प्रेस रिव्यू: भारतीय पर्यटकों को मैल कहने वाले गोवा के मंत्री अड़े

  • 11 फरवरी 2018
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भारतीय पर्यटकों को धरती का मैल कहकर फंसे गोवा के मंत्री विजय सरदेसाई ने अपने बयान पर माफी मांगने से इनकार कर दिया है. द टाइम्स ऑफ़ इंडिया में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक सरदेसाई ने शनिवार को अपने बयान को वापस लेने से साफ़ इनकार कर दिया.

गोवा की पर्यटन नीति की समीक्षा की मांग करते हुए सरदेसाई ने कहा है कि सरकार को सस्ते पर्यटन को बढ़ावा नहीं देना चाहिए. गोवा फॉरवर्ड पार्टी के अध्यक्ष सरदेसाई का कहना है कि वो तो बस स्थानीय लोगों की भावनाओं को ही प्रतिबिंबित कर रहे थे.

दैनिक भास्कर अख़बार ने राजस्थान पुलिस के उस सिपाही की दिलेरी की कहानी प्रकाशित की है जिसने राजधानी जयपुर में एक बड़ी बैंक डकैती को नाकाम कर दिया था. अख़बार के मुताबिक सिपाही सीताराम के माता-पिता मज़दूर हैं और वो स्वयं शिक्षक बनना चाहते थे.

बीते सोमवार जयपुर की एक्सिस बैंक में लूट के इरादे से पहुंचे तेरह बदमाशों को सीताराम ने भगा दिया था. सीताराम के मुताबिक उनके लिए वो बहुत डरावना पल था.

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पंजाब के लुधियाना में एक 16 वर्षीय दलित किशोरी ने चार लोगों पर चलती कार में गैंगरेप करने के आरोप लगाए हैं. किशोरी ने पुलिस को दी शिकायत में कहा है कि उसकी पहचान के चार लोगों ने उसके साथ चलती कार में गैंगरेप किया और फिर उसे सड़क किनारे फेंक दिया.

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक किशोरी ने अपनी शिकायत में कहा है कि अभियुक्त पांच फरवरी को उस समय उसके घर पर आए थे जब उसके मां-बाप बाहर थे.

पेशे से ब्यूटीशियन इस किशोरी का कहना है कि उनके साथ एक महिला भी थी और उन्होंने कहा था कि उन्हें शादी में मेकअप करवाना है.

आरोप है कि इन लोगों ने चलती कार में उसके साथ बारी बारी से बलात्कार किया. इस मामले में अभी तक किसी को गिरफ़्तार नहीं किया गया है.

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द टाइम्स ऑफ़ इंडिया में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत का चुनाव आयोग संगीन मामलों में लिप्त अपराधियों को चुनाव लड़ने से रोकना चाहता है.

चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि वह सरकार को जनप्रतिनिधि क़ानून में बदलाव के लिए केंद्र सरकार को निर्देशित करे.

चुनाव आयोग चाहता है कि वो नेता चुनाव न लड़ पाएं जिन पर पांच साल से अधिक की सज़ा के प्रावधान वाला मुक़दमा दर्ज़ हो.

अदालत में पेश हलफ़नामे में चुनाव आयोग कि ओर से कहा गया है कि उन मामलों में छूट दी जानी चाहिए जो चुनाव से छह महीने के भीतर दर्ज किए गए हों. हालांकि सुप्रीम कोर्ट के लिए सरकार को क़ानून बनाने के लिए निर्देशित करना आसान नहीं होगा.

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