यूपीः अब तक सवा छह लाख छात्रों ने बोर्ड परीक्षा छोड़ी

  • 8 फरवरी 2018
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Image caption उप मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा हर दिन परीक्षा केंद्रों का दौरा कर रहे हैं.

उत्तर प्रदेश बोर्ड परीक्षाओं के तीसरे दिन तक करीब सवा छह लाख छात्र परिक्षाएं छोड़ चुके हैं.

इस बार उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने परिक्षाओं में नकल रोकने के लिए अभूतपूर्व इंतज़ाम किए हैं.

परीक्षा केंद्रों में सीसीटीवी कैमरे लगाने के अलावा उन परीक्षा केंद्रों को रद्द भी किया गया है जहां से पहले नकल की शिकायतें मिली हैं.

बीबीसी ने परीक्षाओं में छात्रों के अनुपस्थित रहने के मुद्दे समेत नकल रोकने के इस अभियान पर उत्तर प्रदेश के उप-मुख्मंत्री और शिक्षा मंत्री दिनेश शर्मा से बात की.

दिनेश शर्मा बताते हैं, "मैं स्वंय एक प्रोफ़ेसर हूं और मैं जानता था कि नकल के आयाम कौन से हैं. ये बच्चों के लिए कितने नुक़सानदेह हैं ये कल्पना से परे है."

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दिनेश शर्मा कहते हैं कि प्रदेश में नकल एक व्यवसाय बन गया था जो हज़ारों करोड़ का हो सकता है. कई तरह से परीक्षा केंद्रों पर नकल कराई जाती थी. वो कहते थे, "नकल के बदले एक-एक छात्र से लाख रुपए से लेकर डेढ़ लाख रुपए तक लेने की सूचनाएं हमारे पास आती थीं. नकल की वजह से मेधावी छात्राओं के साथ अन्याय किया जा रहा था."

वो कहते हैं, "नकल कराने के लिए परीक्षा केंद्रों में वीआईपी कक्ष तक बनाए जाते थे. हमने साल भर पहले ही नकल रोकने का फ़ैसला ले लिया था. हमने साल भर स्कूलों में पढ़ाई पर ज़ोर दिया और अब कड़ी निगरानी में परीक्षा करा रहे हैं."

दिनेश शर्मा का ये भी कहना है कि उत्तर प्रदेश बाहरी राज्यों से आकर नकल करके पास होने वाले छात्रों के लिए पिकनिक स्पॉट तक बन गया था.

वो कहते हैं, "इन सब गतिविधियों को रोकने के लिए हमने हर स्तर पर तैयारी की और सॉफ्टवेयर तक विकसित किया. हमने क़रीब चार हज़ार परीक्षा केंद्र कम कर दिए."

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Image caption रायबरेली के एक परीक्षा केंद्र में परीक्षा देते छात्र.

उत्तर प्रदेश में इस बार हर परीक्षा केंद्र में सीसीटीवी कैमरे लगाए हैं. परीक्षा देने वाले जिन छात्रों से बीबीसी ने बात की उनका कहना था कि इस बार नकल रोकने के लिए हुए विशेष इंतेज़ामों की वजह से बिलकुल भी नकल नहीं हो पा रही है.

रायबरेली में बारहवीं की परीक्षा देने वाली एक छात्रा ने बीबीसी से कहा, "नकल नहीं हो रही है ये बहुत अच्छी बात है, कम से कम पढ़ने वाले बच्चे मेहनत से परीक्षा देकर कुछ अपनी उन्नति तो कर पाएंगे. अब हमारे जो भी नंबर होंगे हमारी मेहनत के होंगे. कोई हमारे रिज़ल्ट पर शक़ नहीं करेगा."

वहीं एक छात्र का कहना था, "इस बार सख़्ती बहुत ज़्यादा हो रही है. गेट पर चैकिंग होती है, फिर अंदर सीसीटीवी लगे हैं, गर्दन तक नहीं घुमा पाते हैं. नकल करने का तो सोच भी नहीं सकते. लेकिन अच्छी बात ये है कि अब सिर्फ़ पढ़ने वाले ही आगे बढ़ पाएंगे. ये मेहनत करने वालों के साथ न्याय है."

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Image caption इस बार सभी परीक्षा कक्षों में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं.

माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की दसवीं और बारहवीं की परीक्षाएं में इस बार कुल 66 लाख सैंतीस हज़ार परिक्षार्थी बैठने थे. लेकिन अब तक सवा छह लाख छात्र परिक्षाएं छोड़ चुके हैं.

इस पर दिनेश शर्मा कहते हैं, "ये दुखद है लेकिन भविष्य के लिए ये सुखद पहलू है. छात्रों का परीक्षा छोड़ना दुखद है लेकिन परीक्षा छोड़ने वाले ज़्यादातर छात्र उन स्कूलों के हैं जहां साल पर पढ़ाई नहीं होती थी और छात्र सिर्फ़ नकल के भरोसे परीक्षा देने आते थे."

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गोंडा ज़िले के बारे में एक बयान में कहा था कि वहां नकल के टेंडर होते हैं. इस पर दिनेश शर्मा कहते हैं, "अब नकल के टेंडर कल्पना से परे हैं. मैंने गोंडा का दौरा किया है वहां भी बाक़ी ज़िले की तरह सीसीटीवी की निगरानी में परीक्षा हो रही है."

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वहीं कुछ लोगों का ये भी कहना है कि इस बार सख़्त निगरानी में परीक्षा देने वाले छात्र उन छात्रों से मेरिट में मुक़ाबला नहीं कर पाएंगे जिन्होंने पहले अलग तरह के माहौल में परीक्षा दी है.

आलोचकों का कहना है कि सरकार का पूरा ज़ोर नकल विहीन परीक्षा पर है लेकिन शिक्षा व्यवस्था में मूल सुधार के लिए कोई योजना नहीं है. इस सवाल पर दिनेश शर्मा कहते हैं कि शुरुआत कहीं से तो करनी थी.

शर्मा कहते हैं, "143 जनप्रतिनिधि मेरे पास आए थे. पांच सौ से अधिक और सिफ़ारिशें आईं थीं. मैंने उन सबकों नाराज़ करके नकल के ख़िलाफ़ ये अभियान चलाया है. मैं स्वयं शिक्षा से जुड़ा रहा हूं. अपने रहते मैं नकल नहीं होने दूंगा."

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