क्या वाक़ई माओवादियों की उल्टी गिनती शुरू हो गई है?

  • 5 फरवरी 2018
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Image caption बस्तर में पिछले कुछ दिनों में हिंसा की कई घटनाएं हुई हैं

बस्तर में बीते कुछ दिनों से माओवादियों के असर वाले इलाक़ों में हिंसा की घटनाएं अचानक बढ़ गई हैं जिससे इलाक़े के लोगों में तनाव बना हुआ है.

तीन दिन से चल रही हिंसा के दौरान गाड़ियों को जलाने, मालगाड़ी के डिब्बों को पटरी से उतारने और हत्याओं की ख़बरें सामने आई हैं.

सोमवार को माओवादियों ने दंडकारण्य बंद बुलाया जिसका अंदर के इलाक़ों में ख़ासा असर देखने को मिला.

बस्तर, बीजापुर, सुकमा, दंतेवाड़ा, नारायणपुर जैसे ज़िलों में मुख्यालयों को छोड़कर ज़्यादातर इलाक़ों में बसों के पहिये थमे रहे.

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Image caption दंतेवाड़ा के आईजी ने कहा कि माओवादी एक तरफ़ तो विकास न होने का रोना रोते हैं और दूसरी तरफ़ विकास के काम में बाधा डालते हैं

सोमवार को माओवादियों ने दंडकारण्य बंद रखा

कई राजमार्गों पर यातायात पूरी तरह से बंद रहा.

केके रेलमार्ग पर ट्रेनों की आवाजाही रोक दी गई.

जगह-जगह माओवादियों ने या तो सड़कों को काट दिया या उन पर पेड़ काट कर डाल दिए.

नारायणपुर-ओरछा मार्ग पर माओवादियों ने सड़क बनाने में लगी कुछ गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया.

दंतेवाड़ा के आईजी सुंदरराज पी का कहना है कि एक तरफ माओवादी विकास का रोना रोते हैं और दूसरी ओर जब विकास की प्रक्रिया शुरु की जाती है तो वे उसे रोकते हैं.

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Image caption संदिग्ध माओवादियों ने कई ट्रक, ट्रैक्टर और मिक्सर मशीनों को आग लगा दी

'यह माओवादियों की हताशा दिखाता है'

हालिया हिंसा की सभी घटनाओं के लिए माओवादियों को ज़िम्मेदार ठहराते हुए आईजी सुंदरराज पी ने कहा कि, "माओवादियों की स्मॉल एक्शन टीम ने ऐसी घटनाओं को अंजाम दिया है और ज़्यादातर मामलों में जन मिलिशिया के शामिल होने का अनुमान है. माओवादियों ने इन वारदातों को ऐसी जगहों पर अंजाम दिया है, जहां घटनास्थल पर सुरक्षाबलों की उपस्थिति नहीं थी. यह माओवादियों की मज़बूती नहीं, उनकी हताशा को दिखाता है."

बताया जा रहा है कि बीजापुर में शनिवार को संदिग्ध माओवादियों ने एक दर्जन से ज़्यादा ट्रक, ट्रैक्टर और मिक्सर मशीन को आग लगा दी.

बीजापुर के ही तोयनार में छुट्टी से लौट रहे सहायक आरक्षक सीताराम बाकड़े को अगवा कर लिया गया और फिर रविवार को उनकी हत्या कर दी गई.

दंतेवाड़ा के गाटम में भी संदिग्ध माओवादियों ने एक ग्रामीण की गोली मार कर हत्या कर दी.

माओवादियों के एक बड़े दल ने भारत सरकार के उपक्रम नेशनल मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन की तेरह माइंस पर धावा बोला और कर्मचारियों को बंधक बना कर वहां आगजनी की.

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Image caption फ़ाइल फ़ोटो

कई दिन से चल रही है हिंसा और आगजनी

इसके अलावा एस्सार कंपनी के इलाक़े में भी तीन गाड़ियों में आग लगा दी गई.

वहीं बीजापुर में बारात ले कर जा रही एक यात्री बस समेत तीन बसों को आग लगा दी गई.

रविवार की शाम संदिग्ध माओवादियों ने एक मालगाड़ी को निशाना बनाया और बचेली-भांसी के बीच इसके कुछ डिब्बों को पटरी से उतार दिया.

इसके बाद किरंदुल की ओर जाने वाली पैसेंजर ट्रेन को पहले ही डिलमिली स्टेशन रोक दिया गया.

राज्य के कई इलाक़ों से माओवादियों का पूरी तरह सफ़ाया हो जाने का दावा करने वाले गृहमंत्री रामसेवक पैंकरा इन घटनाओं पर टिप्पणी के लिये उपस्थित नहीं थे.

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Image caption मुख्यमंत्री रमन सिंह ने कहा कि माओवादियों को पता चल गया है कि उनकी उल्टी गिनती शुरू हो गई है

'माओवादियों की उल्टी गिनती शुरू हो गई है'

लेकिन मुख्यमंत्री रमन सिंह ने सोमवार को इन घटनाओं पर चिंता जताई और कहा कि माओवादी अब ग्रामीणों को, यात्री बसों को, स्कूलों को, हाट बाजार में जा रहे ग्रामीणों को प्रताड़ित कर रहे हैं, इससे पता चलता है कि वे बौखलाहट में हैं.

रमन सिंह ने कहा- "उन्हें पता चल गया है कि उनकी उल्टी गिनती शुरू हो गई है."

माओवाद के जानकार और वरिष्ठ पत्रकार रुचिर गर्ग इसे 'गुरिल्ला लड़ाई' का एक सामान्य तरीक़ा मानते हैं.

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'यह गुरिल्ला रणनीति का हिस्सा है'

रुचिर गर्ग मानते हैं कि बस्तर के कुछ ऐसे इलाक़ों में सुरक्षाबलों ने पैठ बनाई है, जिन्हें माओवादियों का इलाक़ा कहा जाता था.

सरकार भी दावा कर रही है कि माओवादियों पर दबाव बढ़ा है और बड़ी संख्या में फ़ोर्स तैनात की गई है.

रुचिर गर्ग कहते हैं, "यह सब अपनी जगह सही है, लेकिन माओवादियों की गुरिल्ला लड़ाई को जानने-समझने वाला कोई भी व्यक्ति यह नहीं कह सकता कि कुछ दिनों तक कोई वारदात नहीं हुई तो माओवादियों का ख़ात्मा हो गया. इसी तरह किसी बड़ी वारदात के बाद यह भी नहीं मानना चाहिए कि माओवादी मज़बूत हो गए हैं. यह माओवादियों की गोरिल्ला रणनीति का हिस्सा है और उन्हें जब मौक़ा मिलता है, वे अपनी कार्रवाइयों को अंजाम देते हैं."

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