'भाजपा सत्ता चलाने के खेल को समझ गई है'

  • 8 फरवरी 2018
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अगले साल आम चुनाव होने वाले हैं और इससे ठीक पहले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के घटक दलों की खींच-तान ने राजनीतिक सरगर्मियां तेज़ कर दी हैं.

गठबंधन की एक महत्वपूर्ण घटक मानी जाने वाली तेलुगूदेशम पार्टी ने भारतीय जनता पार्टी के साथ अपनी नाराज़गी खुलकर ज़ताई है.

शिवसेना के बाद तेलुगूदेशम पार्टी दूसरी ऐसी पार्टी है जिसने इतना खुलकर सरकार के ख़िलाफ़ बोलना शुरू किया हो.

पार्टी सुप्रीमो चंद्रबाबू नायडू ने केंद्र सरकार पर आंध्रप्रदेश की अनदेखी का आरोप लगाया है.

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टीडीपी और अकाली

हलाकि पार्टी ने ये भी कहा है कि फिलहाल वो गठबंधन से बाहर तो निकलेगी नहीं मगर खुलकर अपना विरोध दर्ज कराती रहेगी.

संसद के बजट सत्र के दौरान तेलुगूदेशम पार्टी के सांसद ऐसा कर भी रहे हैं.

पार्टी के सांसदों ने आरोप लगाया कि पिछले चार सालों से वो केंद्र सरकार की तरफ से मदद का ही इंतज़ार करते आ रहे हैं.

वहीँ शिरोमणि अकाली दल के राज्यसभा सांसद सुखदेव सिंह ढींडसा का भी आरोप है कि गठबंधन का हिस्सा होते हुए भी उनकी पार्टी से किसी को भी किसी राज्य का राज्यपाल नहीं बनाया गया है.

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गठबंधन में तनातनी

जम्मू और कश्मीर में पीडीपी के साथ भाजपा के गठबंधन को 'सास और बहू' के रिश्ते की तरह ही देखा जाता है.

राजनीतिक विश्लेषक जगदीश उपासने कहते हैं कि गठबंधन के दलों में इस तरह की आपसी तनातनी चलती रहती है.

इस लिए वो कहते हैं कि तेलुगूदेशम पार्टी को लेकर किसी नतीजे पर नहीं पहुंचना चाहिए.

बीबीसी से बात करते हुए उनका कहना था, "कई बार राजनीतिक दल गठबंधन में रहते हुए भी एक दूसरे के ख़िलाफ़ चुनाव लड़ते हैं. ये भी लोकतंत्र की ख़ूबसूरती का हिस्सा है. दलों में आपस में मनमुटाव भी होते हैं. मसले उठते रहते हैं. ये इसी तरह चलता रहता है."

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राष्ट्रीय दलों की रणनीति

मगर वरिष्ठ पत्रकार अलोक मेहता मानते हैं कि बड़े राष्ट्रीय दलों की रणनीति का हिस्सा ही होता है क्षेत्रीय दलों को कमज़ोर कर देना या फिर उन्हें पूरी तरह ख़त्म कर देना.

मेहता कहते हैं कि ऐसे प्रयोग पूर्व में कांग्रेस ने भी किए हैं. कुछ मौक़े ऐसे भी आए जब पूरे क्षेत्रीय दल का ही कांग्रेस में विलय कर दिया गया हो.

लेकिन मेहता कहते हैं कि भारतीय जनता पार्टी को भी इसमें महारत हासिल होती जा रही है.

वो कहते हैं, "भाजपा ने ऐसे प्रयोग करना शुरू कर दिया है. चाहे दूसरे दलों के नेताओं को तोड़कर लाने का मामला हो या फिर अपने सहयोगी दल के अस्तित्व ख़त्म करने का मामला हो, भाजपा सत्ता चलाने के खेल को समझ गई है."

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साल 2019 में आम चुनाव होने वाले हैं. आंध्र प्रदेश में भी लोकसभा के साथ ही विधानसभा के चुनाव होने हैं.

इसी साल मार्च या अप्रैल तक दक्षिणी राज्य कनार्टक में भी चुनाव होने है. बड़े गठबंधनों ने इसे लेकर अपनी चुनावी रणनीति बनानी शुरू कर दी है.

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