भारत का देसी ओलंपिक, जहां होते हैं अनूठे खेल

  • 6 फरवरी 2018
Image caption सालाना होने वाले ग्रामीण खेल पंजाब के लुधियाना ज़िले के किला रायपुर में शुरू हो गए हैं.

लुधियाना ज़िले का गांव किला रायपुर अपने सालाना खेल मेले के लिए ख़ास पहचान रखता है.

साल 1933 में शुरु हुए इस खेल मेले को ग्रामीण ओलंपिक भी कहा जाता है. ओलंपिक में शामिल कुछ खेलों की स्पर्धाएं तो यहां होती ही हैं, कुछ ऐसे खेल भी हैं जो ग्रामीण अंचलों में ही खेले जाते हैं.

इन स्पर्धाओं को कई बार सर्कस या स्टंट गेम्स भी कहा जाता है. इनमें लोग अपनी व्यक्तिगत प्रस्तुतियां देते हैं.

यहां एक ओर एथेलेटिक्स, कबड्डी, हॉकी के मुक़ाबले होते हैं तो दूसरी ओर ट्रैक्टरों, ऊंटों और हाथियों की दौड़ें.

कुछ साल पहले तक यहां की सबसे मशहूर स्पर्धा बैलगाड़ी दौड़ हुआ करती थी. लेकिन सुप्रीम कोर्ट की ओर से रोक लगा दिए जाने के बाद इस बार बैलगाड़ी दौड़ नहीं हो रही है.

लेकिन किला रायपुर ग्रामीण ओलंपिक खेलों का लोगो अब भी बैलगाड़ी ही है.

यहां होने वाले कई खेल ओलंपिक खेलों जैसे नहीं हैं लेकिन यहां की कुछ परंपराएं ओलंपिक से ज़रूर मिलती हैं.

उदाहरण के तौर पर मैदान के किनारे उन सभी देशों के झंडे लगाए जाते हैं जो ओलंपिक खेलों में हिस्सा लेते हैं.

किला रायपुर में खेलों के अलावा कई तरह की नृत्य प्रस्तुतियां भी होती हैं.

यहां प्रस्तुति देने वालों के साथ आम लोगों का झूम उठना भी कोई नई बात नहीं है.

यहां भंगड़ा भी आयोजित होता है. भंगड़ा मर्दों का नाच है लेकिन यहां इसमें औरतें भी ज़ोर-शोर से शामिल होती हैं.

इस खेल मेले की एक ख़ासियत ये भी है कि यहां विकलांग भी अपनी कला का प्रदर्शन करते हैं.

अनूठे करतब दिखाने और देखने के लिए लोग दूर-दूर से यहां पहुंचते हैं.

किला रायपुर में इस बार बैलगाड़ियां तो नहीं आ सकी लेकिन ऊंट और हाथी खूब सज-धजकर पहुंचे.

ट्राइसिकल दौड़, टायर उठाने का मुक़ाबला, ट्रॉली को जल्द से जल्द भर देना जैसे मुक़ाबले भी यहां होते हैं.

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