ग्राहक बनकर पहुंचा. दो सौ रुपये देने के बाद उसने मुझे दो लड़की दिखाई."

"मैंने इशारे में अपनी बहन को चुना. इसके बाद में कमरे में अपनी बहन के साथ करीब पांच मिनट रहा और उससे ये कहकर वहां से निकल गया कि थाने से पुलिस लेकर आता हूं."

इसके बाद प्रतिमा के पिता के द्वारा दर्ज एफ़आईआर पर बखरी थाने की पुलिस ने बुधवार को छापेमारी कर प्रतिमा और एक अन्य महिला को आजाद कराया.

देह व्यापार के सदमे से कैसे उबरती हैं लड़कियां?

'वेश्यावृत्ति छोड़ने के लिए मदद मांगी, मिले कॉन्डोम'

इमेज कॉपीरइट Amit Parmar

आख़िर अपन घर पहुंची पीड़िता

बखरी थानाध्यक्ष शरत कुमार के बीबीसी को बताया, "प्रतिमा की रिहाई के बाद गुरुवार को उनकी मेडिकल जांच कराई गई और शुक्रवार को अदालत में उनका बयान दर्ज कराया गया. इसके के बाद उन्हें उसी दिन उनके माता-पिता के हवाले कर दिया गया."

एफ़आईआर में नामित दो लोगों में से एक नसीमा खातून को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है जबकि दूसरे अशोक खलीफ़ा अभी फरार हैं.

प्रतिमा शुक्रवार की आधी रात को बेगूसराय से अपने मायके शिवहर पहुंच चुकी हैं.

नेपाली लड़कियों की तस्करी भारत, चीन से लेकर अरब तक

माँ-बाप पर बेटी से देह व्यापार कराने का आरोप

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए