आंखों-देखी: कैसा है अंकित के घर का माहौल, क्या कहते हैं लड़की के पड़ोसी?

  • 5 फरवरी 2018
अंकित सक्सेना, पश्चिमी दिल्ली, खयाला, हत्या इमेज कॉपीरइट Ankit Saxena/FACEBOOK
Image caption पश्चिमी दिल्ली के रघुबीर नगर में 23 वर्षीय एक फ़ोटोग्राफ़र अंकित सक्सेना की एक युवती के परिवार के चार सदस्यों के साथ बहस के बाद कथित तौर पर हत्या कर दी गई

सब कुछ वैसा का वैसा है.

फ़रवरी की 14 तारीख़ यानी वैलेंटाइंस डे का इंतज़ार करती लाल रंग के फूलों से सजी दुकानें, सड़क पर दौड़ती गाड़ियां, बच्चों का हाथ पकड़कर उन्हें सड़क पार कराती माँएं और मंदिर से आती कीर्तन की आवाज़...

पश्चिमी दिल्ली के रघुबीर नगर इलाके में घुसने पर शुरू में कुछ ऐसी ही तस्वीर नज़र आती है लेकिन थोड़ा आगे बढ़ने पर ये तस्वीर बदलने लगती है.

जगह-जगह पूरी वर्दी में मुस्तैदी से तैनात सुरक्षाकर्मी, लोगों की भीड़ और माइक-कैमरे के साथ इधर-उधर दौड़ते मीडियाकर्मी दिखाई पड़ते हैं.

दिल्ली में 'हॉरर किलिंग', सांप्रदायिक तनाव

Image caption इस घटना के बाद से पूरे इलाके में भारी पुलिस बल तैनात है

जहां अंकित का घर है...

थोड़ा और क़रीब जाने पर 'अंकित सक्सेना की बर्बर हत्या', 'ऑनर किलिंग', 'मुसलमान' और 'सांप्रदायिक तनाव' जैसे शब्द सुनाई पड़ते हैं.

यहां सबको अंकित सक्सेना के घर का पता मालूम है. वही अंकित सक्सेना जिसकी दो दिन पहले 'चाकू से गला रेतकर सरेआम हत्या कर दी गई थी.'

कई तंग गलियों से गुजरते हुए हम उस गली में पहुंचते हैं जहां अंकित का घर है.

घर के आस-पास की दुकानों के शटर गिरे हुए दिखे और घर के बाहर खड़े कुछ लोगों ने हमसे कहा कि हमारा वहां जाना बेकार है क्योंकि अंकित के पिता अस्थियां विसर्जित करने हरिद्वार गए हैं और मां अस्पताल में भर्ती हैं.

Image caption लड़की का घर, जहां अब ताला लगा हुआ है

क्या हुआ था अंकित के साथ

पश्चिमी दिल्ली के रघुबीर नगर में 23 वर्षीय एक फ़ोटोग्राफ़र अंकित सक्सेना की कथित तौर पर एक युवती के परिवार के चार सदस्यों के साथ बहस के बाद हत्या कर दी गई. वहीं, युवती अंकित का एक मेट्रो स्टेशन के बाहर इंतज़ार कर रही थी.

पुलिस का कहना है कि अंकित सक्सेना के अल्पसंख्यक समुदाय की 20 वर्षीय युवती के साथ प्रेम सम्बन्ध थे.

पुलिस के अनुसार, युवती के पिता, मामा और उसके 16 वर्षीय भाई ने उनके सम्बन्धों को लेकर आपत्ति जताई और उससे दूर रहने को कहा. इसके बाद बहस के बाद युवती के पिता ने सड़क पर ही कथित तौर पर अंकित की गला रेत कर हत्या कर दी. अंकित की दोस्त का घर उनके घर के आस-पास ही था.

Image caption हर थोड़ी-थोड़ी दूर पर मीडिया के कैमरे लगे हुए हैं

क्या कहते हैं रिश्तेदार और पड़ोसी

अंकित के परिजन और पड़ोसी मीडिया से बेहद ख़फ़ा हैं.

पड़ोस की एक महिला ने कहा, "आप सब यहां से जाइए, प्लीज़, हम किसी को नहीं देखना चाहते. अंकित के माता-पिता ने हमें किसी से बात करने से मना किया है."

एक दूसरी महिला ने कहा, "हमने हिंदू-मुस्लिम वाली बात उठाई ही नहीं. ये बातें मीडिया ने उछाली हैं. हमारा तो मीडिया से भरोसा उठ गया है. झगड़ा बढ़ाने के लिए बहुत से लोग आए लेकिन हम अपने बच्चे की मिट्टी खराब नहीं करना चाहते."

Image caption यही वो गली है जो अंकित के घर जाती है

झगड़ा नहीं बढ़ाना...

वहां मौज़ूद एक लड़की के मुताबिक, "हमारे मुहल्ले में कल एक आदमी आया था. कह रहा था, आप एक आवाज़ उठाइए, 100 बंदे खड़े हैं, मस्जिद में चलते हैं. हमने तुरंत फ़ोर्स बुलाई तो वो भागा चला गया."

वो आदमी कौन था? इसके जवाब में सबने कहा, "पता नहीं कौन था वो... उससे पहले मनोज तिवारी (बीजेपी के दिल्ली के अध्यक्ष) यहां आए थे. उनके जाते ही एकदम से आया था. हमें कुछ नहीं मालूम, हमें झगड़ा नहीं बढ़ाना."

ये औरतें रुआंसी होकर बताती हैं, "इतना हंसमुख लड़का था, हमेशा हंसी-मज़ाक करता रहता था. इतना टैलेंटेड था. आप कहीं भी पूछ लो, सब यही कहेंगे जो हम कह रहे हैं."

अधेड़ उम्र के एक शख्स ने बताया, "जिस दिन ये हुआ, उसी दिन वो दोपहर में मेरे पास आया था. मेरे कंधे पर हाथ रखकर हाल पूछा था."

पड़ोसियों ने बताया कि अंकित के माता-पिता पूरी रात रोते रहे और सुबह तक घर से रोने की आवाज़ें आती रहीं.

अंकित की एक रिश्तेदार ने कहा, "अब हम इन्हें अकेले यहां नहीं रहने देंगे. एक ही लड़का था, वो भी चला गया. किसका मुंह देखकर जिएंगे?"

Image caption अंकित के घर के बाहर पड़ोसियों का जमघट लगा हुआ है

शादी का था इंतज़ार...

अंकित के दोस्त बताते हैं कि उसकी दोस्त भी पहले उसी ब्लॉक में रहती थी, जहां अंकित का घर है. वहीं से दोनों के बीच प्यार पनपा फिर क़रीब 3 साल पहले लड़की का परिवार दूसरे ब्लॉक में शिफ़्ट हो गया.

हालांकि उनका नया घर भी ज़्यादा दूर नहीं था. अंकित के कुछ दोस्त उसी गली में रहते थे, जहां लड़की का घर है. वो दोस्तों से तो मिलने जाता था लेकिन कभी लड़की की ओर आंख उठाकर नहीं देखता था.

अंकित के दोस्तों और लड़की के पड़ोसियों का कहना है कि दोनों एक-दूसरे से बहुत प्यार करते थे लेकिन कभी कोई ऐसी हरक़त करते नहीं देखे गए जिस पर दूसरों को आपत्ति हो.

अंकित के साथ उनके प्रैंक वीडियोज़ में काम करने वाले एक दोस्त ने बताया कि वो दोनों अक्सर मेट्रो स्टेशन पर ही मिलते थे. फ़ोन पर खूब बातें करते थे.

''अंकित हमेशा कहता था कि वो उस लड़की को बहुत प्यार करता है और उसी से शादी करेगा. हम लोग उसे सझाने की बहुत कोशिश करते थे कि प्रॉब्लम हो सकती है लेकिन वो बोलता था कि मैं उससे प्यार करता हूं और शादी करूंगा.''

अंकित अपने भविष्य को लेकर बहुत क्लीयर था. उसे मालूम था कि उसे क्या करना है. वो मॉडलिंग करना चाहता था और इसके लिए कोशिश भी कर रहा था.

अंकित के पड़ोसियों का कहना है कि 'वो हमेशा कहता था कि लड़की मेरे पसंद की होगी बाकी आप जैसे चाहो मेरी शादी करा देना.'

पड़ोसी बताते हैं कि वो कहता था 'जब मेरी शादी होगी, मैं डीजे लगवाऊंगा और सबको नाचना पड़ेगा. एक आंटी को बन्ने (शादियों में गाया जाने वाले पारंपरिक गाना) गाने के लिए भी बोला करता था.'

Image caption घटना इन दो दुकानों के सामने हुई लेकिन तब से ये बंद हैं

अंकित के दोस्तों की ज़ुबानी

अंकित के घर के पास मोबाइल की एक दुकान है. सोशल मीडिया पर इसी दुकान के सामने खड़ी उनकी फ़ोटो भी देखने को मिल रही है.

दुकान में जाने पर पता चलता है कि अंकित यहां अक्सर आया करते थे. दुकान में काम करने वाला एक लड़का उनका करीबी दोस्त है.

वो अंकित के यूट्यूब चैनल 'आवारा बॉयज़' के लिए भी काम करता था. दुकान के मालिक से भी उनकी अच्छी जान-पहचान थी.

उन्होंने बताया, "उस दिन दोपहर में अंकित लैपटॉप लेकर यहां आया था. तकरीबन एक घंटे तक रहा, अपने यू-ट्यूब चैनल की कुछ वीडियो एडिट कर रहा था. शाम में जब ये झगड़ा हुआ, उसके कुछ मिनट पहले मेरी ही दुकान के सामने खड़े होकर फ़ोन पर बात कर रहा था."

दुकान के मालिक ने हमें सीसीटीवी फ़ुटेज भी दिखाए. हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि वो ये फ़ुटेज किसी को नहीं दे सकते क्योंकि पुलिस ने उन्हें ऐसा करने से मना किया है.

फुटेज़ में देखा जा सकता है कि अंकित रात आठ बजे के लगभग दुकान के बाहर चहलकदमी कर रहा है और फ़ोन पर बात कर रहा है.

दुकान मालिक ने बताया, "मीडिया में ख़बरें आ रही हैं कि लड़की दो दिन से लापता थी. ऐसा कुछ नहीं है, वो उसी दिन शाम को बाहर निकली थी और उसे वापस लौटने में देर हुई तो उसके माता-पिता, भाई और मामा ने अंकित को बीच सड़क पर रोक लिया."

Image caption यही वो जगह है जहां अंकित ने आख़िरी सांसें लीं

बहस होने लगी...

दुकान मालिक के मुताबिक़, "अंकित से लड़की के परिवार की बहस होने लगी. वो उसे पकड़कर मारने लगे तभी किसी ने अंकित के घर पर ख़बर कर दी और उसके माता-पिता ने आकर बीच-बचाव करने की कोशिश की. मैंने भी झगड़ा शांत करने की कोशिश की."

"अंकित ने कहा कि अंकल आप पुलिस थाने चलिए, वो मेरे साथ नहीं है. हमने भी उन्हें पुलिस को बुलाने को कहा. इसके बाद मामला थोड़ा शांत हो गया और दोनों पक्ष अलग-अलग होकर खड़े हो गए. मैं अंकित को लेकर वापस दुकान में आ गया."

दुकान मालिक ने हमें जो फ़ुटेज दिखाई थी वो उसी समय की थी जहाँ अंकित दुकान के बाहर फ़ोन पर बात करता दिखा था. कुछ समय बाद अंकित वहाँ से चला गया.

दुकान मालिक ने आगे का घटनाक्रम ख़ुद तो नहीं देखा मगर आस-पास के जानने वालों से मिली जानकारी के आधार पर दावा करते हैं कि 'उसके बाद अंकित को किसी ने आकर कहा कि लड़की की मां ने उसकी मां को धक्का दे दिया है और वो गिर गई हैं. अंकित दौड़ता हुआ उधर गया और अपनी मां को उठाने के लिए झुका.'

उनका दावा है कि 'तभी लड़की के भाई और मामा ने उसकी (अंकित) बाँहें पकड़ लीं और उसके पिता ने उसके गले में कसाई वाला छुरा भोंक दिया.'

ये ख़बर मिलते ही कुछ और लोगों के साथ दुकान मालिक घटनास्थल की ओर भागे.

Image caption घटनास्थल के सामने की बिल्डिंग

क्या लोगों ने नहीं बचाया?

दुकान मालिक का कहना है कि अंकित को धोखे से मारा गया. वो कहते हैं, "उसे पीछे से पकड़कर मारा गया. सामने आते तो अंकित चार लोगों पर भारी पड़ता. उस वक़्त इतना ख़ून बह रहा था कि पूछिए मत..."

उनके मुताबिक, "लड़की के लिए अंकित से अच्छा लड़का और कोई हो ही नहीं सकता था. उसके मां-बाप भी अंकित से अच्छा लड़का नहीं ढूंढ़ पाते. हमें ऐसा बिल्कुल अंदेशा नहीं था कि अंकित की जान को ख़तरा है, वरना हम पुलिस सिक्योरिटी मांगते."

पश्चिमी दिल्ली के डीसीपी विजय कुमार सिंह ने बताया कि लड़की का परिवार फ़िलहाल पुलिस हिरासत में है और लड़की को नारी निकेतन भेज दिया गया है.

Image caption लड़की के घर के रास्ते पर भी पुलिस तैनात है

लड़की का घर

लड़की का घर अंकित के घर से ज़्यादा दूर नहीं है. गली के आखिर में तीसरे माले पर उनका घर है जहां हरे रंग का चमकता झंडा दिखाई देता है. घर पर ताला लगा हुआ था और पड़ोसियों ने बताया कि वहां कोई नहीं है.

छत पर खड़ी एक लड़की ने कहा, "ये बहुत ही अच्छे लोग थे. हम कुछ ही दिन पहले यहां शिफ़्ट हुए हैं. सबने हमारी बहुत मदद की. मुझे भरोसा ही नहीं हो रहा कि ये ऐसा कर सकते हैं."

एक और पड़ोसी महिला ने कहा, "अंकित और लड़की का अफ़ेयर था लेकिन दोनों को किसी ने साथ नहीं देखा. दोनों बेहद शालीन बच्चे थे."

वो एक लंबी सांस लेकर कहती हैं, "जो हुआ उससे किसी का फ़ायदा नहीं हुआ. दो परिवार बर्बाद हो गए. काश! दोनों की शादी हो जाती. अब लड़की का परिवार यहां आएगा भी तो हम उन्हें रहने नहीं देंगे. हम अपने बच्चों को ख़तरे में नहीं डाल सकते."

Image caption लड़की के पड़ोसी अब भी इस घटना पर यकीन नहीं कर पा रहे

चलते-चलते हमारा ध्यान उस घर की छत पर गया, जिस पर हरा झंडा लहरा रहा था. उस घर की अरगनी (कपड़े फैलाने वाला तार) उस बालकनी के छज्जे से बंधी थी, जहां तुलसी का पौधा लगा हुआ था.

उस अरगनी पर 'असलम का कुर्ता' और 'सोनम की ओढ़नी' साथ सूख रही थी.

हमें अंकित के रिश्तेदारों की बातें याद आईं जिन्होंने हमसे कहा था, "ये हिंदू-मुसलमान का मामला नहीं है, बस इंसाफ़ और नाइंसाफ़ी का है..."

Image caption लोगों को घटना पर दुख है लेकिन किसी धर्म विशेष से शिकायत नहीं

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