कासगंज ग्राउंड रिपोर्ट: मेरे भाई के लिए मोदी-योगी ही सब कुछ थे- चंदन गु्प्ता की बहन कीर्ति

  • 4 फरवरी 2018
चंदन गुप्ता की मौत का मामला, कासगंज हिंसा, उत्तर प्रदेश

"मेरे भाई के लिए मोदी और योगी ही सब कुछ थे. वो उन्हीं के लिए तो सब कुछ कर रहा था. चुनाव में वो योगी जी को जिताने के लिए दिल जान से लगा हुआ था."

चंदन गुप्ता की बड़ी बहन कीर्ति गुप्ता ऐसा कहते हुए मायूस हो जाती हैं, "योगी जी मुख्यमंत्री बने तो उसने पटाखे फोड़ ख़ुशी मनाई थी."

वो बताती हैं, "लेकिन योगी जी नहीं आए. मेरे भाई की मौत पर वो नहीं आए. उन्हें आना चाहिए था."

"वो मंदिर में जा सकते हैं, वो किसी सम्मेलन के उद्घाटन में जा सकते हैं पर मेरे घर में मातम है तो वो नहीं आए."

26 जनवरी को उत्तर प्रदेश के कासगंज शहर में कुछ युवाओं ने तिरंगा यात्रा निकाली थी और उसमें चंदन गुप्ता भी शामिल थे.

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Image caption चंदन गुप्ता के पिता सुशील गुप्ता

चंदन गुप्ता के घर का हाल

कहा जा रहा है कि इसी तिरंगा यात्रा के दौरान विवाद में चंदन गुप्ता को किसी ने गोली मारी मार दी.

चंदन गुप्ता की मौत में अब तक कई ग़िरफ़्तारियां हुई हैं. पुलिस का कहना है कि मुख्य अभियुक्त सलीम को ग़िरफ़्तार कर लिया गया है.

शनिवार की शाम 6 बजे का वक़्त है. चंदन गुप्ता के घर के बाहर पुलिस का जमावड़ा है. घर में प्रवेश करते ही माला पहनाई चंदन की तस्वीर दिखती है.

तस्वीर के पीछे दीवार पर भारत का राष्ट्रध्वज तिरंगा चिपका है. तस्वीर के सामने दीप जल रहा है. बगल में सुशील गुप्ता बैठे हैं.

सुशील गुप्ता कहते हैं कि उनका बेटा तिरंगा लेकर घर से निकला था और तिरंगे में लिपटकर आया. वो सरकार से अपने बेटे को शहीद का दर्जा देने की मांग कर रहे हैं.

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Image caption चंदन गुप्ता की बहन कीर्ति

राजनीति और देशभक्ति

क्या चंदन के पिता सुशील गुप्ता सरकार से नाराज़ हैं? वो कहते हैं, "नहीं सरकार से कोई नाराज़गी नहीं है." वो खुलकर पुलिस से भी नाराज़गी नहीं जता रहे हैं.

20 साल के चंदन शहर के ही के कॉलेज में बीकॉम थर्ड इयर के स्टूडेंट थे. मैंने चंदन की कॉपी देखने इच्छा ज़ाहिर की. सुशील गुप्ता ने अपनी बेटी कीर्ति गुप्ता को बुलाया.

कीर्ति ने कहा कि उसकी (चंदन की) राइटिंग ठीक नहीं थी. फिर कीर्ति ने कहा कि वो पढ़ने में गंभीर नहीं था. हालांकि कीर्ति कॉपी लेकर आईं.

कीर्ति ग्रेजुएशन के बाद दिल्ली में बैंक जॉब की तैयारी कर रही हैं. उन्होंने कहा कि वो दिल्ली से घर आती थीं तो अपने भाई को अंग्रेज़ी पढ़ाती थीं.

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योगी की जीत पर चंदन का जश्न

कीर्ति बताती हैं, "एक बारी हमलोग साथ बैठे थे तो उसने कहा कि यार आर्मी में जाने का मन करता है. मैंने कहा कि ठीक है तो आर्मी की तैयारी कर लो."

"फिर बाद में याद आया तो उसने कहा कि मेडिकल में पास नहीं हो पाऊंगा. वो गिर गया था और उसका हाथ टूट गया था. फिर उसने सोचा कि देश के लिए और तो कुछ किया ही जा सकता है."

कीर्ति अपने भाई चंदन के राजनीतिक रुझान पर कहती हैं, "वो योगी जी को बहुत मानता था. वोटिंग के दौरान तो उसने जी-जान लगा दिया था. 24 घंटे व्यस्त रहता था."

"उसके लिेए बीजेपी ही सबकुछ थी. उसको योगी जी बहुत अच्छे लगते थे. वो कहता था कि यूपी सिर्फ़ और सिर्फ़ योगी जी को ही आना चाहिए. योगी जी सीएम बने तो उसने जमकर पटाखे फोड़े थे."

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'पॉजिटिव थिंकिंग'

कीर्ति ने अपने भाई के बारे में बताया, "बीजेपी यूपी में आई तो मैं भी ख़ुश हुई कि चलो जो वो चाहता था वो जीत तो गई."

"प्रधानमंत्री मोदी को लेकर तो उसकी बहुत अच्छी सोच थी. वो कहता कि दुनिया में अगर कोई इंसान हो तो मोदी जी जैसा हो. वो इतना अच्छे से देश को चला रहे हैं."

"लेकिन कहीं न कहीं उनके अंडर जो लोग हैं उनसे भ्रष्टाचार आ ही जाता है. मोदी जी भी हर चीज़ को नहीं देख सकते. देश में इतनी बड़ी आबादी है वो किस-किस को देखेंगे."

"मोदी जी को लेकर उसकी क्या मेरी भी पॉजिटिव थिंकिंग है. मोदी जी को लेकर तो आप भी जानते हो कि कैसे हैं."

"लगता है कि एक लीडर है जो अब आया है देश में, जो इंडिया के लिए कुछ कर सकता है."

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Image caption चंदन गुप्ता के घर के बाहर तैनात पुलिस बल

पुलिस की भूमिका

कीर्ति ने बताया कि चंदन को मोदी जी पर पूरा विश्वास था कि जो कुछ भी होगा अच्छा ही होगा.

सुशील गुप्ता की तरह उनकी बेटी कीर्ति गुप्ता पुलिस की भूमिका से संतुष्ट नहीं हैं.

कीर्ति का कहना है कि उनके भाई को जहां तिंरगा यात्रा के दौरान गोली मारी गई वहां से पुलिस स्टेशन काफ़ी नज़दीक है लेकिन पुलिस रोक नहीं पाई.

कीर्ति ने कहा, "पुलिस वहां दो मिनट में पहुंच सकती थी. जब विवाद हुआ तभी पुलिस को सूचित कर दिया गया था."

"यहां पुलिस की पूरी ग़लती थी और मैं इस बात को 100 फ़ीसदी मानती हूं. मेरा भाई 15 अगस्त को भी उसी रास्ते से गया था."

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मुस्लिम मोहल्ले में हंगामा

कीर्ति के मुताबिक़, "इस बार तो सबकुछ जानबूझकर वहां किया गया और तिरंगा यात्रा की राह रोकी गई."

शहर मे कई लोगों का कहना है कि चंदन बजरंग दल से जुड़े थे. हालांकि शहर के बजरंग दल के नेता कौशल साहू इसे ख़ारिज करते हैं.

वो कहते हैं कि चंदन के पिता सुशील गुप्ता हिंदू जागरण मंच से जुड़े रहे हैं.

कौशल साहू का कहना है कि 26 जनवरी को मुस्लिम मोहल्ले में हंगामा हुआ तो उन्होंने ख़ुद ही पुलिस को फ़ोन किया था.

साहू के अनुसार पुलिस ने उसे कहा, "भाई जी आप उधर हैं तो तब तक शांत कराइए हमलोग भी वहां पहुंच रहे हैं."

Image caption पुरेंद्र सोलंकी

शहर में तनाव

कासगंज ज़िला बीजेपी अध्यक्ष पुरेंद्र सोलंकी का कहना है, "चंदन गु्प्ता हमारे किसी संगठन से नहीं जुड़ा था, लेकिन उनके परिवार की हमसे वैचारिक नजदीकी थी."

सोलंकी ने मुख्यमंत्री के चंदन गु्प्ता के घर नहीं जाने पर कहा कि शहर में तनाव को ख़त्म करने के लिए ऐसा हुआ है और वो शहर आएंगे तो ज़रूर उनके घर जाएंगे.

जिस मुस्लिम मोहल्ले के बड्डु नगर में 26 जनवरी को ये सब हुआ था वहां के लोगों का कहना है चंदन गुप्ता को गोली जिसने मारी है उसे वो भी देखना चाहते हैं.

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