मोदी सरकार ने मिडल क्लास को क्या दिया?

  • 1 फरवरी 2018
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साल 2014 से सरकार चला रही भाजपा जब विपक्ष में होती थी तो दावा करती थी कि पांच लाख रुपए तक की कमाई पर कोई टैक्स नहीं लगना चाहिए.

लेकिन 2014 से 2018 आ पहुंचा है और सैलरी क्लास को अब भी ऐसी रियायत का इंतज़ार है, जो सीधे तौर पर उसकी ज़ेब में थोड़ा वज़न बढ़ाए.

देश भर के लोगों पर असर डालने वाले गुड्स एंड सर्विस टैक्स (GST) लागू होने के बाद ये पहला बजट था. ऐसे में उम्मीद थी कि इस बार का बजट कुछ मरहम लगाएगा.

वादे-दावे कहां गए?

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आस थी कि इनकम टैक्स के मोर्चे पर रियायत मिलेगी और मध्य वर्ग को डायरेक्ट टैक्स में भी कुछ राहत दी जाएगी.

चीफ़ इकॉनॉमिक एडवाइज़र ने भी कहा था कि वेतनभोगी और मध्य वर्ग को राहत देने के लिए टैक्स का बोझ घटाना, सरकार का प्रमुख लक्ष्य है.

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लेकिन सारी उम्मीदें धूमिल हो गईं. टैक्सपेयर दिल थामकर अरुण जेटली का बजट सुन रहा था कि कब उसकी आस पूरी होगी. लेकिन नतीजा सिफ़र रहा.

सैलरी क्लास को निराश करते हुए इनकम टैक्स के स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया है.

स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ी लेकिन...

ये ज़रूर है कि उन्हें मिलने वाली स्टैंडर्ड डिडक्शन 15 से बढ़ाकर 40 हज़ार रुपए कर दी गई है, लेकिन इसकी कहानी और गज़ब है.

ये राहत दी गई और बदले में 19,200 रुपए का सालाना ट्रांसपोर्ट अलाउंस और 15,000 रुपए का मेडिकल रिम्बर्समेंट वापस ले ली गई है.

प्रथम दृष्ट्या टैक्स से बचने वाली कमाई पर नफ़े-नुकसान की बात करें तो सिर्फ़ 5800 रुपए का खेल है.

कर्मचारी जिस इनकम टैक्स स्लैब में होगा, बचने वाला पैसा उसी पर निर्भर करेगा. अनुमान के मुताबिक कमाई पर 5 फ़ीसदी टैक्स देने वाले अब 290 रुपए, 20 फ़ीसदी टैक्स दे रहे 1160 रुपए और 30 फ़ीसदी टैक्स दे रहे 1740 रुपए बचा पाएंगे.

एक हाथ दिया, दूजे हाथ लिया?

लेकिन ये बचत भी उड़ती नज़र आएगी क्योंकि 5 लाख रुपए कमाई वालों को छोड़ दें तो सेस 3 से बढ़कर 4 फ़ीसदी होने की वजह से जेब में रहने वाला पैसा बचना मुश्किल होगा.

अलाउंस ख़त्म होने और सेस बढ़ने के कारण 5 लाख रुपए सालाना से ज़्यादा कमाने वालों को पहले की तुलना में ज़्यादा पैसे ही देने होंगे.

बजट के बाद अपनी और अरुण जेटली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट किया, ''सैलरीड वर्ग को दी गई टैक्स राहत के लिए भी मैं वित्त मंत्री जी का आभार व्यक्त करता हूं. एक बार फिर वित्त मंत्री और उनकी टीम को Ease Of Living बढ़ाने वाले इस बजट के लिए हृदय से बधाई.''

राहत के नाम पर क्या मिला?

लेकिन मोदी की ये तारीफ़ और बधाई आम लोगों के गले शायद ही उतरे.

मामूली राहतों की बात करें तो वरिष्ठ नागरिकों के लिए बैंक डिपॉजिट पर ब्याज़ की रियायत बढ़ाकर 50 हज़ार रुपए कर दी गई है.

वित्त मंत्री ने हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम के तहत मिलने वाली कटौती को बढ़ाकर 50 हज़ार रुपए करने का प्रस्ताव किया है.

वरिष्ठ नागरिकों के लिए फ़िक्स्ड डिपॉजिट और पोस्ट ऑफ़िस इंटरेस्ट भी 50 हज़ार रुपए तक छूट के लिए उपलब्ध रहेगा.

80डी बेनेफ़िट बढ़कर 50 हज़ार रुपए हो गए हैं और 80डीडीबी बेनेफ़िट अब 60 हज़ार के बजाय 1 लाख रुपए होगा.

जब मोदी आए-आए थे

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अब ज़रा अतीत खंगाल लिया जाए. नरेंद्र मोदी की अगुवाई में भाजपा प्रचंड बहुमत के साथ साल 2014 में सत्ता में आई थी.

और साल 2014-15 के आम बजट में इनकम टैक्स की छूट सीमा 2 लाख रुपए से बढ़ाकर 2.5 लाख रुपए कर दी गई थी.

60 साल से ज़्यादा के लोगों के लिए ये सीमा 3 लाख रुपए की गई थी. उस समय इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80सी के तहत डिडक्शन लिमिट 50 हज़ार रुपए से बढ़ाकर 1.5 लाख रुपए की गई थी.

होम लोन के ब्याज़ की डिडक्शन लिमिट भी 1.5 लाख रुपए से बढ़ाकर 2 लाख रुपए की गई थी.

फिर 2015 का बजट आया

ये मोदी सरकार का पहला पूर्ण बजट था जिसमें हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम डिडक्शन 15 हज़ार रुपए से बढ़ाकर 25 हज़ार रुपए कर दी गई.

ट्रांसपोर्ट अलाउंस 800 रुपए प्रतिमाह से बढ़ाकर 1600 रुपए प्रतिमाह कर दिया गया. वेल्थ टैक्स हटाया लेकिन 1 करोड़ से ज़्यादा की कमाई पर सरचार्ज 2 फ़ीसदी से बढ़ाकर 12 फ़ीसदी कर दिया गया था.

साल 2015-16 के बजट में जेटली ने सेक्शन 80सीसीडी के तहत नई पेंशम स्कीम में पैसा निवेश करने पर 50 हज़ार रुपए की अतिरिक्त छूट का ऐलान भी किया. टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया.

साल 2016 का बजट

इस बजट में अरुण जेटली ने छोटे करदाताओं को राहत देने की कोशिश की. सेक्शन 87ए के तहत डिडक्शन लिमिट 2 हज़ार रुपए से बढ़ाकर 5 हज़ार प्रतिवर्ष किया गया था.

बजट में उन लोगों को राहत दी गई जिनका अपना मकान नहीं है और कंपनी की तरफ़ से हाउस रेंट अलाउंस भी नहीं मिलता.

इसे सेक्शन 80जीजी के तहत सालाना 24 हज़ार रुपए से बढ़ाकर 60 हज़ार कर दिया गया था.

साल 2017 का बजट

पिछले साल बजट में वित्त मंत्री ने ढाई लाख रुपए से 5 लाख रुपए के बीच टैक्स रेट घटाकर पांच फ़ीसदी कर दिया गया था.

हालांकि सेक्शन 87ए के तहत मिलने वाली छूट 5 हज़ार रुपए से घटाकर ढाई हज़ार कर दी गई थी.

बजट में 3.5 लाख रुपए से ज़्यादा की कमाई वाले करदाता के लिए कोई छूट नहीं दी गई थी.

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