अमित शाह के पहले राज्यसभा भाषण की 20 अहम बातें

  • 5 फरवरी 2018
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भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने बतौर राज्यसभा सांसद संसद के उच्च सदन में अपना पहला भाषण दिया.

क़रीब सवा घंटे के भाषण में उन्होंने केंद्र सरकार की उपलब्धियों का बखान किया और विपक्षी दल कांग्रेस पर प्रहार करने से भी वह नहीं चूके.

पढ़िए उन्होंने क्या-क्या कहा:

'50 करोड़ लोगों को बीमा देने का साहस'

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1. आज़ादी के बाद से पहली बार एक ग़ैरकांग्रेसी दल को जनता ने पूर्ण बहुमत दिया और यह नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली भाजपा सरकार थी. पूर्ण बहुमत मिलने के बाद भी हमने अपने एनडीए के सदस्यों के साथ मिलकर सरकार बनाई.

2. सरकार ने जब कामकाज संभाला तो सरकार के पास विरासत में क्या था? जिस प्रकार का गड्ढा था, वो गड्ढा भरने में ही सरकार का बहुत सारा समय गया है और गड्ढा भरने के बाद उपलब्धियों को एक अलग नज़रिए से देखा जाना चाहिए.

3. अभी मैं चिदंबरम साहब का ट्वीट पढ़ रहा था कि 'मुद्रा बैंक के साथ किसी ने पकौड़े का ठेला लगा दिया, इसको रोज़गारी कहते हैं?' हां, मैं मानता हूं कि बेरोज़गारी से अच्छा है कि कोई युवा मेहनत-मज़दूरी करके पकौड़ा बनाए. उसकी तुलना आप भिक्षुक से करेंगे? पकौड़ा बनाना कोई शर्म की बात नहीं है, उसकी भिक्षुक के साथ तुलना करना शर्म की बात है. उसकी दूसरी पीढ़ी आगे आएगी तो उद्योगपति बनेगी. कोई चाय वाले का बेटा आज प्रधानमंत्री बनकर सदन में बैठा है.

4. पूरी दुनिया में जितने भी लोकतंत्र हैं, उन सबकी योजनाओं को कोई खंगालकर देख ले. 50 करोड़ लोगों को पांच लाख की बीमा सुरक्षा देना, किसी भी सरकार में ये साहस नहीं है. इसीलिए 'आयुष्मान भारत' को अब 'नमो हेल्थकेयर' के नाम से ये जनता जानेगी.

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'कर न देने के लिए उकसा रही कांग्रेस'

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Image caption कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने जीएसटी को 'गब्बर सिंह टैक्स' कहा था

5. बीजेपी ने कभी भी जीएसटी का विरोध नहीं किया था. इसके तरीक़ों का विरोध किया था. यूपीए ये कर सुधार लेकर आई. सेस घटाने से राज्यों को नुकसान हुआ, वो यूपीए को चुकाना था, पर नहीं चुकाया. 37 हज़ार करोड़ एनडीए ने चुकाया.

6. सर्वानुमत से जीएसटी का फ़ैसला हुआ और नाम क्या दिया, 'गब्बर सिंह टैक्स'. क़ानून से बना हुआ टैक्स वसूली है क्या. जो लोग इसे गब्बर सिंह टैक्स कह रहे हैं. ये टैक्स जाता कहां है- 'वन रैंक वन पेंशन' के लिए, ग़रीब को उज्ज्वला देने में, सौभाग्य योजना के तहत ग़रीब को बिजली देने के लिए. लोगों को कर न देने के लिए उकसाना, ये कोई अच्छी बात है क्या. आज हम आप हैं, कल आप भी आ सकते हो. हमारी मानसिकता ऐसी नहीं है कि हमारा ही शासन हमेशा रहेगा. 55 साल आप भी रहे हो. कुछ मुद्दे दलगत राजनीति से आगे बढ़कर होते हैं.

7. देश की सुरक्षा किसी भी देश के लिए बहुत महत्वपूर्ण होती है. मगर देश की सुरक्षा तब तक ठीक से नहीं हो सकती, जब तक उसका फौजी ख़ुद को सुरक्षित समझे. देश के जवान चालीस साल से वन रैंक वन पेंशन की मांग करते थे. अनेक सरकारें आईं, किसी ने इसे नहीं छुआ. किसी ने किया भी तो सौ करोड़ का टोकन बजट में प्रस्ताव करके जवानों को झांसा देने का काम किया. हमारी सरकार ने वन रैंक वन पेंशन के लिए एक हज़ार करोड़ रुपये दिया है, इससे उनका हौसला बढ़ा है.

8. देश में कई बार आतंकी हमले हुए और बहुत सारे जवान हताहत हुए. मगर किसी ने इसका जवाब देना उचित नहीं समझा. एक दिन तड़के 12 जवानों को ज़िंदा जला दिया गया. दस दिन के अंदर अपनी दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति का परिचय देते हुए सर्जिकल स्ट्राइक का फ़ैसला किया और उसे अंजाम दिया. उसके बाद दुनिया में भारत को देखने का नज़रिया बदल गया.

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'35 साल में आज सबसे सुरक्षित है कश्मीर'

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9. जब हम सरकार में आए तो तीनों सेनाओं का आधुनिकीकरण लगभग ठप्प पड़ा था. हमने इसको आगे बढ़ाया है. संचार व्यवस्था को भी बेहतर बना रहे हैं. सुरक्षा बलों का आधुनिकीकरण भी बीजेपी के साथ जुड़ा हुआ शब्द है.

10. हमारे देश के लिए कश्मीर बहुत अहम मसला है. ऐसी चर्चाएं चलने लगी थीं कि कहीं कश्मीर हमारे हाथ से चला तो नहीं जाएगा. लेकिन आज मैं कह सकता हूं कि कश्मीर बीते पैंतीस साल में सबसे ज़्यादा सुरक्षित और शांत है. विदेश से पैसा लेकर आतंकवाद फैलाने वाले सारे लोग जेल में हैं.

11. पिछड़ा वर्ग आयोग को हमने संवैधानिक मान्यता दी है, लेकिन राज्यसभा में हमारा बहुमत नहीं है. कांग्रेस ने विरोध किया. (इस पर कांग्रेस सदस्यों ने आपत्ति जताते हुए कहा कि उन्होंने विरोध नहीं किया, संशोधन की बात कही.) मैंने विरोध शब्द का इस्तेमाल इसलिए किया क्योंकि आपके विरोध का तरीक़ा बदलने से विरोध बदल नहीं जाएगा.

12. ट्रिपल तलाक को देश की अलग-अलग अदालतों में चुनौती दी गई. ऐसा नहीं है कि अदालत ने पहली बार फैसला किया है. शाह बानो के केस में कोर्ट ने फैसला किया था, लेकिन कानून बनाकर उसे बदलने का काम कांग्रेस सरकार ने किया था. ट्रिपल तलाक पर भी आपने विरोध किया. अभी आप खड़े होकर कहोगे कि आपने विरोध नहीं किया. आपके विरोध का तरीका अलग है, लेकिन आपने विरोध ही किया. मैं तो आज भी कहता हूं कि विरोध नहीं करते हैं तो हम कल भी लेकर आ सकते हैं. हमें क्या आपत्ति है?

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'डीबीटी से बचा 57 हज़ार करोड़'

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13. डायरेब्ट बेनेफ़िट ट्रांसफ़र के कारण हर साल 57 हज़ार करोड़ रुपये सरकार का बचा है. कहां जाता था ये पैसा? मैं नहीं कहता कि कोई एक आदमी खा जाता था. लेकिन व्यवस्था के छिद्रों के कारण लोगों की गाढ़ी कमाई का पैसा ऐसे लोग ले जाते थे जिनका अधिकार नहीं था.

14. कई चीज़ें हैं जिससे देश का गौरव बढ़ा है. पेरिस समझौते में भारत की जो भूमिका रही, उसने पूरी दुनिया में भारत को गौरव दिलाया है. दावोस में प्रधानमंत्री जी का उद्घाटन भाषण हर भारतीय के लिए गौरव का विषय है. प्रधानमंत्री जी ने बहुत विनम्रता से किसी को भी नीचा दिखाए बग़ैर भारत कितना बड़ा है, यह बताने का काम किया है. यह देश को दुनिया में गौरव देने वाली घटना है.

15. अंतरिक्ष में एक साथ 104 उपग्रह छोड़कर इसरो ने एक रिकॉर्ड बनाया है. मैं मानता हूं कि इससे देश के सोचने का स्केल बदला है. इस 26 जनवरी को दस के दस आसियान देशों के राष्ट्राध्यक्षों का समारोह में होना बड़ी उपलब्धि है.

16. 12 लाख करोड़ के घपले-घोटाले के बाद हमारी सरकार बनी. साढ़े तीन साल हो गई, लेकिन हमारे विरोधी भी हम पर भ्रष्टाचार का एक भी आरोप नहीं लगा सके हैं.

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'तीन नासूर ख़त्म किए मोदी सरकार ने'

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17. काला धन के ख़िलाफ़ एक सोची समझी रणनीति के तहत एक बड़ी लड़ाई लड़ी गई है. एसआईटी बनाने का काम हमने किया. सारी सूचनाएं उन्हें दे दी गईं. बेनामी कानून समेत कई कानून बनाए. एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहमति बनाने की कोशिश की. नोटबंदी के कारण भी काले धन पर बड़ा प्रहार हुआ है और तीन लाख से ज़्यादा शेल कंपनियों को बंद करने का काम किया है.

18. सरकार ने किसी द्वंद्व में फंसे बिना यह तय कर दिया है कि किसानों का भी विकास हो सकता है, उद्योगों का भी विकास हो सकता है. अनेक प्रकार के द्वंद्वों से देश को बाहर निकालने का काम इस सरकार ने किया है.

19. लोकतंत्र में सरकार ठीक से चली या नहीं, इसका पैमाना जनादेश ही हो सकता है. 2014 के बाद से जहां-जहां चुनाव हुए, अधिकांश राज्यों में भाजपा की सरकार बनी. 1965 के बाद एक भी कांग्रेस सरकार ऐसी नहीं है जो 27 साल के लिए शासन में रही हो.

20. तीन नासूर- वंशवाद जातिवाद और तुष्टीकरण. उत्तर प्रदेश और गुजरात चुनावों के बाद मैं भरोसे से कह सकता हूं कि देश के लोकतंत्र को इन अभिशापों से मुक्त करने का काम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने किया है.

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