नज़रियाः कैसा होगा मॉडल निकाहनामा?

  • 10 फरवरी 2018
निकाह इमेज कॉपीरइट Getty Images

आंध्र प्रदेश के हैदराबाद में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का तीन दिवसीय अधिवेशन जारी है. अधिवेशन में जिन विषयों पर चर्चा की जा रही है उनमें तीन तलाक़ और अयोध्या विवाद शामिल हैं.

बीजेपी शासित केंद्र सरकार तीन तलाक़ को कानूनन अपराध बनाने के लिए मुस्लिम महिला (विवाह अधिकारों का संरक्षण) बिल 2017 संसद में पेश कर चुकी है.

वहीं, मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का कहना है कि वह तीन तलाक़ यानी तलाके बिद्दत रोकने के लिए मॉडल निकाहनामा लाएगी.

क्या है यह मॉडल निकाहनामा और इससे क्या कोई हल निकल पाएगा? यही सवाल बीबीसी संवाददाता मोहम्मद शाहिद ने नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी हैदराबाद के कुलपतिफ़ैज़ान मुस्तफ़ा से पूछा.

इमेज कॉपीरइट Getty Images

पढ़ें फ़ैज़ान मुसत्फ़ा का नज़रिया...

पर्सनल लॉ के मामलों में आंतरिक कानूनों में बदलाव अच्छा परिणाम देंगे. संसद या सुप्रीम कोर्ट से पर्सनल लॉ के लिए बनाए गए क़ानून ज़मीन पर अच्छा काम नहीं करते हैं.

इस्लाम में शादी पति-पत्नी के बीच एक अनुबंध या संविदा होती है. इस वजह से वे किसी भी चीज़ पर राज़ी हो सकते हैं. तीन तलाक़ को ख़त्म करने का सबसे अच्छा तरीक़ा है कि इससे जुड़ी शर्त को अनुबंध में शामिल किया जाए.

हिंदुओं में जो शादी होती है उसका कोई रिकॉर्ड नहीं होता है. वरमाला, कन्यादान आदि की केवल तस्वीरें होती हैं और उसके आधार पर शादी को लेकर कोर्ट में कोई चुनौती दी जा सकती है.

सुषमा स्वराज को हर दिन फ़ोन क्यों कर रहीं ये पत्नियां?

तीन तलाक़ पर कहाँ थी महिलाओं की आवाज़?

इमेज कॉपीरइट Getty Images

लेकिन मुसलमानों की जो शादी होती है, उसमें एक दस्तावेज़ तैयार किया जाता है. इसकी एक कॉपी काज़ी और एक-एक कॉपी लड़का और लड़की के पास होती है. जिसमें दूल्हा-दुल्हन, माता-पिता और गवाहों की जानकारी के अलावा मेहर की रक़म और जिसके लिए वे बाध्य हैं, ये सभी बातें तय होती हैं.

इसी तरह से अगर इस दस्तावेज़ में थोड़ी तब्दीली कर यह शर्त लिख दें कि कोई भी पति अपनी पत्नी को तीन तलाक़ नहीं देगा तो यह एक अनुबंध की बाध्यता की तरह काम करेगा. यह संसद के क़ानून के मुकाबले अधिक कारगर होगा. ये पति को बाध्य करेगा क्योंकि उसने अनुबंध पर हस्ताक्षर किए हैं. अगर वो इनक़ार करता है तो वे इसके ख़िलाफ़ जाएगा.

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का कहना है कि वे इस तरीक़े को लाना चाहते हैं तो ये कदम स्वागतयोग्य है.

इमेज कॉपीरइट Getty Images

शौहर किस तरह से बाध्य होगा?

अगर मैं किसी से अनुबंध करता हूं कि मुझे उसे 10 करोड़ रुपये देने हैं तो वह अनुबंध बाध्य करता है. शादी एक अनुबंध है और अगर उसमें किसी शर्त को तोड़ा जाता है तो उस शख़्स के ख़िलाफ़ कार्रवाई बनती है.

भारत के क़ानून में मौखिक अनुबंध आज भी मान्य है. निकाहनामा लिखित अनुबंध तो होता ही है और अगर उसमें कुछ शर्तें और जोड़ दी जाएं तो उससे बड़ा साक्ष्य कुछ और नहीं हो सकता है.

तीन तलाक़ को प्रतिबंधित करने का काम केवल संसद या सुप्रीम कोर्ट कर सकता है. सुप्रीम कोर्ट ने भी तीन तलाक़ को प्रतिबंधित नहीं किया है बल्कि उसने कहा है कि इससे शादी नहीं टूटेगी.

कोर्ट ने अपने फ़ैसले में कहा था कि इस प्रकार का तलाक़ रद्द किया जा सकता है. यह आख़िरी जुमला था जो 22 अगस्त के फ़ैसले में सुप्रीम कोर्ट ने दिया था. कोर्ट ने यह भी नहीं कहा है कि यह असंवैधानिक है या इसे अपराध बना दिया जाए.

सरकार ने लोकसभा में जो बिल पास किया है उससे तीन तलाक़ को आपराधिक नहीं बनाया जा सकता है क्योंकि इससे किसी को नुकसान नहीं हुआ है. भारतीय दंड संहिता के अनुसार किसी चीज़ को लेकर तब क़ानून बनाया जा सकता है जब उससे कोई नुकसान हुआ हो.

अगर कोई मर्द निकाहनामे में यह लिख दे कि वह तीन तलाक़ नहीं देगा, इससे अच्छा कुछ और नहीं हो सकता है.

'तीन तलाक़ पर सरकार ने सिर्फ़ मौलानाओं की सुनी'

तीन तलाक़ के बारे में ज़रूरी बातें जो आपको जाननी चाहिए

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए