एलओसी पर ये घातक खेल क्यों खेल रहे हैं भारत-पाकिस्तान?

  • 1 फरवरी 2018
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जम्मू-कश्मीर में भारत और पाकिस्तान के बीच 776 किलोमीटर का इलाक़ा ऐसा है जिस पर विवाद है. यानी कि इस पर सीमांकन नहीं हुआ है और इसे नियंत्रण रेखा कहा जाता है.

दुनिया में शायद एकमात्र ऐसी जगह है जहाँ भारत और पाकिस्तान के दो लाख से अधिक सैनिक ऊंचे- ऊंचे पहाड़ों के बीच रायफ़लें ताने, मशीनगनों, मोर्टारों और तोपखानों के साथ एक-दूसरे के सामने खड़े हैं.

ये दुनिया की सबसे बड़ी सैन्य जमावड़े वाली जगह है.

साल 2003 में जब पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ ने अलिखित शांति समझौता किया था, उससे पहले वहां सैनिकों के बीच गोलियों और तोपखाने का इस्तेमाल आम बात थी.

ये कथित शांति समझौता इसके होने से ही दबाव में था, लेकिन साल 2013 के बाद दोनों पक्षों ने नियंत्रण रेखा पर घातक खेल खेलना शुरू किया और ट्रॉफियां हासिल करने के लिए दुश्मन सैनिकों को मारना और उनके शरीर के टुकड़े-टुकड़े करने में लिप्त हो गए.

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आरोप-प्रत्यारोप

भारत आरोप लगाता है कि पाकिस्तानी सैनिक अलगाववादी कश्मीरियों और पाकिस्तानी चरमपंथियों की सीमा पर घुसपैठ कराने के लिए संघर्ष विराम का उल्लंघन करते हैं.

भारत दावा करता है कि ये कश्मीरी अलगाववादियों को भारतीय सीमा से पाकिस्तान में प्रवेश कराते हैं और फिर वहाँ पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में उन्हें हथियारों का प्रशिक्षण दिया जाता है, बाद में इन प्रशिक्षित चरमपंथियों को भारतीय सुरक्षा बलों से लड़ने के लिए कश्मीर घाटी में भेजा जाता है.

घुसपैठ कराने के लिए पाकिस्तानी सैनिक भारतीय चौकियों पर अंधाधुंध गोलियां बरसाते हैं. इससे चरमपंथियों के छोटे-छोटे समूहों को नो मैन्स लैंड में भारतीय सीमा को भेदने का मौका मिल जाता है.

भारतीय सेना का कहना है कि साल 2017 में पाकिस्तान ने 860 बार संघर्ष विराम तोड़ा है. नवंबर 2003 के बाद संघर्ष विराम टूटने का ये सबसे बड़ा आंकड़ा है. नए साल में भी सीमा पर गोलियां चलने की घटनाएं जारी हैं.

भारत के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, संघर्ष विराम तोड़ने का ये आंकड़ा पिछले साल की तुलना में दोगुना है. 2016 में संघर्ष विराम तोड़ने की 449 घटनाएं हुईं थीं, जबकि साल 2015 में ये आंकड़ा 405 का रहा था.

पाकिस्तान का दावा इससे उलट है. पाकिस्तान संघर्ष विराम के लिए भारतीय फ़ौजों को कसूरवार ठहराता है. उसका दावा है कि भारतीय सैनिकों ने पिछले साल 1900 से अधिक बार संघर्ष विराम का उल्लंघन किया. उसका कहना है कि इस साल जनवरी में ही अकेले नियंत्रण रेखा पर हिंसा की ऐसी 75 से अधिक घटनाएं हुई हैं.

इस तरह आरोप-प्रत्यारोपों के बीच ये पता लगाना बेहद मुश्किल है कि संघर्ष विराम तोड़ने के लिए असल में कौन ज़िम्मेदार है?

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अकारण गोलीबारी

जब भी नियंत्रण रेखा पर गोलीबारी की घटनाएं होती हैं, तो भारत और पाकिस्तान दोनों पक्षों का बयान होता है कि दुश्मन ने अकारण गोलीबारी शुरू की और जवाब में उनके सैनिकों को भी गोलीबारी करनी पड़ी.

क्योंकि कोई भी निष्पक्ष पर्यवेक्षक नियंत्रण रेखा की निगरानी नहीं करता है (भारत और पाकिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सैन्य पर्यवेक्षक समूह कभी-कभार ही नियंत्रण रेखा का दौरा करता है)- ऐसे में इन दावों की सत्यापित करना नामुमकिन है.

भारत के सेना प्रमुख जनरल बिपिन रात ने 12 जनवरी को स्वीकार किया था कि आतंकवादियों को मदद कर रही पाकिस्तानी सैनिकों को दंडित करने के लिए भारतीय सैनिक संघर्ष विराम का उल्लंघन कर रहे हैं और पाकिस्तानी चौकियों को तबाह कर रहे हैं.

जनरल रावत ने संवाददाताओं से कहा, "इससे पहले, हम नियंत्रण रेखा पर केवल घुसपैठ कर रहे आतंकवादियों को निशाना बनाते थे, लेकिन ये आतंकवादी पाकिस्तान के लिए काम करने वाले हैं. घुसपैठ को समर्थन देने के लिए पाकिस्तान को दर्द देना ज़रूरी है. इसलिए हमने पाकिस्तानी चौकियों को निशाना बनाना शुरू किया है और मैं आपको आश्वस्त कर सकता हूं कि नियंत्रण रेखा पर गोलीबारी के इस आदान-प्रदान में पाकिस्तान को तीन-चार गुना नुकसान हुआ है. यही वजह है कि पाकिस्तान हमसे बार-बार आग्रह कर रहा है कि संघर्षविराम को 2003 के स्तर पर लाया जाए."

भारत के कठोर रुख़ को देखते हुए, सीमा पर झडपें रुकने की संभावना बहुत कम हैं.

जनवरी की शुरुआत में, भारत ने पाकिस्तान के आग्रह को ठुकरा दिया कि नियंत्रण रेखा पर झड़पों को रोकने के लिए दोनों देशों के डायरेक्टर जनरल मिलिट्री ऑपरेशंस यानी डीजीएमओ की बैठक होनी चाहिए.

हालाँकि दोनों देशों के डीजीएमओ लगभग हर हफ्ते हॉटलाइन पर बात करते हैं, लेकिन गंभीर मुद्दों को सुलझाने के लिए उनके बीच मुलाक़ात कभी-कभार ही होती है.

भारत और पाकिस्तान के डीजीएमओ के बीच पिछली बैठक साल 2013 में क्रिसमस की पूर्व संध्या पर वाघा बॉर्डर पर हुई थी. ये बैठक संघर्ष विराम की कई घटनाओं और पाकिस्तानी सैनिकों द्वारा सात भारतीय सैनिकों की हत्या और उनके शरीर को क्षत विक्षत करने की घटना के बाद आयोजित हुई थी.

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भारत की शर्त

इस बार भारतीय सेना प्रमुख ने शर्त रखी है कि शांति तभी संभव है, जब पाकिस्तान घुसपैठ को बढ़ावा देना बंद करे.

जनरल रावत ने कहा, "अगर हम देखेंगे कि नियंत्रण रेखा पर घुसपैठ में कमी आई है तभी हम संघर्षविराम करेंगे, लेकिन तब तक नहीं जब तक कि घुसपैठ का स्तर कम न हो जाए."

क्योंकि पाकिस्तान कश्मीर में घुसपैठ पूरी तरह से रोकेगा इस बात की संभावना बहुत कम है, इसलिए नियंत्रण रेखा पर छोटी-मोटी झड़पें तो होती ही रहेंगी.

दशकों से, दोनों देशों की सेनाओं ने ये अच्छी तरह सीख लिया है कि छोटी-मोटी झड़पों को बड़ी लड़ाई में बदले बिना कैसे इनका जश्न मनाया जाए.

भारत और पाकिस्तान के बीच तीन युद्ध हुए हैं और एक सीमित युद्ध, और ये सभी कश्मीर पर लड़े गए. 1971 के युद्ध के बाद से दोनों देश औपचारिक रूप से संघर्ष विराम की रेखा को नियंत्रण रेखा के रूप में मानने को राज़ी हुए थे.

लेकिन नियंत्रण रेखा पर पूरी तरह शांति कभी भी कायम नहीं हो सकी.

(ये लेखक के निजी विचार हैं)

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