प्रेस रिव्यू: 'मुस्लिम मोहल्लों में पाकिस्तान मुर्दाबाद क्यों?'

  • 30 जनवरी 2018
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टाइम्स ऑफ़ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक बरेली के ज़िलाधिकारी राघवेंद्र विक्रम सिंह की एक फ़ेसबुक पोस्ट सोशल मीडिया पर शेयर की जा रही है.

विक्रम सिंह ने अपनी पोस्ट में कहा है कि मुसलमान इलाक़ों में जाकर पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारा लगाना ट्रेंड क्यों बन गया है?

अपनी पोस्ट में विक्रम सिंह ने कहा था, "अजब रिवाज़ बन गया है. मुस्लिम मोहल्लों में ज़बरदस्ती जलूस ले जाओ और पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारो लगाओ. क्यों भी वो पाकिस्तानी है क्या? यही बरेली में हुआ, फिर पथराव हुआ, मुक़दमे लिखे गए."

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कल्याण सिंह का बयान

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक राजस्थान के राज्यपाल और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह अब वेद पुराणों के साथ-साथ बाइबल और क़ुरान भी पढ़ते हैं.

कल्याण सिंह की पहचान यूपी के उस मुख्यमंत्री के रूप में है जिनके कार्यकाल में बाबरी मस्जिद को तोड़ दिया गया था.

बाबरी मस्जिद गिराए जाने की जांच करने वाले लिब्राहन आयोग ने उनकी भूमिका को संलिप्त पाया था.

इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में अब कल्याण सिंह ने कहा है, "भले ही हम किसी के विचार से सहमत न हो, लेकिन उसको टॉलरेट करने की क्षमता चाहिए. भले ही उसकी विचारधारा को अपनी विचारधारा के तर्कों से काट दें, लेकिन असहिष्णु नहीं होना चाहिए."

कल्याण सिंह का कहना है कि सभी धर्म कुछ न कुछ अच्छा ज़रूर कहते हैं, किसी भी धर्म में नफ़रत के लिए जगह नहीं है.

Image caption कासगंज में तनावपूर्ण शांति है

कासगंज हिंसा

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक वो युवक सामने आ गया है जिसे सोशल मीडिया पर कासगंज हिंसा में मरा हुआ बता दिया गया था.

राहुल उपाध्याय नाम के इस युवक ने कहा है कि हिंसा फैलाने के लिए उनके नाम का इस्तेमाल किया जा रहा है.

कासगंज कोतवाली में पत्रकारों से बात करते हुए राहुल उपाध्याय ने कहा है कि उन्हें कई फ़ोन कॉल आए जिनमें उनके मरे होने की बात कही गई.

पुलिस के मुताबिक राहुल उपाध्याय की मौत की ख़बर को कुछ मीडिया संस्थानों ने भी प्रकाशित कर दिया था.

पुलिस का कहना है कि हिंसा प्रभावित इलाक़े में राहुल उपाध्याय नाम का कोई व्यक्ति नहीं रहता है, बावजूद इसके उसकी मौत की झूठी ख़बर सोशल मीडिया पर फैला दी गई.

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भाजपा को मिला 89 प्रतिशत चंदा

सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी कार्पोरेट चंदादाताओं की पसंदीदा पार्टी बनी हुई है.

हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक साल 2016-17 में राजनीतिक न्यासों के ज़रिए दस राजनीतिक दलों को कुल 235.27 करोड़ रुपये का चंदा दिया गया.

इसमें से 290 करोड़ रुपए का चंदा सिर्फ़ भाजपा को दिया गया.

चुनाव सुधारों के लिए काम करने वाली संस्था एडीआर के इकट्ठा किए गए डाटा के मुताबिक कुल दिए गए चंदे में से 89.22 प्रतिशत रकम अकेले बीजेपी को दी गई है.

जबकि कांग्रेस समेत अन्य राजनीतिक दलों को 35.05 करोड़ रुपये का चंदा दिया गया.

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